UP उपचुनाव: बीजेपी, सपा व बसपा का होमवर्क तेज, कांग्रेस को संजीवनी की तलाश

Mukesh Kumar | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 27, 2019, 8:09 AM IST
UP उपचुनाव: बीजेपी, सपा व बसपा का होमवर्क तेज, कांग्रेस को संजीवनी की तलाश
उपचुनाव को लेकर बीजेपी, सपा व बसपा ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं.

उत्तर प्रदेश की 13 विधानसभा सीटों में से सिर्फ हमीरपुर सीट पर उपचुनाव की तारीख घोषित हुई है, लेकिन सियासी हलचल बढ़ गई है.

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यूपी में विधानसभा उपचुनाव (UP Assembly Bypolls) की रणभेरी बजने से पहले सियासी रण में उतरने के लिए होमवर्क तेजी से पूरा किया जा रहा है. बीजेपी (BJP) पहले ही मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए सियासी समीकरण का फॉर्मूला पेश कर चुकी है. मुख्य विपक्षी पार्टी सपा (Samajwadi Party) और बसपा (BSP) भी अपनी रणनीति तैयार कर रही है. वहीं, कांग्रेसी (Congress) खेमा लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद संजीवनी की तलाश में है.

उत्तर प्रदेश की 13 विधानसभा सीटों में से सिर्फ हमीरपुर सीट पर उपचुनाव की तारीख घोषित हुई है, लेकिन सियासी हलचल बढ़ गई है. अगले कुछ दिनों में किसी भी समय अन्य 12 सीटों पर भी तारीखों का ऐलान हो सकता है. लिहाजा, पार्टियां यूपी की सियासी बिसात पर अपनी चाल सेट करने में जुट गई हैं.

समाजवादी पार्टी के पास रामपुर सीट बचाने की चुनौती

समाजवादी पार्टी ने फिलहाल सभी इकाइयों को भंग कर दिया है और संगठन की मजबूती के लिए नए सिरे से तैयारी चल रही है. सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सोमवार को पूर्व मंत्री घूरा राम समेत कई नेताओं को सपा ज्वॉइन कराई. चर्चा है कि सपा सरकार में मंत्री रहे अम्बिका चौधरी भी जल्द घर वापसी कर सकते हैं. समाजवादी पार्टी के पास रामपुर सीट बचाने की चुनौती है, जबकि कुछ ऐसी सीटों पर भी नजर हैं जहां मुस्लिम-ओबीसी समीकरण खासा प्रभाव रखते हैं. जिन 13 सीटों पर उपचुनाव होने हैं, उनमें से एकमात्र रामपुर सीट सपा के खाते वाली है. इसपर घेरेबंदी के लिए बीजेपी पहले ही चौतरफा जाल बिछा चुकी है.

बसपा ने भी बनाई अलग रणनीति

बसपा भी लोकसभा चुनाव परिणाम और सपा से दामन छुड़ाने के बाद अलग रणनीति पर काम कर रही है. कुछ दिन पहले ही संगठन में मुस्लिम, ओबीसी और ब्राह्मण कॉम्बिनेशन के जरिए सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला सेट करने की कोशिश की गई है. 28 अगस्त को लखनऊ में जोनल कॉर्डिनेटर्स (क्षेत्रीय संयोजक) के साथ बड़ी बैठक भी बुलाई गई है, जिसमें संभावित उम्मीदवारों के नाम पर मुहर लग सकती है.

बसपा के पास भी समाजवादी पार्टी की तरह सिर्फ एक ऐसी सीट है जो लोकसभा चुनाव के बाद खाली हुई है. अम्बेडकर नगर की जलालपुर सीट बचाना बसपा के लिए बड़ी चुनौती होगी. रितेश पाण्डेय के सांसद चुने जाने के बाद यह सीट खाली हुई है और लोकसभा चुनाव के दौरान इस क्षेत्र से बसपा को बड़ी संख्या में वोट मिले थे. फिरोजाबाद की टूंडला, मऊ जिले की घोसी, सहारनपुर की गंगोह, बहराइच की बलहा जैसी सीटों पर बसपा की नजर है. लिहाजा, जिताऊ उम्मीदवारों पर बसपा की नजर है. सूत्र बताते हैं कि बसपा साल 2007 की तर्ज पर करीबियों को उम्मीदवार बनाने के लिए होमवर्क पूरा कर चुकी है.
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कांग्रेस की हालत बेहद खस्ता

सपा-बसपा की तैयारी के बीच कांग्रेस की हालत बेहद खस्ता नजर आ रही है. संगठन के तौर पर यूपी में कांग्रेस बेहद कमजोर हो चुकी है. प्रियंका गांधी वाड्रा के ताबड़तोड़ दौरे भी जोश भरने में नाकाम रहे हैं. हालांकि, प्रियंका गांधी के ताजा दौरे से कार्यकर्ताओं को फिर से उम्मीद है कि कांग्रेस को नई ऊर्जा मिलेगी.

अनुप्रिया पटेल को नुकसान

ताजा राजनीतिक घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा नुकसान अनुप्रिया पटेल की पार्टी अपना दल (एस) को होता नजर आ रहा है. बीजेपी पहले ही मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान अपना दल कोटे को तवज्जो न देकर अपनी मंशा साफ कर चुकी है. प्रतापगढ़ से अपना दल कोटे के विधायक संगम लाल गुप्ता बीजेपी के टिकट पर सांसद बन चुके हैं. सूत्र बताते हैं कि इस सीट पर होने वाले उपचुनाव में बीजेपी अपना दल (एस) को बड़ा झटका देने की तैयारी कर चुकी है. इस सीट पर बीजेपी अपने ही प्रत्याशी को चुनाव लड़ाने का प्लान तैयार कर चुकी है.

राजभर को भी नए सहयोगी की तलाश

अपना दल (एस) अकेली पार्टी नहीं है, जिसके लिए उपचुनाव टेढ़ी खीर बनने वाला है. योगी कैबिनेट में सहयोगी रहे कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के लिए भी अब अपना वजूद बचाने की चुनौती है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से हाथ मिलाकर राजभर अपनी सियासी वैतरणी को पार करना चाहते हैं.

बीजेपी ने बनाई बढ़त

राजनीतिक दलों के होमवर्क के बीच सत्ताधारी बीजेपी का पलड़ा पहले से भारी है. विधानसभा उपचुनाव से पहले भाजपा ने भी फुलप्रूफ प्लान तैयार कर लिया है. योगी मंत्रिमंडल-2 में जातीय समीकरण से लेकर संगठन के पदाधिकारियों को तरजीह देकर सियासी बिसात बिछा दी गई है. हालांकि, जिन 13 सीटों पर उपचुनाव होना है, उनमें से दस सीटें भाजपा के खाते वाली हैं. लिहाजा, उन्हें बचाना किसी चुनौती से कम नहीं है.

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First published: August 27, 2019, 7:44 AM IST
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