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वरुण गांधी: नेहरु-गांधी परिवार का युवा तुर्क है बीजेपी का झंडाबरदार

वरुण गांधी: नेहरु-गांधी परिवार का युवा तुर्क है बीजेपी का झंडाबरदार

वरुण गांधी (फाइल फोटो)

वरुण गांधी (फाइल फोटो)

राजनीति में वरुण गांधी की पहली एंट्री 1999 में तब हुई जब उनकी मां मेनका गांधी पीलीभीत से लोकसभा का चुनाव लड़ रही थीं.

सुलतानपुर से बीजेपी सांसद वरुण गांधी नेहरु-गांधी परिवार के सदस्य हैं, लेकिन वह कांग्रेस नहीं बीजेपी के झंडाबरदार हैं. खबर है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में उनकी मां मेनका गांधी उन्हें अपनी सीट पीलीभीत से चुनाव लड़वाना चाहती हैं. मेनका खुद करनाल सीट से चुनाव मैदान में उतरना चाहती है.

इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी और मेनका गांधी के एकलौते पुत्र हैं वरुण गांधी. वरुण गांधी का जन्म 13 मार्च 1980 को हुआ. उनके जन्म के तीन महीने बाद ही जून 1980 में एक प्लेन हादसे में पिता संजय गांधी की मौत हो गई. वरुण गांधी ने प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली में ग्रहण की. इसके बाद उन्होंने लंदन यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की.

राजनीति में वरुण गांधी की पहली एंट्री 1999 में तब हुई जब उनकी मां मेनका गांधी पीलीभीत से लोकसभा का चुनाव लड़ रही थीं. वरुण ने अपनी मां की चुनाव प्रचार की कमान संभाली. उस वक्त मेनका गांधी एनडीए की घटक थीं. 2004 के लोकसभा चुनाव में वरुण गांधी और मेनका गांधी ने बीजेपी का दामन थाम लिया. 2004 के लोकसभा चुनाव में वरुण ने बीजेपी के लिए 40 लोकसभा सीटों पर प्रचार किया.

2009 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें पीलीभीत लोकसभा सीट से पहली बार मैदान में उतारा. पहले ही चुनाव में वरुण गांधी को 419,539 वोट हासिल हुए और उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस प्रत्याशी वीएम सिंह को 281,501 मतों के अंतर से हराया. वरुण की यह जीत गांधी परिवार के अन्य सदस्य सोनिया गांधी और राहुल गांधी से भी बड़ी थी. हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान भड़काऊ भाषण देने के आरोप में उनपर केस भी दर्ज हुआ. 5 मार्च 2013 को पीलीभीत की एक कोर्ट ने उन्हें इस मामले में बाइज्जत बरी कर दिया.

मार्च 2013 में राजनाथ सिंह ने वरुण गांधी को राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया. वह पार्टी के सबसे युवा राष्ट्रीय महासचिव बने. उन्हें बंगाल बीजेपी का प्रभारी भी बनाया गया. वरुण गांधी ऐसे सांसद हैं जो एमपीलैड फण्ड का पूरा पैसा खर्च करते हैं. वे अपने एमपीलैड का पैसा शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में खर्च करते हैं.

अपने चचेरे भाई राहुल गांधी और चाची सोनिया गांधी के खिलाफ उन्होंने कभी चुनाव प्रचार नहीं किया. हालांकि एक बार जब राहुल गांधी ने मनमोहन सरकार द्वारा दागी विधायकों और सांसदों के खिलाफ अध्यादेश लाने का विरोध किया तो वरुण ने कहा था कि यह एक प्रधानमंत्री का अपमान है और उन्हें देश वापसी के बाद अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.

2014 में पार्टी ने उन्होंने सुलतानपुर लोकसभा सीट से मैदान में उतारा. उन्होंने इस बार कांग्रेस की अमिता सिंह को बड़े अंतर से हराया.

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Tags: BJP, Lok Sabha Election 2019, Lucknow news, Maneka gandhi, Varun Gandhi

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