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यूपी चुनाव: ओवैसी ने यूं बिगाड़ा अखिलेश का गेम! 7 सीटों पर बीजेपी की जीत में बनी मददगार, कई पर बढ़ाई धड़कन

यूपी चुनाव: ओवैसी ने यूं बिगाड़ा अखिलेश का गेम! 7 सीटों पर बीजेपी की जीत में बनी मददगार, कई पर बढ़ाई धड़कन

ओवैसी की पार्टी भले ही एक भी सीट न जीत पाई हो, लेकिन उसने कम से कम 7 सीटों पर समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन के उम्मीदवारों को खासा नुकसान पहुंचाया. (फाइल)

ओवैसी की पार्टी भले ही एक भी सीट न जीत पाई हो, लेकिन उसने कम से कम 7 सीटों पर समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन के उम्मीदवारों को खासा नुकसान पहुंचाया. (फाइल)

यूपी विधानसभा चुनाव के नतीजों (UP Election Results 2022) पर करीब से नज़र डालने पर पता चलता है कि असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) भले ही एक भी सीट न जीत पाई हो, लेकिन उसने कम से कम 7 सीटों पर समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन के उम्मीदवारों को खासा नुकसान पहुंचाया. एक तरह से कहे तो एआईएमआईएम खुद भले शून्य पर सिमटी रही, लेकिन वह कम से कम 7 सीटों पर मुस्लिम वोटों को बांटने में सफल रही.

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राजीव कुमार.
लखनऊ. उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव (UP Assembly Elections 2022) में असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi)
के ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल-मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रदर्शन को बड़ी विफलता माना जा रहा है. एआईएमआईएम देश के सबसे बड़े राज्य में 15.02 करोड़ मतदाताओं में से महज 4.51 लाख या कहें 0.49% वोट ही हासिल कर पाई.

ओवैसी की एआईएमआईएम ने राज्य की 95 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन एक भी सीट जीतने में असफल रही. आजमगढ़ जिले की मुबारकपुर सीट को छोड़ दें तो अन्य सभी सीटों पर एआईएमआईएम उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. मुबारकपुर सीट से पार्टी ने दो बार के बसपा विधायक शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को मैदान में उतारा था, जो पिछले साल नवंबर में ही एआईएमआईएम में शामिल हुए थे.

वहीं चुनावी नतीजों पर करीब से नज़र डालने पर पता चलता है कि ओवैसी की पार्टी भले ही एक भी सीट न जीत पाई हो, लेकिन उसने कम से कम 7 सीटों पर समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन के उम्मीदवारों को खासा नुकसान पहुंचाया. एक तरह से कहे तो एआईएमआईएम खुद भले शून्य पर सिमटी रही, लेकिन वह कम से कम 7 सीटों पर मुस्लिम वोटों को बांटने में सफल रही.

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मिसाल के तौर पर मुरादाबाद नगर सीट को लें, जहां बीजेपी उम्मीदवार रितेश कुमार गुप्ता ने 148,384 वोट हासिल किए और सपा के मोहम्मद यूसुफ अंसारी के खिलाफ 782 वोटों के मामूली अंतर से जीत हासिल की. यहां एआईएमआईएम उम्मीदवार वकी रशीद को 2,661 वोट मिले.

यहां बीजेपी उम्मीदवार के अलावा अन्य सभी प्रमुख विपक्षी उम्मीदवार मुस्लिम समुदाय से थे. यहां बसपा उम्मीदवार इरशाद हुसैन को 14,013 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के रिजवान कुरैशी को 5,351 वोट मिले. ऐसे में कह सकते हैं कि अगर मुस्लिम वोटों का इस कदर बंटवारा नहीं होता तो बीजेपी उम्मीदवार के लिए यह सीट जीतना लगभग असंभव होता.

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वहीं बाराबंकी की कुर्सी विधानसभा सीट पर बीजेपी के मौजूदा विधायक शकेंद्र प्रताप वर्मा की जीत का अंतर सपा के राकेश कुमार वर्मा से महज 217 वोटों का था. अगर AIMIM के कुमैल अशरफ खान ने 8,541 वोट, ज्यादातर मुस्लिम और बीजेपी विरोधी वोट नहीं काटे होते तो कहानी कुछ और होती.

सहारनपुर की नकुड़ सीट से सपा के डॉ. धर्म सिंह सैनी बीजेपी के मुकेश चौधरी से 315 मतों के अंतर से हार गए. यहां एआईएमआईएम प्रत्याशी रिजवाना को 3,593 वोट मिले.

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जौनपुर की शाहगंज सीट से सपा के शैलेंद्र यादव ललाई 719 मतों के अंतर से हार गए. यहां भी एआईएमआईएम उम्मीदवार नायब अहमद खान ने 8,128 वोट हासिल किए. कांग्रेस ने भी इस सीट से एक मुस्लिम उम्मीदवार को उतारा था, जिसे 1,529 वोट मिले थे. उधर सुल्तानपुर सदर सीट से एआईएमआईएम के मिर्जा अकरम बेग को 5,251 वोट मिले. यहां सपा के अनूप सांडा पर भाजपा उम्मीदवार विनोद सिंह की जीत का अंतर 1,009 वोट था.

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एआईएमआईएम खुद भले शून्य पर सिमटी रही, लेकिन वह कम से कम 7 सीटों पर मुस्लिम वोटों को बांटने में सफल रही.

इसके अलावा भदोही की औराई आरक्षित सीट से बीजेपी के मौजूदा विधायक दीनांत भास्कर को 93,691 वोट मिले और उन्होंने सपा की अंजनी सरोज को 1,647 वोटों के मामूली अंतर से हराया. एआईएमआईएम उम्मीदवार तेधाई को यहां 2,190 वोट मिले. वहीं बिजनौर सीट पर भाजपा प्रत्याशी सुची ने रालोद के नीरज चौधरी को 1,445 वोटों से हराया. यहां ओवैसी की पार्टी के मुनीर अहमद को 2,290 वोट मिले.

कुछ अन्य सीटों पर एआईएमआईएम उम्मीदवारों ने सपा प्रत्याशियों को हराया तो नहीं, लेकिन हार का डर जरूर बैठा दिया था. इसमें एक मामला सुल्तानपुर की इसौली सीट का है, जहां एआईएमआईएम उम्मीदवार को 3,308 वोट मिले थे, जबकि बीजेपी उम्मीदवार के खिलाफ सपा उम्मीदवार की जीत का अंतर महज 269 वोट था. ऐसे में ओवैसी के उम्मीदवार को अगर थोड़ा और वोट मिल जाता तो यहां सपा उम्मीदवार की उम्मीदों पर पानी फिर जाता.

प्रतापगढ़ जिले की रानीगंज सीट से सपा प्रत्याशी राकेश कुमार वर्मा ने 2,649 मतों के अंतर से जीत हासिल की. हालांकि, एआईएमआईएम के अनिल कुमार को भी यहां 11,748 वोट मिले. यहां भी अगर ओवैसी के उम्मीदवार ने सपा प्रत्याशी की धड़कने जरूर बढ़ा दी थी. कुछ इसी तरह की कहानी राम नगर और डोमरियागंज सीटों में भी देखी गई, जहां एआईएमआईएम उम्मीदवारों के थोड़े बेहतर प्रदर्शन से इन सीटों पर सपा की जीत की उम्मीदों पर पानी फिर सकता था.

यहां गौर करने वाली एक और बात यह है कि असदुद्दीन ओवैसी का प्रदर्शन कांग्रेस के मुकाबले बेहतर दिख रहा है. ओवैसी ने जिन 95 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे उनमें से 59 सीटों पर उसके उम्मीदवारों को कांग्रेस प्रत्याशियों के मुकाबले ज्यादा वोट मिले. सिर्फ 36 सीटों पर कांग्रेस ने एआईएमआईएम से बेहतर प्रदर्श किया.

कुल मिलाकर देखें तो ओवैसी की पार्टी ने उन 95 सीटों पर कुल 4 लाख 50 हजार 929 वोट हासिल किए, जबकि कांग्रेस को महज 3 लाख 13 हजार 577 वोट ही मिल पाए. कांग्रेस के मुकाबले एआईएमआईएम को 44 फीसदी अधिक वोट मिले. यह आंकड़े कांग्रेस के लिए इसलिए भी खतरे की घंटी हैं, क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि राज्य के मुस्लिम वोटरों का उससे मोहभंग हो रहा है और वे असदुद्दीन ओवैसी में ही अपनी उम्मीद देख रहे हैं.

Tags: AIMIM, Akhilesh yadav, Asaduddin owaisi, Samajwadi party, UP Election Results 2022

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