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क्‍या दिल्‍ली की बंपर जीत अरविंद केजरीवाल को फिर UP खींच लाएगी?

MANISH KUMAR | News18 Uttar Pradesh
Updated: February 11, 2020, 10:36 PM IST
क्‍या दिल्‍ली की बंपर जीत अरविंद केजरीवाल को फिर UP खींच लाएगी?
आप उत्‍तर प्रदेश में 2014 लोकसभा के चुनाव पूरे दमखम से लड़ी थी.

दिल्ली में मिली बंपर जीत से आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) का उत्साहित होना लाज़मी है. इस जीत के बाद एक बार फिर ये बात उठने लगी है कि क्‍या अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) 2014 की तरह उत्‍तर प्रदेश की ओर रुख करेंगे?

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लखनऊ. दिल्ली में मिली जीत से आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) का उत्साहित होना लाज़मी है. जबकि पार्टी को सबसे पहली जीत 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में मिली थी वो भी पार्टी के गठन के महज एक साल के भीतर. अन्ना आंदोलन से जनता का जुड़ाव और इसकी चुनावी राजनीति में मिली सफलता से आम आदमी पार्टी के बुलंद हौसले ने उसे पूरे देश की तरफ आकर्षित किया. 'आप' ने देश के कई राज्यों के साथ-साथ उत्‍तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में भी उस वक्त किस्मत आजमायी लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी. ऐसे में एक बार फिर अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) को दिल्ली में भारी जीत मिली है. ऐसे में सवाल उठ रहा है क्या फिर वे 2014 की तरह यूपी की तरफ रुख करेंगे?

लोकसभा चुनाव 2014 में मोदी को चुनौती
2014 के लोकसभा चुनावों में पार्टी ने अपना पूरा जोर यूपी में मारा. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भाजपा के बड़े नेताओं को घेरने के लिए 'आप' के नेता उनके क्षेत्रों में उतर आये. खुद अरविंद केजरीवाल वाराणसी में नरेन्द्र मोदी के खिलाफ उतरे थे. तब पार्टी में रहे कवि कुमार विश्वास अमेठी में स्मृति ईरानी को, तो सिने स्टार जावेद जाफरी लखनऊ में राजनाथ सिंह को घेरने उतरे. पार्टी ने यूपी की 80 में से 77 सीटों पर अपने उम्मीद्वार उतार दिए. हालांकि नजीता ढाक के तीन पात ही रहा. जीतना तो दूर कोई अपनी जमानत भी नहीं बचा पाया.

लोकसभा चुनाव 2019

इस लोकसभा चुनाव में 'आप' पार्टी के किसी खास चेहरे ने चुनाव मैदान में अपनी दस्तक नहीं दी. अलबत्ता सहारनपुर से योगेश दहिया, अलीगढ़ से सतीश चन्द्र शर्मा और नोएडा से श्वेता शर्मा ने चुनाव लड़ा. ये तीनों बुरी तरह पराजित रहे.

नहीं लड़ा विधानसभा का चुनाव
2014 के लोकसभा चुनावों में मिली करारी हार से आम आदमी पार्टी को लगा होगा कि यूपी और दिल्ली की राजनीति में फर्क है. लिहाजा उसने इसके बाद से कोई भी चुनाव नहीं लड़ा. 2019 का लोकसभा चुनाव कहने के लिए तीन सीटों से लड़ी, लेकिन पार्टी यूपी के विधानसभा चुनावों में उतरने का साहस अभी तक नहीं कर पायी है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और सुल्तानपुर के रहने वाले संजय सिंह ने मेहनत तो बहुत की, लेकिन उम्मीद्वार नहीं उतार पाये. पहले तो पार्टी ने विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया और फिर चुनावों से ऐन पहले अपने फैसले को वापस ले लिया. 

नगर निगम का चुनाव लड़े.
शहर में जनादेश मिलने की उम्मीद में आम आदमी पार्टी ने नगर निकायों के चुनावों में उतरने का मन बनाया. यूपी में हुए नगर निगमों और नगर पंचायतों के चुनाव आम आदमी पार्टी ने लड़े. इसमें मेयर की कोई भी सीट वे जीत तो नहीं पाए, लेकिन पार्षदों के कुछ जगहों पर चुनाव जीत गए.

लोकसभा के बाद सीधे स्थानीय निकाय चुनावों पर लगाया दांव
आम आदमी पार्टी को भी लगा होगा कि सिर्फ हवा बनाकर यूपी में राजनीति नहीं की जा सकती. इसी वजह से पार्टी ने लोकसभा के बाद सीधे स्थानीय निकाय के चुनाव लड़ने का फैसला लिया. विधानसभा चुनाव तो कभी लड़ नहीं पायी. इस तरह 2014 के लोकसभा चुनावों में यूपी में मिली करारी शिकस्त के बाद अभी तक पार्टी यूपी में दमदारी से चुनाव लड़ने की तैयारी ही कर रही है. अब एक बार फिर से उसे दिल्ली में बम्पर जीत मिली है तो संभव है कि फिर से पार्टी यूपी में जोर मारे.

 

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First published: February 11, 2020, 10:08 PM IST
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