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Weather Alert: UP के इन जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना, उमस से मिलेगी राहत

UP के इन जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना (सांकेतिक फोटो)

UP के इन जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना (सांकेतिक फोटो)

प्रदेश के ज्यादातर शहरों में दिन का अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास ही दर्ज किया जा रहा है. पूर्वांचल और तराई के जिलों में तो फिर भी थोड़ी बहुत बारिश (Rainfall) हुई है.

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लखनऊ. पिछले लगभग 24 घंटे से जारी उमस से लोगों को राहत मिलने जा रही है. मौसम विभाग (Weather Department) के ताजा अनुमान के मुताबिक पूर्वांचल से लेकर तराई और बुंदेलखंड तक के जिलों में रविवार शाम तक बारिश (Rainfall) की संभावना जताई गई है. इन जिलों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा के तेज झोंके की भी संभावना है. जिन जिलों में हवा के तेज झोकों के साथ बारिश की संभावना जताई गई है वे जिले हैं - बलिया, देवरिया, मऊ, आजमगढ़, कुशीनगर, गाजीपुर, जौनपुर, चंदौली, बनारस, प्रयागराज, मिर्जापुर, सोनभद्र, गोरखपुर, अयोध्या, बस्ती, अंबेडकर नगर, गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बाराबंकी, अमेठी, लखनऊ, उन्नाव, कानपुर नगर, कानपुर देहात, हमीरपुर, बांदा, हरदोई, कन्नौज, रायबरेली, फतेहपुर, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, प्रयागराज, कौशांबी और भदोही.

बता दें कि पिछले हफ्ते बारिश की रफ्तार प्रदेश में सुस्त ही दिखाई दी. तापमान में ज्यादा बढ़ोतरी तो नहीं हुई लेकिन बीच-बीच में तेज उमस का सामना करना पड़ा है. समय-समय पर बदली हवाओं के कारण लोगों को राहत मिली है. लेकिन पूर्वांचल के कुछ जिलों को छोड़कर प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में पिछले हफ्ते अच्छी बारिश दर्ज नहीं की गई है. प्रदेश के ज्यादातर शहरों में दिन का अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास ही दर्ज किया जा रहा है. पूर्वांचल और तराई के जिलों में तो फिर भी थोड़ी बहुत बारिश हुई है, लेकिन पश्चिम के जिलों में इसकी बहुत कमी महसूस की गई है.

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मौसम विभाग के अभी तक के अनुमान के मुताबिक 1 जुलाई से प्रदेश के बड़े इलाके में ज्यादा बारिश की संभावना है. प्रदेश के ज्यादातर जिलों में धान की नर्सरी तैयार है. ऐसे में अच्छी बारिश होने पर धान की बुवाई के दौरान किसानों को सहूलियत हो सकती है. हालांकि तराई के इलाके में ज्यादा बारिश से बाढ़ का संकट भी और व्यापक हो सकता है. उत्तराखंड और नेपाल से प्रदेश में आने वाली नदियों में पहले से ही जलस्तर बढ़ा हुआ है. ऐसे में उत्तराखंड और तराई के इलाकों में और ज्यादा बारिश होती है तो प्रदेश के 20 से 25 जिलों में बाढ़ का संकट और बड़ा हो सकता है.

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