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UPPCL PF Scam: दो अधिकारियों की गिरफ्तारी के साथ मौजूदा चेयरमैन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल ?

News18 Uttar Pradesh
Updated: November 4, 2019, 12:51 PM IST
UPPCL PF Scam: दो अधिकारियों की गिरफ्तारी के साथ मौजूदा चेयरमैन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल ?
शक्ति भवन लखनऊ (uppcl कार्यालय- फ़ाइल फोटो )

उत्तर प्रदेश पॉवर सेक्टर इम्प्लॉईज ट्रस्ट घोटाले (Uttar Pradesh Power Sector Employees Trust scam) के खुलासे बाद योगी सरकार (Yogi Government) कड़ी कार्रवाई करते हुए इस मामले के प्रथम दृष्टया जिम्मेदार UPPCL के निदेशक और महाप्रबंधक वित्त के खिलाफ FIR दर्ज कराकर उन्हें जेल भेज दिया है. वहीं इस मामले में निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई के लिए DHFL मामले की जांच सीबीआई (CBI) से कराने की संस्तुति भी कर दी है.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश पॉवर सेक्टर इम्प्लॉईज ट्रस्ट में सामने आए अरबों के घोटाले के और 2268 करोड़ के पीएफ घोटाले के बाद जैसे-जैसे और खुलासे हो रहे हैं UPPCL के पूर्व चेयरमैन संजय अग्रवाल और एमडी ए पी मिश्रा के साथ मौजूदा चेयरमैन आलोक कुमार की भी भूमिका पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए है. हालांकि इस घोटाले के सामने आते ही योगी सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए इस मामले के प्रथम दृष्टया जिम्मेदार UPPCL के निदेशक और महाप्रबंधक वित्त के खिलाफ FIR दर्ज कराकर उन्हें जेल भेज दिया है. साथ ही इस पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति भी कर दी है.

लेकिन विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति सिर्फ इतने से संतुष्ट नहीं है. उसका मानना है कि वर्तमान एमडी और चेयरमैन भी इस घोटाले के जिम्मेदार हैं और उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जरुरत है. वहीं विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने भी इस मुद्दे को लेकर योगी सरकार की मंशा पर सवालिया निशान लगाए हैं.

अखिलेश सरकार में हुई अनियमितता!
गौरतलब है कि UPPCL कर्मियों के पीएफ का पैसा केंद्र सरकार की गाईडलाईन को दरकिनार कर निजी कंपनी DHFL में निवेश करने का फैसला अखिलेश सरकार में हुआ था. यह फैसला 21 अप्रैल 2014 को हुई उत्तर प्रदेश स्टेट पावर सेक्टर इम्पलाइज ट्रस्ट के बोर्ड ऑफ़ ट्रस्टीज की बैठक में किया गया था. जिसके चलते मार्च 2017 से दिसंबर 2018 तक UPPCL कर्मियों के पीएफ का 4122.70 करोड़ रूपया DHFL में जमा किया गया. लेकिन इसी बीच मुंबई हाईकोर्ट ने डीएचएफएल द्वारा किए जाने वाले सभी भुगतान पर रोक लगा दी. जिससे UPPCL कर्मियों के पीएफ का करीब 2228 करोड़ रूपया DHFL में फंस जाने का खुलासा हुआ जिसके बाद अफरातफरी मच गई.

उत्तर प्रदेश पॉवर सेक्टर इम्प्लॉईज ट्रस्ट घोटाले के खुलासे बाद योगी सरकार की कड़ी कार्रवाई से हड़कंप मच गया है क्योंकि एक ओर जहां योगी सरकार ने इस मामले के प्रथम दृष्टया जिम्मेदार UPPCL के निदेशक और महाप्रबंधक वित्त के खिलाफ FIR दर्ज कराकर उन्हें जेल भेज दिया है. वहीं इस मामले में निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई के लिए DHFL मामले की जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति भी कर दी है. हालांकि अब इस मामले में सिर्फ जेल गए अधिकारियों की ही नहीं बल्कि ऊर्जा विभाग के पूर्व व मौजूदा प्रमुख सचिव और उ0प्र0 पॉवर सेक्टर इम्प्लॉईज ट्रस्ट के अध्यक्ष की भी भूमिका पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

UPPCL प्रबंधन पर उठे अहम सवाल
सवाल-1 -
आखिर बिना UPPCL चेयरमैन और एमडी की सहमति के कैसे हुआ DHFL में इतना बड़ा निवेश?
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सवाल-2- 17 मार्च 2017 को DHFL में चेयरमैन और एमडी की बिना अनुमति हुए पहले निवेश के बाद किसकी अनुमति से DHFL में दिसंबर 2018 तक निवेश किया जाता रहा?
सवाल-3- DHFL मामले की जुलाई में हुई शिकायत और 29 अगस्त को आई UPPCL की रिपोर्ट में अनियमितता मिलने के बाद भी क्यों नहीं हुई कोई कार्रवाई?
सवाल-4- DHFL मामले में UPPCL की रिपोर्ट में अनियमितता मिलते ही तत्काल क्यों नहीं कराई गई इस मामले की विजिलेंस जांच?
सवाल-5- बीते 4 अक्टूबर को DHFL द्वारा मेल कर मुम्बई हाईकोर्ट से उसके भुगतान पर रोक लगाने की दी गई जानकारी के तुरंत बाद क्यों नहीं हुई जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई?
सवाल-5- DHFL मामले की जानकारी के बाद महाप्रबंधक वित्त पीके गुप्ता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के बजाय क्यों उनका तबादला कर पीके गुप्ता को बचाने की हुई कोशिश?
सवाल-6- बीते 10 अक्टूबर को महाप्रबंधक वित्त एवं लेखा पीके गुप्ता को निलंबित करने के बाद भी उनके खिलाफ क्यों नहीं दर्ज कराई गई FIR?
सवाल-7- DHFL मामले में महाप्रबंधक वित्त पीके गुप्ता को निलंबित करने के बाद निदेशक वित्त सुधांशु द्विवेदी के खिलाफ तब क्यों नहीं दर्ज कराई गई FIR?
सवाल-8- उप्र पॉवर सेक्टर इम्प्लॉईज ट्रस्ट की बीते 3 सालों से क्यों नहीं बुलाई गई बोर्ड बैठक?
सवाल-9- 25 जनवरी 2000 के मुख्यमंत्री के साथ हुए समझौते के अनुसार उप्र पॉवर सेक्टर इम्प्लॉईज ट्रस्ट में क्यों नहीं रखा गया कर्मचारी संगठनों का प्रतिनिधि?
सवाल-10- DHFL में नियमो को ताक में रख PF जमा कराने के जिम्मेदार UPPCL के अन्य आला-अधिकारियों पर कब होगी कार्रवाई?

मौजूदा प्रमुख सचिव ऊर्जा की भूमिका पर उठे सवाल
ऐसे में इन सवालों को लेकर अब कर्मचारी संगठन भी खुलकर ऊर्जा विभाग के मौजूदा प्रमुख सचिव और इस बोर्ड के अध्यक्ष आलोक कुमार की भी भूमिका पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं और साथ ही इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मौजूदा प्रमुख सचिव ऊर्जा को तत्काल उनके पद से हटाए जाने की भी मांग कर रहे है. विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के संयोजक शैलेंद्र दुबे कहते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उप्र पॉवर सेक्टर इम्प्लॉईज ट्रस्ट में हुए अरबों रुपये के घोटाले की सीबीआई जांच कराने के निर्णय की हम प्रशंसा करते है. लेकिन इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच हेतु घोटाले में प्रथम दृष्टया दोषी UPPCL के चेयरमैन और एमडी को तत्काल हटाया जाये और उन पर कठोर कार्रवाई की जाए.

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने योगी सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
UPPCL कर्मियों के PF का DHFL में फंसे 2268 करोड़ रुपये फंसने के मुद्दे पर आज कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस की. जिसमें अजय कुमार लल्लू ने योगी सरकार पर जमकर निशाना साधा. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भ्रष्टाचार पर सदन से लेकर हर जगह योगी सरकार जीरो टाॅलरेन्स की बात करती है. लेकिन क्या अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा, चेयरमैन तथा एमडी को बर्खास्त कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उनकी आपराधिक जिम्मेदारी सुनिश्चित करेंगे. कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई को दोषी व्यक्तियेां से वापस कराने की जिम्मेदारी सरकार को सुनिश्चित करनी होगी. ऐसा न होने पर कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर सदन तक कर्मचारियेां की लड़ाई लड़ेगी.

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First published: November 4, 2019, 12:51 PM IST
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