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लखनऊ कैंट विधानसभा उपचुनाव: बीजेपी की परंपरागत सीट पर सपा-बसपा ने कभी नहीं जीता चुनाव

Kumari Ranjana | News18 Uttar Pradesh
Updated: October 7, 2019, 4:38 AM IST
लखनऊ कैंट विधानसभा उपचुनाव: बीजेपी की परंपरागत सीट पर सपा-बसपा ने कभी नहीं जीता चुनाव
अखिलेश यादव और मायावती (फाइल फोटो)

इस बार भी सबके अपने अपने दावे हैं लेकिन प्रदेश के सभी सीटों की तरह लखनऊ कैंट विधानसभा क्षेत्र में भी विपक्षी पार्टी कोई भी हो, लड़ाई बीजेपी (BJP) से ही है.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में होने वाले 11 सीटों पर विधानसभा उपचुनाव (By Election) में सभी सीटों पर विपक्षी दलों की लड़ाई बीजेपी (BJP) से है. इन 11 विधानसभा क्षेत्र में से लखनऊ कैंट (Lucknow Cantonment) सीट भी एक है. आइए जानते हैं कैसी चल रही है विधानसभा उपचुनाव की तैयारियां और कैसा चल रहा है कैंट का उपचुनाव.

लखनऊ कैंट सीट पर 2017 में रीता बहुगुणा जोशी भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में विजयी हुई थीं. इससे पहले 2012 में भी रीता बहुगुणा जोशी ही इस सीट से विधायक थी लेकिन तब उन्होंने चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था. लखनऊ कैंट सीट 2012 से पहले बीजेपी के पास थी. उपचुनाव में बीजेपी ने अपने पूर्व विधायक को टिकट दिया है. सुरेश तिवारी 1996 से 2007 तक लगातार विधायक रहे हैं. इस बार फिर जोर आजमाइश में लगे हैं. बीजेपी प्रत्याशी सुरेश तिवारी कहते हैं कि जनता चुनाव लड़ रही है. मुहर मोदी जी और योगी जी के नीतियों पर ही लगेगी. बाकी प्रत्याशियों को सुरेश तिवारी बाहरी बताते हैं.

सपा ने कभी नहीं जीता चुनाव
2017 के विधानसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर समाजवादी पार्टी की अपर्णा यादव रही थी. इस बार हो रहे उपचुनाव में सपा ने अपर्णा को प्रत्याशी नहीं बनाया है. अपर्णा यादव को कांग्रेस का भी समर्थन प्राप्त था. इस बार मेजर आशीष चतुर्वेदी सपा के प्रत्याशी हैं, जो सपाईयों के लिए भी नए हैं. सैनिक कल्याण संघ के भूतपूर्व अध्यक्ष मेजर आशीष भी गलियों की खाक छान रहे हैं. बीजेपी इनको बाहरी बता रही है, लेकिन दावे इनके भी कम नहीं हैं. मेजर आशीष चतुर्वेदी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं.

कांग्रेस से रीता जोशी जीत चुकी हैं चुनाव
कांग्रेस ने नया चेहरे के रूप में दिलप्रीत सिंह को उतारा है. कांग्रेस 2012 में जरुर ये सीट जीती थी, लेकिन उसमें रीता जोशी का प्रत्याशी होना भी अहम था. लखनऊ कैंट सीट पर पहाड़ के वोटरों की संख्या अच्छी-खासी है. 2012 के चुनाव में रीता जोशी को 63052 वोट मिले थे, उस समय बीजेपी प्रत्याशी सुरेश तिवारी को 41,299 वोट मिले थे. बसपा तीसरे नंबर पर रही थी. इस बार भी कांग्रेस दमखम लगा रही है. कांग्रेस के निशाने पर भी बीजेपी ही है.

पहली बार उपचुनाव लड़ने उतरी है बसपा
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पहली बार बसपा भी उपचुनाव लड़ रही है. बसपा ने अरुण द्विवेदी को अपना उम्मीदवार बनाया है. भले ही बसपा पहली बार उपचुनाव लड़ रही हो, लेकिन उम्मीदवार अनुभवी हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में लखनऊ उत्तरी से अरुण द्विवेदी चुनाव लड़ चुके हैं. अब कैंट में दमखम लगाए हुए हैं. इनका मानना है कि बसपा पहली बार उपचुनाव में उतरी है लेकिन दावेदारी मजबूत है.

कैंट विधानसभा क्षेत्र के मतदाता
लखनऊ जिले की कैंट विधानसभा सीट में कुल 385341 मतदाता हैं. इनमें से 209870 पुरुष मतदाता और 175447 महिला मतदाता है. इस सीट पर 24 मतदाता ट्रांसजेंडर भी हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की रीता बहुगुणा जोशी को कुल 95402 वोट मिले थे जबकि समाजवादी पार्टी की अपर्णा यादव को कांग्रेस समर्थन के बाद 61606 वोट मिले थे. बीएसपी को 26036 हजार वोट मिले थे. कैंट की सीट परबीएसपी और सपा कभी जीत दर्ज नहीं करा पाई है. इस बार भी सबके अपने अपने दावे हैं लेकिन प्रदेश के सभी सीटों की तरह यहां भी विपक्षी पार्टी कोई भी हो, लड़ाई बीजेपी से ही है.

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First published: October 7, 2019, 4:30 AM IST
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