विजिलेंस ने बसपा सरकार में हुए स्मारक घोटाले में दाखिल की चार्जशीट, इन 6 लोगों को बनाया आरोपी

उत्तर प्रदेश में मायावती सरकार के दौरान हुए यह स्मारक घोटाला हुआ था. (File Photo)
उत्तर प्रदेश में मायावती सरकार के दौरान हुए यह स्मारक घोटाला हुआ था. (File Photo)

विजिलेंस ने यह चार्जशीट एमपी एमएलए कोर्ट में दाखिल की है. बसपा सरकार के दौरान स्मारकों के निर्माण में हुई वित्तीय अनियमितताओं की जांच लोकायुक्त ने की थी, बाद में सपा सरकार ने इस मामले की जांच विजिलेंस को सौंपी थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 18, 2020, 9:52 PM IST
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लखनऊ. मायावती सरकार (Mayawati Government) के दौरान हुए चर्चित स्मारक घोटाले (Memorial Scam) में 6 आरोपियों के खिलाफ विजिलेंस ने एमपी एमएलए कोर्ट में चार्जशीट (Charge sheet) दाखिल की. विजिलेंस ने भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के तत्कालीन संयुक्त निदेशक सुहैल अहमद फारुखी, यूपी राजकीय निर्माण निगम के तत्कालीन इकाई प्रभारी अजय कुमार, एसके त्यागी, होशियार सिंह तरकर, कंसोर्टियम प्रमुख पन्नालाल यादव, अशोक सिंह के खिलाफ सरकारी सेवा में रहते हुए अमानत में खयानत, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण की धाराओं में आरोपी ठहराते हुए चार्जशीट दाखिल की है.

विजिलेंस ने यह चार्जशीट शनिवार को एमपी एमएलए कोर्ट में दाखिल की है. बसपा सरकार के दौरान स्मारकों के निर्माण में हुई वित्तीय अनियमितताओं की लोकायुक्त संगठन से जांच हुई थी, जिसके बाद तत्कालीन सपा सरकार में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मामले की जांच विजिलेंस को सौंपी थी. विजिलेंस ने पूर्व कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी, बाबू सिंह कुशवाहा, उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम, पीडब्ल्यूडी, खनन विभाग, कंसोर्टियम प्रमुखों, पट्टा धारकों, ठेकेदारों समेत 199 लोगों को आरोपी बनाते हुए जनवरी 2014 में लखनऊ के गोमतीनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी. विजिलेंस के अलावा ईडी भी इस मामले की जांच कर रही है.

14 अरब, 10 करोड़, 83 लाख, 43 हजार के घोटाले का आरोप



गौरतलब है कि मायावती ने 2007 से 2012 तक के अपने कार्यकाल में लखनऊ-नोएडा में अम्बेडकर स्मारक परिवर्तन स्थल, मान्यवर कांशीराम स्मारक स्थल, गौतमबुद्ध उपवन, ईको पार्क, नोएडा का अम्बेडकर पार्क, रमाबाई अम्बेडकर मैदान और स्मृति उपवन समेत पत्थरों के कई स्मारक तैयार कराए थे. इन स्मारकों पर सरकारी खजाने से 41 अरब 48 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. आरोप लगा था कि इन स्मारकों के निर्माण में बड़े पैमाने पर घपला कर सरकारी रकम का दुरुपयोग किया गया है. सत्ता परिवर्तन के बाद इस मामले की जांच यूपी के तत्कालीन लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा को सौंपी गई थी. लोकायुक्त ने 20 मई 2013 को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में 14 अरब, 10 करोड़, 83 लाख, 43 हजार का घोटाला होने की बात कही थी.
लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट में कुल 199 लोग आरोपी

लोकायुक्त की रिपोर्ट में कहा गया था कि सबसे बड़ा घोटाला पत्थर ढोने और उन्हें तराशने के काम में हुआ है. जांच में कई ट्रकों के नंबर दो पहिया वाहनों के निकले थे. इसके अलावा फर्जी कंपनियों के नाम पर भी करोड़ों रुपये डकारे गए. लोकायुक्त ने डिटेल्स जांच सीबीआई या एसआईटी से कराए जाने की सिफारिश की थी. लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट में कुल 199 लोगों को आरोपी माना गया था. इनमे मायावती सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी और बाबू सिंह कुशवाहा के साथ ही कई विधायक और तमाम विभागों के बड़े अफसर शामिल थे.

अखिलेश सरकार ने विजिलेंस को सौंपी थी जांच

तब की अखिलेश सरकार ने लोकायुक्त द्वारा इस मामले में सीबीआई या एसआईटी जांच कराए जाने की सिफारिश को नजरअंदाज करते हुए जांच सूबे के विजिलेंस डिपार्टमेंट को सौंप दी थी. विजिलेंस ने एक जनवरी साल 2014 को गोमती नगर थाने में नसीमुद्दीन सिद्दीकी और बाबू सिंह कुशवाहा समेत 119 नामजद व अन्य अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर अपनी जांच शुरू की. क्राइम नंबर 1/2014 पर दर्ज हुई एफआईआर में आईपीसी की धारा 120 B और 409 के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की गई थी.
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