• Home
  • »
  • News
  • »
  • uttar-pradesh
  • »
  • आखिर चंद्रशेखर आजाद से क्यों दूरी बना रही हैं बसपा सुप्रीमो मायावती?

आखिर चंद्रशेखर आजाद से क्यों दूरी बना रही हैं बसपा सुप्रीमो मायावती?

file photo

file photo

मायावती कभी भीम आर्मी को बीजेपी से जुड़ा संगठन करार देती हैं और इसे अपने खिलाफ राजनीति कहती हैं. तो कभी कहती हैं कि चंद्रशेखर आजाद को अगर काम ही करना है तो भीम आर्मी की बजाए बसपा के झंडे तले आकर करें.

  • Share this:
उत्तर प्रदेश की सियासत इन दिनों तेजी से करवटें बदलती दिख रही है. इसमें सबसे अहम जातिगत राजनीति के बदलते समीकरण हैं. बीजेपी से लेकर सपा, बसपा तमाम पार्टियां 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर अपने ​गोटियां सेट करने में लगी हैं. इस राजनीति में पिछले एक साल से एक अहम नाम ने अपने धमक से सियासी हलकों में कंपन पैदा की है. ये नाम है भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर आजाद का. वैसे तो ये खुद को बसपा का समर्थक बताते हैं लेकिन दूसरी तरफ बसपा सुप्रीमो मायावती चंद्रशेखर से किसी तरह का कोई रिश्ता जोड़ने की इच्छुक नहीं दिखतीं.

मायावती कभी भीम आर्मी को बीजेपी से जुड़ा संगठन करार देती हैं और इसे अपने खिलाफ राजनीति कहती हैं. तो कभी कहती हैं कि चंद्रशेखर आजाद को अगर काम ही करना है तो भीम आर्मी की बजाए बसपा के झंडे तले आकर करें. अब सवाल ये है कि आखिर मायावती क्यों चंद्रशेखर आजाद से दूरी बनाती हैं.

तो इसका उत्तर जानने के लिए आपको पिछले साल मई महीने में जाना होगा. जब शब्बीरपुर गांव में हिंसा और सहारनपुर हिंसा के बाद चंद्रशेखर आजाद ने पूरे पश्चिम उत्तर प्रदेश की राजनीति को हिलाकर रख दिया था.

...जब शब्बीरपुर गांव में भड़की हिंसा
5 मई 2017 को सहारनपुर में बड़गांव इलाके के शब्बीरपुर गांव में महाराणा प्रताप की मूर्ति पर माल्यार्पण करने को लेकर ठाकुर व दलितों के बीच बवाल हो गया. इसके बाद आगजनी के बाद मंदिर में तोड़फोड़, पथराव व फायरिंग की घटनाएं हुईं. इस हिंसा में ठाकुर बिरादरी से एक नवयुवक की मौत हो गई, जबकि देवबंद कोतवाल चमन सिंह चावड़ा समेत कई घायल हो गए. वहां तनाव के हालात पैदा हो गए.

भीम आर्मी का प्रदर्शन और सहारनपुर हिंसा

शब्बीरपुर की घटना इस घटना से आक्रोशित अनुसूचित जाति के युवाओं के संगठन भीम आर्मी ने 9 मई को सहारनपुर के गांधी पार्क में एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया.

इस प्रदर्शन में सहारनपुर ज़िले से क़रीब 1000 प्रदर्शनकारी इकट्ठा हो गए लेकिन प्रशासन की इजाज़त न होने के कारण पुलिस ने इसे रोकने की कोशिश की. प्रदर्शनकारियों में आक्रोश बढ़ा और कई जगहों पर भीड़ और पुलिस में झड़पें हुईं. इस दौरान एक पुलिस चौकी फूंक दी गई, एक बस को जला दिया गया और कई वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया. पुलिस ने इस मामले में भीम आर्मी के समर्थकों और उसके संस्थापक चंद्रशेखर पर मुकदमे दर्ज किए.

इसके बाद भीम आर्मी ने शब्बीरपुर और सहारनपुर की घटना के विरोध में 21 मई को दिल्ली के जंतर मंतर पर एक प्रदर्शन आयोजित किया. इस दौरान चंद्रशेखर के सरेंडर की बात भी सामने आई लेकिन जंतर मंतर पर चंद्रशेखर आए, भाषण दिया और निकल गए. बाद में यूपी पुलिस की कई टीमों ने देश भर में चंद्रशेखर की तलाश तेज कर दी और आखिरकार हिमाचल प्रदेश में चंद्रशेखर को गिरफ्तार कर​ लिया.

उधर चंद्रशेखर की खबरों की चर्चा लखनऊ के सत्ता के गलियारे में जोर पकड़ने लगी. सहारनपुर व आसपास के इलाकों में वह अनुसूचित जाति के तेज तर्रार नेता के रूप में दिखाई देने लगा. उसके राजनीतिक भविष्य को लेकर तमाम कयास लगने लगे.

चर्चाओं में आई भीम आर्मी के बाद मायावती पहुंचीं शब्बीरपुर गांव

इस ​बीच बसपा सुप्रीमो मायावती ने ऐलान किया कि वह शब्बीरपुर गांव पहुंचेंगी. मामले ने सियासी मोड़ ले लिया. 23 मई को मायावती सड़क मार्ग से सहारनपुर पहुंचीं और दलित परिवारों से मुलाक़ात की. मायावती ने घटना पर पार्टी फंड से मुआवजे की घोषणा की. जिन पीड़ितों के घर जले हैं, मायावती ने उन्हें 50 हजार रुपये और घायलों को 25 हजार की सहायता राशि देने की घोषणा की.

मायावती ने भीम आर्मी को बताया बीजेपी का प्रोडक्ट

इसके दो दिन बाद 25 मई को मायावती ने कहा, 'सहारनपुर में बसपा के लोगों का मानना है क‍ि भीम आर्मी पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी का ही प्रोडक्ट है. मुझे कमजोर करने के ल‍िए बीजेपी भीम आर्मी को बढ़ावा दे रही है.' उन्होंने कहा, 'सहारनपुर में चल रहे विवाद की जिम्मेदार योगी सरकार है. मुझे कमजोर करने के ल‍िए बीजेपी सरकार भीम आर्मी को बढ़ावा दे रही है. ये पूरी तरह से बीजेपी की साज‍िश है, जिसमें दलितों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है.''बीजेपी भीम आर्मी को संरक्षण दे रही है, जिससे पूरा यूपी जल रहा है. बीजेपी सांप्रदाय‍िक तनाव काे बढ़ावा देने के लिए तरह-तरह से हथकंडे अपनाने की कोश‍िश कर रही है.'

अब चंद्रशेखर आजाद ने जेल से छूटने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती को अपनी बुआ बताया. इस पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने रविवार को साफ कर दिया कि उनका सिर्फ गरीबों से रिश्ता है. चंद्रशेखर रावण के लिए मायावती ने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए लोग मुझसे रिश्ता दिखा रहे हैं. समाज में ऐसे बहुत से संगठन बनते चले आ रहे हैं जो अपना धंधा चलाते हैं.

'वोट बैंक खिसकने का है डर'

वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह कहते हैं कि बसपा ने जिस मुहिम की शुरुआत की थी, वह कहीं न कहीं जमीनी स्तर पर पीछे छूट चुकी है. भीम आर्मी का प्रमुख चंद्रशेखर आजाद इसी मुहिम का नया नाम है. एक तो वह युवा है दूसरा वह जिस तरह से संघर्ष कर रहा है, उससे कहीं न कहीं उसके समाज के लोग उसे पसंद कर रहे हैं.

आप गौर करें जब चंद्रशेखर आजाद जेल से छूटा तो उसने बेहद समझदारी भरा बयान दिया. उसने कहा कि ​मायावती दलितों के लिए काम कर रही हैं,​ लिहाजा वह उसकी बुआ हैं. और वह बसपा का समर्थन करता है. चंद्रशेखर के इस बयान से बसपा को लाभ हुआ हो या नहीं लेकिन चंद्रशेखर को लाभ जरूर हुआ. उसने पूरे समाज को एक मैसेज दिया कि उनके लिए संघर्ष करने वाला नया नेता वह है.

सुरेश बहादुर सिंह कहते हैं कि दूसरी अहम बात ये है कि मायावती खुद को देश में इकलौती दलित नेता मानती हैं. चंद्रशेखर के जनाधार बढ़ने से कहीं न कहीं उन्हें ये डर लगने लगा है कि एक दलित नेता उनके समानांतर खड़ा हो रहा है. यही कारण है कि वह उसकी भीम आर्मी को बीजेपी का हथकंडा बताती हैं और अपने खिलाफ साजिश कहती हैं. वहीं चंद्रशेखर आजाद को धंधेबाज आदि कहकर अपने वोटरों में संदेश देने की कोशिश कर रही हैं कि नेता वही हैं. लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि चंद्रशेखर का प्रभाव निश्चित रूप से बढ़ रहा है.

ये भी पढ़ें: 

मेरठ की सड़कों पर चाइनीज आतंक, शराब के नशे में कार को मारी टक्कर

सामने आया समाजवादी सेक्युलर मोर्चा का झंडा, शिवपाल के साथ मुलायम की भी तस्वीर

सामने आया समाजवादी सेक्युलर मोर्चा का झंडा, शिवपाल के साथ मुलायम की भी तस्वीर

सीएम योगी के शहर गोरखपुर में धर्म परिवर्तन से मचा हड़कंप, पांच गिरफ्तार

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज