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Uttar Pradesh Elections Result 2019: कांग्रेस साथ होती तो भी यूपी की ये 54 सीटें नहीं जीत पाता महागठबंधन

News18Hindi
Updated: May 24, 2019, 10:05 AM IST
Uttar Pradesh Elections Result 2019: कांग्रेस साथ होती तो भी यूपी की ये 54 सीटें नहीं जीत पाता महागठबंधन
बसपा सुप्रीमो मायावती की सपा प्रमुख अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव के साथ फाइल फोटो

भले ही यूपी में बीजेपी गठबंधन की सीटें 72 से घटकर 63 रह गई हो, लेकिन 54 सीटें अब भी ऐसी हैं जहां अगर कांग्रेस साथ भी होती तो बीजेपी कैंडिडेट ही जीत दर्ज करते.

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लोकसभा चुनाव 2019 में निचली सदन के कुल 542 में से 527 सीटों पर नतीजे आ चुके हैं. खबर लिखे जाने तक इनमें से 298 सीटें बीजेपी जीत चुकी है, जबकि 5 सीटों पर वह अभी आगे चल रही है. कांग्रेस के हिस्से सिर्फ 52 सीटें आई हैं. यूपी की बात करें तो यहां कुल 80 में से 79 सीटों पर नतीजे घोषित हो चुके हैं. इनमें से 62 सीटों पर बीजेपी जीत चुकी है. उधर अखिलेश यादव की सपा सिर्फ 5 सीटें जीत सकी है, जबकि मायावती की बसपा 9 सीट जीत चुकी है और 1 सीट पर आगे चल रही है. दूसरी तरफ कांग्रेस ने अपना गढ़ अमेठी गंवा दिया है और सिर्फ एक सीट रायबरेली ही उसके हिस्से में आई है. फ़िलहाल एनडीए के हिस्से 353, यूपी के हिस्से 92 जबकि अन्य दलों के हिस्से 97 सीटें आती नज़र आ रही हैं.

54 सीटों पर बीजेपी की एकतरफा जीत
बीजेपी का सामना करने के लिए यूपी में चिर प्रतिद्वंदी रहीं पार्टियां सपा और बसपा साथ आए और महागठबंधन बना था. आखिरी वक़्त पर कांग्रेस इस महागठबंधन से दूर हो गई थी और ऐसा माना जा रहा था कि इसका फायदा बीजेपी को होगा.

हालांकि लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजों पर नज़र डाली जाए तो ऐसा कुछ नज़र नहीं आता. भले ही यूपी में बीजेपी गठबंधन की सीटें 72 से घटकर 63 रह गई हो लेकिन 54 सीटें अब भी ऐसी हैं जहां अगर कांग्रेस साथ भी होती तो बीजेपी कैंडिडेट ही जीत दर्ज करते. सिर्फ आठ सीटें ऐसी हैं जहां कांग्रेस के साथ होने से सपा-बसपा गठबंधन जीत दर्ज कर सकता था.

कौन सी हैं 8 सीटें?
इन सीटों में सपा की 3 सीटें हैं, जहां कांग्रेस उनकी हार की वजह रही. धर्मेंद्र यादव की बदायूं, श्याम चरण गुप्ता की बांदा, राम सागर रावत की बाराबंकी सीट पर कांग्रेस ने तीसरी बड़ी पार्टी के रूप में वोट हासिल किए. बसपा के लिए कांग्रेस ने 5 सीटों का नुकसान किया. इन सीटों में राम प्रसाद चौधरी-बस्ती, अरशद इलियास सिद्दीकी- धौरहरा, हाजी मोहम्मद याकूब- मेरठ, भीष्म शंकर-संत कबीर नगर और चंद्र भद्र सिंह-सुल्तानपुर शामिल हैं.

उदाहरण के तौर पर धर्मेंद्र यादव की बदायूं सीट से समझे तो यहां धर्मेंद्र को 492898 वोट हासिल हुए जबकि बीजेपी की विजयी कैंडिडेट संघमित्रा मौर्या को 511352 वोट हासिल हुए. प्रतिशत में समझें तो धर्मेंद्र को 45.59% जबकि संघमित्रा को 47.3% वोट हासिल हुए. यहां से कांग्रेस के कैंडिडेट सलीम इकबाल शेरवानी ने 51947 यानी करीब 4.8% वोट हासिल किए. ये वोट सीधे तौर पर बीजेपी विरोधी खेमे के थे और गठबंधन होने पर सपा-बसपा महागठबंधन के हिस्से आ सकते थे. बाकी आठ सीटों पर भी महागठबंधन और बीजेपी के बीच हार के अंतर से ज्यादा वोट कांग्रेस प्रत्याशी ने हासिल किए.भी पढ़ें -
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First published: May 24, 2019, 9:19 AM IST
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