...जब सुषमा स्वराज ने कार्यकर्ताओं की डिमांड पर अचानक कर डालीं 4 रैलियां

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने कहा कि यह खबर (सुषमा स्‍वराज का निधन) ही असहनीय है. विभिन्न अवसरों पर उनका सानिध्य प्राप्त करने का अवसर मिला और हर बार अपनेपन का एहसास हुआ.

Narendra Yadav | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 7, 2019, 5:28 PM IST
...जब सुषमा स्वराज ने कार्यकर्ताओं की डिमांड पर अचानक कर डालीं 4 रैलियां
सुषमा स्‍वराज की वाकपटुता का हर कोई कायल रहा.
Narendra Yadav | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 7, 2019, 5:28 PM IST
पूर्व विदेश मंत्री और भाजपा की दिग्‍गज नेता सुषमा स्वराज को पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने हमेशा एक जुझारू महिला नेता के रूप में देखा है, यूपी की राजनीति में तो उनकी काफी लोकप्रियता थी. लिहाजा उनके असामयिक निधन से हर कोई शोकाकुल है. बीजेपी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने कहा कि यह खबर ही असहनीय है. विभिन्न अवसरों पर सुषमा स्वराज का सानिध्य प्राप्त करने का अवसर मिला और हर बार अपनेपन का एहसास हुआ.

दिनेश शर्मा ने कहा कि मेंबरशिप कैंपेन के अन्तर्गत प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के सानिध्‍य में मुझे राष्ट्रीय संयोजक का दायित्व मिला था. मुझे आज भी याद आता है कि सुषमा स्‍वराज ने स्वयं खडे़ होकर कहा कि मुझे मेरे मोबाइल पर सदस्य बनाओ. उन्‍होंने मेरी बार-बार प्रशंसा की और कहा कि तुमने बहुत अच्छा सदस्य बनाया. एक छोटे से कार्यकर्ता को प्रशंसा करके आगे बढ़ाने की प्रवृत्ति केवल और केवल सुषमा जी में थी.

डिप्‍टी सीएम ने यूं किया याद
दिनेश शर्मा ने उन्हें याद करते हुए कहा कि लखनऊ में माननीय अटल जी के चुनाव में कई बार मुझे कार्यकर्ता के रूप में काम करने का अवसर मिला. एक चुनाव में अचानक सुषमा जी का दौरा लखनऊ में लगा और तय हुआ की उन्हें 2 जनसभाएं करनी है. उनकी चारों तरफ डिमांड थी और कार्यकर्ता आपस में इस बात के लिए नाराज हो रहे थे कि सुषमा मेरे क्षेत्र में नहीं आ रही हैं. उन्‍होंने कार्यकर्ताओं को खुश करने के लिए 4 जनसभाएं कर दी.

डिप्टी सीएम ने बताया कि चारों जनसभाओं के दौरान वह उनके साथ रहे. समय का अभाव था लेकिन उन्‍होंने मेरी प्रशंसा के लिए हर जनसभा में दो-चार शब्द कहे. यकीनन छोटे से कार्यकर्ता को प्रोत्साहित करने के लिए वे न केवल आगे आती थीं अपितु अपनी वाकपटुता से लोगों को सम्मोहित करने का काम भी करती थीं.

ऐसी थीं सुषमा
यूपी के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने सुषमा की कार्यशैली और व्यवहार को याद करते हुए कहा कि जब संसद में खड़ी होती थीं तो लोग उन्हें संसदीय मर्मग्य के रूप में देखते थे. जब वो घर में दिखती थीं तो आम साधारण सी गृहणी दिखती थीं. जब उन्हे कुर्सी पर बैठकर काम करते हुए देखते थे तो एक अच्छी प्रशासक नजर आती थीं.
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कैबिनेट मंत्री मुकुट विहारी वर्मा ये बोले
यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री मुकुट विहारी वर्मा ने सुषमा स्वराज के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए इसे अपूर्णीय क्षति बताया. साथ ही उन्‍होंने सुषमा स्वराज का एक वाक्या याद करते हुए कहा कि वे बहराइच जिले में बीजेपी के धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे. जिला प्रशासन और सरकार ने उन पर काफी दबाव बना रखा था. इसी बीच दिल्ली से सुषमा स्वराज बहराइच पहुंच गयी. उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया और प्रोत्साहित किया वर्मा ने कहा कि वे एक सशक्त महिला नेता थी और उनके निधन से मैं काफी दुखी हूं. ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उनके परिवार को कष्ट सहन करने की शक्ति प्रदान करे.

यूपी सरकार में सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने सुषमा स्वराज के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निधन से देश क्षुब्ध और शतब्ध है.


यूपी के सिंचाई मंत्री ने रखी दिल की बात
यूपी सरकार में सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने सुषमा स्वराज के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निधन से देश क्षुब्ध और शतब्ध है. ऐसा लग रहा है कि हमारे बीच से कोई इतना महत्वपूर्ण व्यक्ति चला गया जिसकी क्षति जीवनभर सालती रहेगी. सुषमा स्वराज भारतीय राजनीति, संस्कृति और सभ्यता की पुरोधा थी, जिस तरीके से उन्होंने संस्कृति और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं को कायम करने के लिए राजनीति का एक नया आयाम शुरू किया था. उस आयाम पर चलते हुए राजनीति को एक तपस्या के आधार पर करना सिखाया. आज देश को राजनीतिक संदर्भ मे अपूर्णीय क्षति हुई है..

धर्मपाल सिंह ने सुषमा स्वराज के साथ काम करने के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि वर्ष 1996 मुझे याद आ रहा है जब हमारा बहुमत होने के बावजूद हमारी सरकार नहीं बनने दी जा रही थी. उस समय प्रदेश के अध्यक्ष राजनाथ सिंह थे और सरकार बनने में रुकावट आ रही थी. हम लोग दिल्ली गये थे और सभी विधायकों का नेतृत्व सुषमा ने किया था. उन्‍होंने प्रभावशाली भाषण दिया था और इसी वजह से यूपी में सरकार बनी थी.

धर्मपाल सिंह ने आगे कहा कि सुषमा के साथ लखनऊ में कई बार काम करने का मौका मिला और एक बार उन्‍होंने कहा था कि राजनीति में एक राजधर्म होता है और राजधर्म राजनीति से बहुत ऊपर होता है. आज मुझे उनकी वह बात याद है. हर नेता को राजधर्म का पालन करना चाहिए. व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर काम करना चाहिए.

रिपोर्ट: नरेंद्र कुमार यादव

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First published: August 7, 2019, 4:03 PM IST
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