ANALYSIS: चुनावी मौसम में आखिर 'मुसलमान' के पीछे हाथ धोकर क्यों पड़े हैं देश के नेता?

मेनका गांधी के बयान के बाद यह सवाल इसलिए चर्चा में है क्योंकि लोकसभा चुनाव के दौर में बीजेपी ही नहीं, बल्कि अन्य पार्टियों के नेता भी मुस्लिमों को लेकर कई तरह के बयान दे रहे हैं.

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Updated: April 12, 2019, 7:52 PM IST
ANALYSIS: चुनावी मौसम में आखिर 'मुसलमान' के पीछे हाथ धोकर क्यों पड़े हैं देश के नेता?
फाइल फोटो.
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Updated: April 12, 2019, 7:52 PM IST
लोकसभा चुनाव 2019 में पहले चरण के मतदान के बाद बाकी चरणों के मतदान से पहले देश के कई हिस्सों में राजनीतिक पार्टियों के प्रचार और रैलियों का दौर जारी है. प्रचार अभियानों और रैलियों में लगातार 'मुसलमान' केंद्रीय मुद्दा नज़र आ रहे हैं. ताज़ा खबर के मुताबिक पीलीभीत की जगह इस बार सुल्तानपुर से दावेदारी करने पहुंची बीजेपी सरकार में केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने मुसलमानों के वोट को एक तरह से सौदेबाज़ी करार देकर चुनावी गलियारों में हलचल पैदा कर दी.

मेनका की मुस्लिमों को धमकी, 'वोट नहीं दिया तो नौकरी के लिए मत आना'

मेनका गांधी ने मुस्लिम समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि 'अगर मेरी जीत मुसलमानों के बिना होगी तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा, क्योंकि दिल खट्टा हो जाता है. फिर जब मुसलमान काम करवाने के लिए आते हैं तो सोचती हूं कि रहने दो, क्या फर्क पड़ता है? आखिर नौकरी एक सौदेबाजी ही तो है. हम महात्मा गाधी की छठी औलाद तो हैं नहीं कि हम मुस्लिमों की मदद करते जाएं और मुस्लिम इलेक्शन में हमें मात दें.' मेनका के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

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सिर्फ मेनका ही नहीं बल्कि बीजेपी सहित अन्य पार्टियों के नेता भी मुसलमानों के वोट को केंद्र में रखकर लगातार बयानबाज़ी कर रहे हैं. गुरुवार को अमित शाह ने चुनावी रैली में एनआरसी का मुद्दा उठाते हुए साफ कहा कि 'हिंदुओं, बौद्धों और सिखों को छोड़कर बाकी सारे घुसपैठियों को देश से खदेड़ दिया जाएगा'. भारतीय जनता पार्टी के ट्विटर हैंडल पर इस बयान को सार्वजनिक किया गया तो सोशल मीडिया पर इस बयान के वायरल होते ही आलोचना और समर्थन में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया.



इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक इंटरव्यू में मुसलमानों के मुद्दे पर कहा था कि 'मैं किसी मुसलमान के लिए कुछ नहीं करता बल्कि सभी देशवासियों के लिए काम करता हूं'. इसके साथ ही चुनावी रैलियों में वह नाम लिये बगैर 'टुकड़े टुकड़े गैंग' कहकर पाकिस्तान के साथ ही, मुस्लिम समुदाय के उन राजनीतिकों को निशाने पर ले रहे हैं कश्मीर या पाकिस्तान के मुद्दे पर बीजेपी की विचारधारा से असहमत हैं.

'मैं सिर्फ मुसलमानों के लिए कुछ नहीं करता देशवासियों के लिए करता हूं'

इससे पहले बसपा सुप्रीमो मायावती ने मुसलमानों को वोट बैंक घोषित करते हुए कहा था कि 'अगर बीजेपी को हराना है, तो मुसलमानों को भावनाओं में बहकर वोट को बांटना नहीं है.' मायावती के इस बयान के बाद पीएम ने न्यूज़18 को दिए खास इंटरव्यू में टिप्पणी करते हुए कहा था कि 'मायावती डूबती नाव हैं इसलिए मुसलमानों के वोट का सहारा तलाश रही हैं'.

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मायावती के इस बयान पर बीजेपी के फायरब्रांड नेता कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान ने भी हलचल पैदा कर दी थी, यह कहकर कि 'मायावती अगर मुसलमानों के वोट मांग रही हैं, तो दूसरे समुदाय भी तय करेंगे कि उन्हें किसके साथ जाना है'. इसके अलावा, योगी राहुल के केरल से चुनाव लड़ने के संदर्भ सहित दूसरे प्रसंगों में भी 'मुसलमान' को केंद्र में रखते हुए टिप्पणी कर चुके हैं. 'देश में हरा वायरस फैल रहा है' जैसे उनके ट्वीट भी चुनावी माहौल में चर्चा में रहे हैं.

‘मायावती को मुस्लिम वोट चाहिए तो दूसरे भी तय करेंगे कि कहां जाना है’

कई राजनीतिक पार्टियां और नेता मुसलमानों को लगातार अपनी बयानबाज़ी में शामिल क्यों किए हुए हैं? इसका जवाब यही है कि मुसलमान वोट बैंक हैं, भले ही कोई खुले तौर पर इस बात को माने या नहीं.

यूपी के वोट बैंक: मुसलमान

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इसी बीच, यह भी खबर है कि इस सांप्रदायिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए बिहार की बेगूसराय सीट से राजद ने तनवीर हसन को उम्मीदवार के तौर पर खड़ा कर दिया है. यहां बीजेपी के गिरिराज सिंह और लेफ्ट के कन्हैया के बीच कड़ा मुकाबला था लेकिन अब मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है. यह भी माना जा रहा है कि तनवीर की उम्मीदवारी के बाद बीजेपी को फायदा हो सकता है.

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