मायावती-अखिलेश के रिश्तों में दरार की वजह शिवपाल यादव तो नहीं?

लोकसभा चुनाव में हार के बाद बहुजन समाज पार्टी के समीक्षा बैठक ने यूपी की राजनीति में कई सुगबुगाहटें पैदा कर दी हैं.

News18Hindi
Updated: June 3, 2019, 9:13 PM IST
मायावती-अखिलेश के रिश्तों में दरार की वजह शिवपाल यादव तो नहीं?
FILE PHOTO
News18Hindi
Updated: June 3, 2019, 9:13 PM IST
लोकसभा चुनाव में हार के बाद बहुजन समाज पार्टी के समीक्षा बैठक ने यूपी की राजनीति में कई सुगबुगाहटें पैदा कर दी हैं. बैठक में हार के कारणों पर समीक्षा की गई. सूत्रों के मुताबिक बैठक में शिवपाल यादव का भी तीन बार नाम लिया. उन्होंने कहा कि शिवपाल ने कई जगहों पर यादव वोट को बीजेपी के लिए ट्रांसफर करा दिया. यूपी में सपा-बसपा और रालोद का गठबंधन टूटने के संकेत मिल रहे हैं. लेकिन इन सब के बीच शिवपाल यादव के नाम की चर्चा बता रही है कि ठीकरा उनके सिर फोड़ा जा सकता है.

बैठक के दौरान जब वोट ट्रांसफर की बात आई तो मायावती ने यादव वोट बैंक पर सवाल उठाए. उनके मुताबिक यादव वोट बैंक पूरी तरह से महागठबंधन की तरफ ट्रांसफर नहीं हुआ. मायावती ने बैठक में जो बातें कहीं वो महागठबंधन के लिए शुभ संकेत नहीं हैं. लेकिन दिलचस्प ये है कि इसमें अखिलेश यादव को कुसूरवार नहीं ठहराया जा रहा है. मायावती का कहना है कि बीएसपी के वोट तो सपा की तरफ ट्रांसफर हुए लेकिन बीएसपी को सपा के वोट नहीं मिले. दरअसल मायावती ने एक तरीके से चुनावी हार का ठीकरा समाजवादी पार्टी के सिर फोड़ने का संकेत दिया है.

लेकिन जैसी भूमिका तैयार हो रही है उसके मुताबिक सारा दोष चाचा शिवपाल के सिर मढ़ा जा सकता है. हालांकि इस चुनाव में खुद शिवपाल यादव को भी फिरोजाबाद से हार का सामना करना पड़ा है. लेकिन बीएसपी मीटिंग से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक पार्टी मानती है कि यादवों का वोटबैंक ट्रांसफर न होने के पीछे शिवपाल बड़ी वजह रहे हैं. सिर्फ इतना ही नहीं शिवपाल ने यह प्रयास किए कि यादव वोट बजाए महागठबंधन के बीजेपी की तरफ ट्रांसफर हो जाएं.

यूपी विधानसभा चुनाव में खूब हुई पारिवारिक जंग



2017 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा के ठीक पहले यादव परिवार में वर्चस्व को लेकर तगड़ी जंग हुई थी. जिसमें एक तरफ अखिलेश यादव और राम गोपाल यादव थे तो दूसरी तरफ शिवपाल और अमर सिंह का खेमा था. पूरी जंग का नतीजा यह निकला की अखिलेश यादव पार्टी में और मजबूती के साथ स्थापित हो गए. वो एक तरीके से समाजवादी पार्टी के सर्वेसर्वा बन गए. जिस पार्टी के लिए खून पसीना एक किया था वहां दाल न गलती देख शिवपाल यादव ने अपनी पार्टी बनाने का फैसला किया. और उत्तर प्रदेश के चुनावी मैदान में अपनी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के बैनर तले प्रत्याशी खड़े हुए. शिवपाल यादव खुद तो कोई बड़े गेम चेंजर नहीं साबित हुए लेकिन यह माना जा रहा है कि यादव वोटों के एकपक्षीय ध्रुवीकरण को उन्होंने अपनी चालों से रोका. इसका नतीजा यह हुआ कि महागठबंध को कई सीटों का नुकसान हुआ.

अब क्या होगा
Loading...

अब जो स्थितियां तैयार हो रही हैं कि उनके मुताबिक अगर बीएसपी अकेले बढ़ने का फैसला लेती है तो संभव है कि अभी तक अखिलेश के दुश्मन रहे शिवपाल बीएसपी के भी दुश्मन बन जाएं. क्योंकि सपा बसपा गठबंधन के दौरान अखिलेश यादव की तरफ से हमेशा विनम्रता ही दर्शाई गई है. अखिलेश ने सपा-बसपा गठबंधन होने पर पूछे गए कठिन सवालों को भी आसानी के साथ झेल लिया. इस वजह से अगर राहें अलग होंगी तो किसी के सिर तो ठीकरा फोड़ना ही है. बीएसपी मीटिंग से छनकर आती बातों से लगता है कि शायद वो व्यक्ति शिवपाल सिंह यादव हो सकते हैं.

ये भी पढ़ें:

यूपी में गठबंधन पर संकट के बादल, 11 सीटों पर अकेले उपचुनाव लड़ेगी BSP!

मायावती की समीक्षा बैठक में शिवपाल यादव का जिक्र, वोट ट्रांसफर को लेकर कही ये बड़ी बात

लखीमपुर खीरी: इंदिरा गांधी की मूर्ति को पहनाया गया बुर्का, भड़के कांग्रेसी
First published: June 3, 2019, 5:06 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...