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जानिए योगी सरकार के आखिरी बजट के 5 फैसले जो हैं चुनावी और चौंकाने वाले

योगी सरकार ने अपने आखिरी पूर्ण बजट के जरिये विधानसभा चुनाव 2022 की जंग जीतने की रूपरेखा जरूर तय कर दी.
योगी सरकार ने अपने आखिरी पूर्ण बजट के जरिये विधानसभा चुनाव 2022 की जंग जीतने की रूपरेखा जरूर तय कर दी.

Uttar Pradesh Budget 2021: योगी सरकार ने अपने कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट में दावा किया कि यह बजट प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के संकल्प के साथ लाया गया है. बजट के कुछ फैसले लोक-लुभावन तो हैं ही लेकिन कुछ फैसले ऐसे भी हैं जो सबको चौंकाते हैं.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सोमवार को अपने कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट पेश किया. यह पहला पेपरलेस बजट था. प्रदेश के वित्तमंत्री सुरेश खन्ना ने  5 लाख 50 हजार 270 करोड़ 78 लाख ऐतिहासिक बजट पेश किया है. योगी सरकार ने दावा किया कि यह बजट प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के संकल्प के साथ लाया गया है. योगी सरकार ने अपने आखिरी पूर्ण बजट के जरिये विधानसभा चुनाव 2022 की जंग जीतने की रूपरेखा जरूर तय कर दी. आइए जानते हैं बजट के कुछ महत्वपूर्ण फैसलों के बारे में:

1. साहसिक फैसले
सभी को उम्मीद थी कि राज्य सरकार पेट्रोल-डीजल और गैस के बढ़ते दामों से लोगों को राहत दिलाएगी. उम्मीद की जा रही थी कि वैट में थोड़ी कटौती करके कम से कम पांच रुपये की राहत तो मिलती लेकिन, सरकार ने बजट में फिलहाल इसका कोई इंतजाम नहीं किया है. सरकार के कड़े फैसले के रूप में इसे देखा
जा रहा है. साथ ही जरूरी भी बताया जा रहा है क्योंकि वैट कम करने से आम जनता को थोड़ी राहत तो मिलती लेकिन, सरकारी खजाने पर इसका जबरदस्त जोर पड़ता जिससे दूसरी योजनाओं के लिए पैसे की किल्लत कम हो सकती थी. बजट में योगी सरकार ने नई योजनाओं के लिए 27 हजार करोड़ की व्यवस्था की है. इसकी तारीफ तो उनके आलोचक भी कर रहे हैं. ज्यादातर अर्थशास्त्री मानते हैं कि कोविड काल में पैसे की तंगी झेल चुकी सरकार ने नई योजनाओं के लिए जो पैसा अगले वित्तीय वर्ष के लिए रखा है, उससे उसके दमदार फैसले लेने की नीयत झलकती है. इसमें कोई दो राय नहीं कि पैसे का इंतजाम अभी भी कम चुनौतीपूर्ण नहीं रहेगा फिर भी ऐसे फैसले लेने के लिए जिगरा तो चाहिए ही.
2. कुछ लोक-लुभावन फैसले भी
इसमें कोई दो राय नहीं कि चुनावी वर्ष में सरकारें हमेशा से लोक लुभावन बजट पेश करती रही हैं. योगी सरकार के बजट में भी कुछ ऐसे फैसले हैं जिन्हें चुनावी कहा जा सकता है. सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए 1430 करोड़ की अलग छात्रवृति की योजना इसी कड़ी में दिखाई देता है. इसके अलावा फ्री कोचिंग और टैबलेट बांटने का फैसला भी इसी ओेर इशारा करता है. किसानों को फ्री में पानी मिल सके इसके लिए सरकार ने 700 करोड़ का बजट इस बार दिया है. किसान दुर्घटना बीमा में बदलाव किया गया है. अब परिवार के मुखिया की ही नहीं बल्कि किसी भी कमाऊ पूत की मौत होगी तो बीमे के रूप में 5


लाख की रकम मिलेगी. सरकार ने 600 करोड़ इसके लिए रखे हैं.

3. स्वच्छता मिशन के लिए बजट में बढ़ोतरी
चौंकाने वाले फैसले योगी सरकार ने इस चुनावी साल में स्वच्छता के लिए जो बजट आवंटित किया है, उसे देखकर अर्थशास्त्रियों की आंखें फंटी की फंटी रह गई हैं. स्वच्छता मिशन के लिए सरकार ने 3 हजार 4 सौ 31 करोड़ का बजट दिया है. पिछले साल के मुकाबले इसमें भारी बढ़ोतरी की गई है. गांव-गांव में और हर घर में अब शौचालय की व्यवस्था रहेगी. इसके अलावा स्वास्थ्य मिशन के लिए आवंटित किए गए 5 हजार 3 सौ 95 करोड़ की रकम भी कम चौंकाने वाली नहीं है. कोरोना काल में सरकार को लग गया है कि ग्रामीण यूपी की सेहत को और सुधारने की जरूरत है. आने वाले वित्तीय वर्ष में इस बजट से प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के साथ साथ जिला अस्पतालों की हालत में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा.

4. आर्थिक हालत को रफ्तार देने वाले फैसले
कोरोना काल में पैसे की कमी की मार सरकार पर इस कदर पड़ी की सरकारी कर्मचारियों और मंत्रियों, विधायकों के वेतन तक में कटौती करनी पड़ी लेकिन, सरकार ने इससे सीख ली है. योगी सरकार ने इस वित्तीय वर्ष के लिए जो प्लान तैयार किया है, उससे राज्य का पूरा मैकेनिज्म चल पड़ेगा. एक्सप्रेस वे, मेट्रो, मेडिकल कॉलेज में निवेश इसकी बड़ी झलक है. पूर्वांचल, गोरखपुर, बुन्देलखण्ड और गंगा एक्सप्रेस वे के निर्माण के लिए सरकार ने 11 हजार 148 करोड़ का भारी भरकम बजट रखा है. खेल समझिए. एक्सप्रेस वे के निर्माण से वो सभी इकाईयां चल पड़ेंगी जो इसके बनने में कच्चा माल सप्लाई करती हैं. मेडिकल कॉलेज हो या फिर मेट्रो, सभी में सीमेण्ट और सरिया जैसी कंपनियों को भरपूर काम मिल जायेगा. इससे बड़े पैमाने पर लोगों के राजगार के अवसर पैदा होंगे.

5. 2022 चुनावों के लिए गेम चेंजर प्लान
सरकार की मजबूती पर वैसे तो फिलहाल कोई सवाल नहीं है लेकिन, साल 2022 में होने वाले चुनावों को देखते हुए सरकार ने गेम चेंजर कार्ड खेला है. अब ये आसानी से लोगों के बीच बातचीत में सुना जा सकता है कि मोदी सरकार ने गांव-गांव घर बनवाकर लोगों को जीत लिया है. योगी सरकार ने भी इसी पैटर्न पर
आने वाले साल के लिए बजट की व्यवस्था की है. गांव वालों के लिए 17 हजार 9 सौ 17 करोड़ की व्यवस्था की गई है. वास्तिवकता में तो ये रकम और भी बड़ी है लेकिन, आवास, मनरेगा और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए ही इतनी रकम दी गई है. आवास के लिए 7 हजार 369 करोड़ रुपये दिए गए हैं. लाखों की संख्या में बेघर लोग इससे सीधे फायदा लेंगे. जिसे घर मिलेगा उससे चुनाव में कुछ कहने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. घर के लिए भेजा जाने वाला पैसा गेम चेंजर स्कीम मानी जा सकती है.

6. कुछ चिंताजनक फैसले भी
इस बजट को देखकर अर्थशास्त्रियों के माथे पर चिन्ता की लकीरें भी उभर आई हैं. चिन्ता इस बात की है कि राज्य पर कर्ज कितना ज्यादा होता जा रहा है. लखनऊ विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अशोक कुमार कैथल ने बताया कि राज्य की जीडीपी का 28.1 फीसदी कर्जा है. ये गंभीर मामला है. घोषणाओं को पूरा करने के लिए जरूरी है कि आपके पास पैसे की कमी न हो. इतने कर्जे में योजनाओं के लिए पैसे का इंतजाम आसान काम नहीं है. सरकार की इस बात के लिए वाहवाही हो रही है कि उसका घाटा केन्द्र सरकार के मुकाबले आधा रहा है. लगभग 4 फीसदी के आसपास. लॉकडाउन में यूपी में टैक्स से काफी अच्छा पैसा आया है. अब खुसुर- फुसुर इस बात की हो रही है कि पैसे अच्छा आ रहा है तो बजट की साइज में महज 7 फीसदी की ही बढ़ोतरी क्यों की गई और ज्यादा का बजट सरकार ने क्यों नहीं पेश किया. अमूमन हर साल 10 फीसदी की ग्रोथ होती रही है. इस बार ये 7 फीसदी से थोड़ी ज्यादा रही है. बता दें कि पिछले वित्तीय वर्ष में योगी सरकार ने 5 लाख 12 हजार करोड़ रूपये का बजट पेश किया था जबकि इस साल 7 फीसदी बढ़ते के साथ 5 लाख 50 हजार करोड़ का ही बजट पेश किया है.
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