यूपी एक्सप्रेसवे के खाते से फर्जी चेक लगाकर उड़ाए 39 लाख रुपए, ऐसे हुआ खुलासा
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यूपी एक्सप्रेसवे के खाते से फर्जी चेक लगाकर उड़ाए 39 लाख रुपए, ऐसे हुआ खुलासा
यूपीडा में बड़ा फर्जीवाड़ा

UPEIDA Fake Cheque Scam: जब पांचवां चेक आया तो पूरे मामले का खुलासा हुआ. बैंक के चीफ मैनेजर का कहना है कि 6 अगस्त को शादाब अनवर के नाम से सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से प्राधिकरण का 9,85,600 रुपये का चेक आया.

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  • Last Updated: August 10, 2020, 12:14 PM IST
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) के बैंक खाते से फर्जीवाड़े के बाद हड़कंप मचा हुआ है. जालसाजों ने फर्जी चेक (Fake Checque) के जरिए 39 लाख रुपये उड़ा लिए. मामले का खुलासा तब हुआ जब बार फर्जी चेक आने पर बैंक कर्मियों ने प्राधिकरण के अफसरों से संपर्क किया तो धांधली का खुलासा हुआ. अब यूपीडा की तरफ से स्टाप पेमेंट लगाकर जांच की मांग की गई. इस मामले में बैंक के चीफ मैनेजर ने विभूतिखण्ड थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है.

इंस्पेक्टर विभूतिखंड संजय शुक्ला ने बताया एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है. इंस्पेक्टर संजय शुक्ला के मुताबिक गोमतीनगर के विभूतिखण्ड स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा है. इसके चीफ मैनेजर संजय कुमार के मुताबिक उनकी शाखा में उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण का बचत खाता है. 27 जुलाई को प्राधिकरण का 9 लाख 93 हजार का चेक अरविंद कुमार के नाम से एसबीआई वाराणसी से क्लीयर होने के लिए आया, जिसे बैंक ने पास कर दिया. इसके बाद 31 जुलाई को दोबारा से अरविंद कुमार के नाम से 9 लाख 98 हजार चार सौ रुपये का चेक बैंक में क्लीयर होने के लिए आया, ये भी पास कर दिया गया. इसके बाद 3 अगस्त को शादाब अनवर के नाम से प्राधिकरण का 9 लाख 68 हजार पांच सौ रुपये का चेक पास किया गया. इसके दो दिन बाद यूनियन बैंक आफ इंडिया की तरफ से अशरफ नाम के व्यक्ति के लिए प्राधिकरण का 9 लाख 86 हजार सात सौ रुपये का चेक बैंक आया, इसे भी क्लीयर कर दिया गया.

ऐसे हुआ खुलासा



जब पांचवां चेक आया तो पूरे मामले का खुलासा हुआ. बैंक के चीफ मैनेजर का कहना है कि 6 अगस्त को शादाब अनवर के नाम से सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से प्राधिकरण का 9,85,600 रुपये का चेक आया. बैंक ने इस बाबत प्राधिकरण के अफसरों से संपर्क किया तो पता चला कि वहां से ऐसा कोई चेक जारी नहीं किया गया है. इस पर प्राधिकरण की तरफ से फौरन स्टॉप पेमेंट लगवाया गया. बाद में पता चला कि पूर्व में जिन चार चेकों के माध्यम से प्राधिकरण के खाते से रुपये आहरित किए गए थे, वे सभी फर्जी थे. उक्त नंबर के सभी चेक प्राधिकरण के पास मौजूद थे.
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