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COVID-19: यूपी STF ने शुरू की घटिया पीपीई किट सप्लाई की जांच, राडार पर कई अधिकारी

COVID-19: यूपी STF ने शुरू की घटिया पीपीई किट सप्लाई की जांच, राडार पर कई अधिकारी

डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के दौरान एक खास तरह का सूट पहनते हैं. (सांकेतिक फोटो)

डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के दौरान एक खास तरह का सूट पहनते हैं. (सांकेतिक फोटो)

इस पूरे मामले में घटिया किट सप्लाई के दोषियों तक पहुंचने के अलावा एसटीएफ गुणवत्ता के संबंध में भेजी गई गोपनीय चिट्ठी लीक करने वाले लोगों के भी सिरे तलाश रही है.

लखनऊ. कोरोना संकट (Coronavirus) से संक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों को बचाव के लिए दी जाने वाली पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट (PPI) किट की घटिया सप्लाई का मामला सामने आने के बाद अब इसकी जांच एसटीएफ ने शुरू कर दी है. एसटीएफ ने फिलहाल चिकित्सा शिक्षा के महानिदेशक डॉ. केके गुप्ता का बयान दर्ज किया गया है. सूत्रों के मुताबिक एसटीएफ इस संबंध में
चिकित्सा शिक्षा के सचिव और वित्त नियंत्रक से भी पूछताछ कर सकती है. वहीं मेरठ मेडिकल कॉलेज सहित कई मेडिकल कॉलेजों के प्रिंसिपलों के बयान दर्ज किए जा सकते हैं.

एसटीएफ के राडार पर एमडी श्रुति सिंह
आरोप है कि उप्र मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन लिमिटेड की एमडी श्रुति सिंह ने कमेटी के दबाव में उक्त कंपनी से किट खरीदी थी. लेकिन अब इसमें गड़बड़ी सामने आने पर सारा ठीकरा कंपनी के माथे पर फोडकर अपने आप को बचाने में जुट गई है. ऐसे में जब न्यूज़ 18 उनका पक्ष जानने की कोशिश की तो उन्होंने मिलने से इनकार कर दिया. ऐसे में बड़े हद तक कयास लगाए जा रहे है कि एसटीएफ जल्द श्रुति सिंह से पूछताछ कर सकती है.

गोपनीय चिट्ठी लीक के दोषियों की धड़पकड़ की तैयारी
इस पूरे मामले में घटिया किट सप्लाई के दोषियों तक पहुंचने के अलावा एसटीएफ गुणवत्ता के संबंध में भेजी गई गोपनीय चिट्ठी लीक करने वाले लोगों के भी सिरे तलाश रही है. गौरतलब है कि यूपी मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन की तरफ से खरीदी गई पीपीई किट को लेकर 16 अप्रैल को बड़ा खुलासा हुआ था. मेरठ मेडिकल कॉलेज सहित कई कॉलेजों ने किट की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए उनका इस्तेमाल करने से इंकार कर दिया था.

जिसके बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग के महानिदेशक ने किट के उपयोग पर रोक लगा दी है. हालांकि लखनऊ के केजीएमयू, लोहिया इंस्टिट्यूट और लोकबंधु में किट पहुंची भी नहीं थी. इस बीच शुरू हुई जांच ने चिकित्सा शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है. एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक इस मामले से जुड़ी हर कड़ी को जोड़ा जा रहा है. किट की गुणवत्ता के साथ ही गोपनीय दस्तावेजों के लीक होने को भी जांच के दायरे में रखा गया है.

स्वास्थ्य मंत्री जेपी सिंह थे क्वारंटाइन 
प्रोक्योरमेंट कमेटी ने पीपीई किट खरीद का फैसला तब लिया जब चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री जेपी सिंह कोरोना संक्रमण की आशंका में क्वारंटाइन थे. प्रोक्योरमेंट कमेटी में शामिल चिकित्सा शिक्षा के सचिव मार्केडेज शाही, महानिदेशक केके गुप्ता, विशेष सचिव धीरेंद्र कुमार सचान, सदस्य श्रीश सिंह और वित्त नियंत्रक कृपा शंकर पांडेय ने दिल्ली की एक कंपनी का नाम फाइनल करते हुए उप्र मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन लिमिटेड से किट खरीदवा ली.

इन जिलों में लगी थी इस्तेमाल पर रोक

महानिदेशक डॉ. केके गुप्ता का कहना है कि किट में गड़बड़ी का खुलासा होते ही केजीएमयू, पीजीआई, लोहिया संस्थान, सैफई स्थित आयुर्विज्ञान संस्थान, नोएडा के जीआईएमसी, एसएससीएच संस्थान, कानपुर, आगरा, प्रयागराज, मेरठ झांसी, गोरखपुर, कन्नौज, जालौन, बांदा, बंदायू, सहारपुर, अम्बेडकरनगर, आजमगढ़, बस्ती, बहराइच, फिरोजाबाद, शाहजहांपुर और अयोध्या मेडिकल कॉलेज को पत्र भेजकर कॉरपोरेशन की किट का इस्तेमाल न करने को कहा गया है.

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Tags: CM Yogi, Coronavirus, Lucknow news, Up crime news, UP news, UP police, WHO, Yogi adityanath, लखनऊ

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