सपा-बसपा गठबंधन में क्यों नहीं हो रही कांग्रेस की एंट्री? ये रही वजह

तीन राज्यों में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन के बावजूद जिस तरह से सपा और बसपा उससे दूरी बनाते दिख रहे हैं उसके मद्देनजर गठबंधन में उसकी जगह बनती नहीं दिख रही है.

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: December 19, 2018, 5:18 PM IST
सपा-बसपा गठबंधन में क्यों नहीं हो रही कांग्रेस की एंट्री? ये रही वजह
तीन राज्यों में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन के बावजूद जिस तरह से सपा और बसपा उससे दूरी बनाते दिख रहे हैं उसके मद्देनजर गठबंधन में उसकी जगह बनती नहीं दिख रही है.
Amit Tiwari
Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: December 19, 2018, 5:18 PM IST
लोकसभा चुनाव से पहले यूपी में महागठबंधन की कवायद को झटका लगता दिख रहा है. 2017 के विधानसभा चुनाव में यूपी के जिन लड़कों ने एक साथ चुनाव लड़ा था वे अब अलग-अलग राह पर हैं. सूत्रों के मुताबिक यूपी में सपा और बसपा रालोद के साथ मिलकर बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ेगी.

इस गठबंधन में कांग्रेस के लिए कोई जगह नहीं दिख रही है. हालांकि गठबंधन सोनिया गांधी की संसदीय सीट रायबरेली और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारेगा. कहा यह भी जा रहा है कि सीटों के बंटवारे को लेकर फ़ॉर्मूला भी तैयार है और 15 जनवरी को मायावती के जन्मदिन पर इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी.

आखिर क्यों सपा-बसपा कांग्रेस से बना रहे हैं दूरी?
तीन राज्यों में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन के बावजूद जिस तरह से सपा और बसपा उससे दूरी बनाते दिख रहे हैं उसके मद्देनजर गठबंधन में उसकी जगह बनती नहीं दिख रही है. राजस्थान और मध्य प्रदेश में जिस तरह से सपा और बसपा ने कांग्रेस सरकार की स्थिरता के लिए समर्थन दिया था उससे लगने लगा था कि कांग्रेस की यूपी में भी दावेदारी मजबूत हुई है, लेकिन इसके बाद शपथ ग्रहण समारोह से किनारा कर अखिलेश और मायावती ने यह साफ कर दिया कि राजस्थान और मध्य प्रदेश में समर्थन देने के फैसले को यूपी से जोड़कर न देखा जाए.

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ये है वजह
दरअसल, कांग्रेस से हाथ मिलाने में झिझक के पीछे की वजह स्पष्ट है. सपा और बसपा को लगता है, कांग्रेस को गठबंधन में शामिल करने पर बीजेपी को फायदा हो सकता है, क्योंकि कांग्रेस को शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में जो वोट मिलता है वह अपर कास्ट का है. गठबंधन में कांग्रेस के शामिल होने से यह वोट बैंक न तो कांग्रेस के पक्ष में जाएगा और न ही सपा व बसपा के. इसका फायदा सीधे बीजेपी को मिलेगा और नजदीकी मुकाबले में सीट बीजेपी को मिल जाएगी.
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बसपा और सपा को इस बात का एहसास पिछले गठबंधन से हो चुका है. 1996 में बसपा ने कांग्रेस से गठबंधन कर चुनाव लड़ा था. इसके बाद 2017 में अखिलेश ने कांग्रेस से गठबंधन किया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. इस हार से सबक लेते हुए अखिलेश ने गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में कांग्रेस का समर्थन नहीं लिया. हालांकि, कैराना और नूरपुर के उपचुनाव में कांग्रेस ने कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा.

सपा और बसपा को लगता है कि अगर कांग्रेस अकेले लड़ेगी तो इसका सीधा नुकसान बीजेपी को होगा क्योंकि वह उसी का वोट काटेगी. यह स्थिति गठबंधन के लिए काफी मुफीद होगी. ऐसा इसलिए भी है कि 2012 के चुनाव में कांग्रेस, सपा और बसपा अकेले मैदान में उतरे थे. सपा को 224 सीट मिली. सपा उन सीटों को जीतने में कामयाब रही जहां कांग्रेस को 5 हजार से ज्यादा वोट मिले. 2017 में जब सपा और कांग्रेस साथ मिलकर चुनाव में उतरे तो अपर कास्ट वोटर न कांग्रेस के पाले में गया और न ही सपा के. लिहाजा सपा की सीट घटकर 47 रह गई और कांग्रेस 7 पर सिमट गई.

कांग्रेस की रणनीति क्या होगी?
अगर कांग्रेस अकेले चुनाव मैदान में उतरती है तो उसके लिए 2009 के चुनाव परिणाम उत्साहित करने वाले हैं. 2009 के चुनाव में कांग्रेस ने अकेले दम पर चुनाव लड़ा और उसे 21 सीटें हासिल हुई, लेकिन उसकी इस जीत के कई मायने निकाले गए थे. जैसे मनरेगा, कर्जमाफी और बीजेपी की कमजोर स्थिति को कांग्रेस की जीत की वजह माना गया था. हालांकि 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपने प्रदर्शन को दोहरा नहीं पाई. उधर कांग्रेसी नेताओं की मानें तो अगर सपा-बसपा साथ लड़कर ज्यादा सीटें भी जीतती है तो फायदा उसी का है, क्योंकि बीजेपी को सरकार बनाने से रोकने के लिए वह उसका समर्थन कर सकती है.

हालांकि अभी तक इस गठबंधन में कांग्रेस को शामिल करने को लेकर सपा और बसपा की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन कोई भी दल इस पर सफाई भी नहीं दे रहा है. समाजवादी पार्टी इस मामले में नो कॉमेंट्स का रुख अख्तियार किए हुए है तो वहीं कांग्रेस का कहना है कि सपा और बसपा के किसी नेता ने ऐसा बयान नहीं दिया है, जिससे यह साफ हो कि कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लिहाजा यह पार्टी नेतृत्व का विषय है. यूपी कांग्रेस के प्रवक्ता ओंकारनाथ सिंह का कहना है कि जब तक सपा और बसपा नेताओं का बयान नहीं आता वे इस पर कुछ नहीं बोलेंगे.

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