जानें कौन है मुख्तार अंसारी? माफिया नेता या रॉबिनहुड!

40 से ज्यादा मुकदमे सिर पर लिए ये नेता 14 साल से जेल में बंद है. लेकिन पूर्वांचल की राजनति में इसका सिक्का लगातार कायम है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 3, 2019, 5:37 PM IST
जानें कौन है मुख्तार अंसारी? माफिया नेता या रॉबिनहुड!
जानिए कौन है मुख्तार अंसारी (फाइल फोटो)
News18 Uttar Pradesh
Updated: July 3, 2019, 5:37 PM IST
यूपी की सियासत ने देश को एक से बढ़कर एक दिग्गज नेता दिए हैं. प्रदेश की इस सियासी जमीन का सबसे उपजाऊ गढ़ पूर्वांचल माना जाता है. लेकिन इसी पूर्वांचल का एक स्याह सच भी है, वह है अपराध और राजनीति का गठजोड़. इसी गठजोड़ की बदौलत पूर्वांचल के कई माफियाओं ने विधानसभा से लेकर संसद तक का सफर तय किया. अपराध की दुनिया से राजनीति में कदम रखने वालों की फेहरिस्त में एक अहम नाम है मुख्तार अंसारी. अपनों के बीच 'रॉबिनहुड' कहे जाने वाले मुख्तार अंसारी की जिंदगी किसी पर्दे पर चलती फिल्म सी है.

40 से ज्यादा मुकदमे सिर पर लिए ये नेता 14 साल से जेल में बंद है. लेकिन पूर्वांचल की राजनति में इसका सिक्का लगातार कायम है. चाहे भाई अफजाल की सियासी पारी हो या बेटे का सियासत में पहला कदम, दोनों को जो भी जीत मिली, उसमें मुख्तार का ही योगदान माना जाता है. आज मुख्तार अंसारी चर्चा में इसलिए है, क्योंकि उन्हें कोर्ट ने 2005 में बीजेपी के कद्दावर विधायक कृष्णानंद राय की हत्याकांड मामले में बरी कर दिया है. मुख्तार अंसारी पर आरोप था कि उसने 2005 में जेल में रहते हुए कृष्णानंद राय की हत्या की साजिश रची थी.

कौन है मुख्तार अंसारी
मुख्तार अंसारी का जन्म यूपी के गाजीपुर जिले में ही हुआ था. राजनीति मुख्तार अंसारी को विरासत में मिली. उनके दादा मुख्तार अहमद अंसारी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे. जबकि उनके पिता एक कम्युनिस्ट नेता थे. कॉलेज में ही पढ़ाई लिखाई में ठीक मुख्तार ने अपने लिए अलग राह चुनी.

90 के दशक में शुरू किया गैंग
1970 का वो दौर जब पूर्वांचल के विकास के लिए सरकार ने योजनाएं शुरू की. 90 का दशक आते-आते मुख्तार ने जमीन कब्जाने के लिए अपना गैंग शुरू कर लिया. उनके सामने सबसे बड़े दुश्मन की तरह खड़े थे बृजेश सिंह. यहीं से मुख्तार और बृजेश के बीच गैंगवार शुरू हुई.

14 सालों से जेल में है मुख्तार अंसारी

Loading...

अपराध की दुनिया में पहला कदम
1988 में पहली बार हत्या के एक मामले में मुख्तार का नाम आया था. हालांकि उनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत पुलिस नहीं जुटा पाई. लेकिन इस बात को लेकर वह चर्चाओं में आ गया. 1990 का दशक में मुख्तार अंसारी जमीनी कारोबार और ठेकों की वजह से अपराध की दुनिया में कदम रख चुका था. पूर्वांचल के मऊ, गाजीपुर, वाराणसी और जौनपुर में उनके नाम का सिक्का चलने लगा था.

राजनीति में पहला कदम
1995 में मुख्तार अंसारी ने राजनीति की मुख्यधारा में कदम रखा. 1996 में मुख्तार अंसारी पहली बार विधान सभा के लिए चुने गए. उसके बाद से ही उन्होंने ब्रजेश सिंह की सत्ता को हिलाना शुरू कर दिया. 2002 आते-आते इन दोनों के गैंग ही पूर्वांचल के सबसे बड़े गिरोह बन गए. इसी दौरान मुख्तार अंसारी के काफिले पर हमला हुआ. दोनों तरफ से गोलीबारी हुई इस हमले में मुख्तार के तीन लोग मारे गए. खबर आई कि ब्रजेश सिंह इस हमले में घायल हो गया. उसके मारे जाने की अफवाह भी उड़ी. इसके बाद बाहुबली मुख्तार अंसारी पूर्वांचल में अकेले गैंग लीडर बनकर उभरे.

मुख्तार का दावा कृष्णानंद राय ने उसके मर्डर का बनाया था प्लान
इस गैंगवार में ब्रजेश सिंह जिंदा पाए गए और फिर से दोनों के बीच संघर्ष शुरू हो गया. अंसारी के राजनीतिक प्रभाव का मुकाबला करने के लिए ब्रजेश सिंह ने भाजपा नेता कृष्णानंद राय के चुनाव अभियान का समर्थन किया. राय ने 2002 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मोहम्मदाबाद से मुख्तार अंसारी के भाई और पांच बार के विधायक अफजल अंसारी को हराया था. बाद में मुख्तार अंसारी ने दावा किया कि कृष्णानंद राय ने ब्रजेश सिंह के गिरोह को सरकारी ठेके दिलाने के लिए अपने राजनीतिक कार्यालय का इस्तेमाल किया और उन्हें खत्म करने की योजना बनाई.

2005 में हुई थी कृष्णानंद राय की हत्या


पिछले 14 सालों से जेल में ही है बंद
पिछले 14 सालों से जेल में ही बंद है. मर्डर, किडनैपिंग और एक्सटॉर्शन जैसी दर्जनों संगीन वारदातों के आरोप में मुख्तार अंसारी के खिलाफ 40 से ज़्यादा मुकदमें दर्ज हैं. फिर भी दबंगई इतनी है कि जेल में रहते हुए भी न सिर्फ चुनाव जीतते हैं बल्कि अपने गैंग को भी चलाते हैं. 2005 में मुख्तार अंसारी पर मऊ में हिंसा भड़काने के आरोप लगे. साथ ही जेल में रहते हुए बीजेपी नेता कृष्णानंद राय की 7 साथियों समेत हत्या का इल्ज़ाम भी अंसारी के माथे पर लगा.

मुख्तार अंसारी का रॉबिनहुड अवतार
ठेकेदारी, खनन, स्क्रैप, शराब, रेलवे ठेकेदारी में अंसारी का कब्ज़ा है. जिसके दम पर उसने अपनी सल्तनत खड़ी की. मुख्तार के समर्थकों का दावा है कि ये रॉबिनहुड अगर अमीरों से लूटता है, तो गरीबों में बांटता भी है. ऐसा मऊ के लोग कहते हैं कि सिर्फ दबंगई ही नहीं बल्कि बतौर विधायक मुख्तार अंसारी ने अपने इलाके में काफी काम किया है. सड़कों, पुलों, अस्पतालों और स्कूल-कॉलेजों पर ये रॉबिनहुड अपनी विधायक निधि से 20 गुना ज़्यादा पैसा खर्च करता है.

जेल से ही जीतते रहे चुनाव


दादा स्वतंत्रता सेनानी तो चाचा रह चुके हैं उपराष्ट्रपति
बाहुबली मुख्तार अंसारी के दादा डॉ मुख्तार अहमद अंसारी स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के दौरान 1926-27 में इंडियन नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और वे गांधी जी के बेहद करीबी माने जाते थे. उनकी याद में दिल्ली की एक रोड का नाम उनके नाम पर है. इतना ही नहीं भारत के पिछले उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी भी मुख्तार के रिश्ते में चाचा लगते हैं.

ये भी पढ़ें:

कृष्‍णानंद राय हत्‍या मामले में मुख्‍तार अंसारी कोर्ट से बरी

ब्रजेश-मुख़्तार के गैंगवार में हुई थी कृष्णानंद राय की हत्या

 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए गाजीपुर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: July 3, 2019, 5:16 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...