छठे और सातवें चरण में बसपा का लिटमस टेस्ट, 2009 की परफॉरमेंस दोहराने की चुनौती

News18 Uttar Pradesh
Updated: May 3, 2019, 11:27 AM IST
छठे और सातवें चरण में बसपा का लिटमस टेस्ट, 2009 की परफॉरमेंस दोहराने की चुनौती
बसपा सुप्रीमो मायावती की फाइल फोटो

38 सीटों पर चुनाव लड़ रही बसपा के 16 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला आखिरी के दो चरणों में होना है.

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समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय लोक दल (रालोद ) के साथ गठबंधन के तहत 38 सीटों पर चुनाव लड़ रही बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का लिटमस टेस्ट यूपी की छठे और सातवें चरण में होगी. यहां छठे चरण में 14 सीटों पर 12 मई को चुनाव होना है. 14 में से 11 सीटों पर बसपा उमीदवार गठबंधन के तहत मैदान में हैं. वहीं आखिरी के सातवें चरण में 19 मई को मतदान होना है. सातवें चरण में बसपा के पांच उम्मीदवार मैदान में हैं. लिहाजा 38 सीटों पर चुनाव लड़ रही बसपा के 16 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला आखिरी के दो चरणों में होना है.

बसपा के लिए आखिरी के दो चरण इसलिए भी काफी अहम हैं क्योंकि 2009 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने इन 16 सीटों में से 9 सीटों पर जीत हासिल की थी. उधर 2014 के मोदी लहर में भी पूर्वांचल की इन 16 सीटों में बसपा के 12 प्रत्याशी दूसरे नंबर पर थे जबकि चार प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहे थे.

नाम न छापने की शर्त पर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इन 16 लोकसभा सीटों पर अभी से ही पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारियों के चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं. उन्होंने कहा कि पूर्वांचल में बसपा का मजबूत जनाधार है. अगर पार्टी ने अपने बेस वोट को बूथ तक ले आती है तो उसकी जीत तय है.

उन्होंने कहा कि 2014 के मोदी लहर में भी इन 16 सीटों पर बसपा उम्मीदवारों ने बीजेपी को कड़ी चुनौती दी थी. 13 उम्मीदवार ऐसे थे जिन्हें 2 लाख से ऊपर वोट प्राप्त हुए थे. उन्होंने कहा कि इन 16 सीटों में से लालगंज, मछलीशहर और बासगांव सुरक्षित सीट है. इन सीटों पर बसपा का प्रदर्शन अच्छा रहा है. उन्होंने कहा कि पूर्वांचल की इन सीटों पर बसपा के चार लाख तक वोट हैं. सपा के साथ गठबंधन से मुस्लिम और यादव वोट भी हमारे साथ जुड़ेगा. अगर गठबंधन सफल रहा तो हम 16 सीटें जीत सकते हैं.

यही वजह है कि अगर मायावती की प्रधानमंत्री बनने के सपने को पूरा करना है तो पूर्वांचल जीत जरूरी है. लिहाजा मायावती खुद छठे और सातवें चरण में यहां 13 जनसभाओं को संबोधित करेंगी. पांचवें चरण का मतदान ख़त्म होते ही सभी कार्यकर्ता और पार्टी पदाधिकारी पूर्वांचल में डेरा डालेंगे. दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद वाराणसी से चुनाव लड़ रहे हैं, लिहाजा पार्टी ने जनता तक पहुंचने की अलग रणनीति बनाई है. घर-घर पहुंचकर प्रचार करने और स्थानीय मुद्दों को उठाकर बीजेपी को घेरने की तैयारी है.

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First published: May 3, 2019, 10:31 AM IST
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