Women's Day 2020: यूपी की इस महिला अफसर की कहानी- GST की चुनौती के साथ पर्वत शिखर जीतने का पैशन
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Women's Day 2020: यूपी की इस महिला अफसर की कहानी- GST की चुनौती के साथ पर्वत शिखर जीतने का पैशन
आगरा में तैनात असिस्टेंट कमिश्नर कॉमर्शियल टैक्स (स्टेट जीएसटी) कंचन सिंह गौड़ वर्किंग विमेन के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं.

Women's Day Special: पर्वतारोहण के लिए ही जीवन में पहली बार विदेश यात्रा करने वालीं कंचन सिंह गौड़ को जिंदगी में चुनौतियां बेहद पसंद हैं. यही कारण है कि वह जल्द ही अकेले देश में लंबी सोलो बाइक राइड पर निकलने वाली हैं. वह किसी भी वर्किंग विमेन के लिए प्रेरणा से कम नहीं हैं.

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लखनऊ. एक तरफ जीएसटी (GST) की जिम्मेदारियां दूसरा आगरा (Agra) जैसे औद्योगिक शहर में पोस्टिंग, आप अंदाजा लगा सकते हैं कि एक अफसर पर मार्च के महीने में कितना दबाव होगा. लेकिन चुनौतियों से जूझते हुए कोई अपने पैशन को कैसे जिंदा रखता है? इसी का उदाहरण हैं कंचन सिंह गौड़ (Kanchan Singh Gaur). असिस्टेंट कमिश्नर कॉमर्शियल टैक्स (स्टेट जीएसटी) (Assistatnt Commissioner Commercial Tax -State GST) कंचन सिंह गौड़ प्रदेश की जानी मानी पर्वतारोही हैं. इन्होंने एशिया से लेकर यूरोप तक कई चोटियों पर फतेह हासिल की है. पर्वतारोहण के लिए ही जीवन में पहली बार विदेश यात्रा करने वालीं कंचन सिंह गौड़ को जिंदगी में चुनौतियां बेहद पसंद हैं. यही कारण है कि वह जल्द ही अकेले देश में लंबी सोलो बाइक राइड पर निकलने वाली हैं. ये राइड वह देश की तमाम लड़कियों को समर्पित करेंगीं. न्यूज 18 ने कंचन से उनके पर्वतारोहण के अनुभव और भविष्य की योजनाओं को लेकर विस्तार से बातचीत की.

कंचन बताती हैं ट्रैकिंग को लेकर वह कभी ज्यादा सीरियस नहीं थीं. लेकिन एक बार सिक्किम गई थीं, वहां पर्वतारोहण के सामान मिलते हैं. सोचा कि एक बार आजमाते हैं. इसके बाद एक छोटा सा ट्रेक किया तो अच्छा लगा. इसके बाद उन्होंने 2016 में छुट्टी लेकर पहलगाम के जवाहर माउंटेन इंस्टीट्यूट से पर्वतारोहण का कोर्स किया. ये इंस्टीट्यूट भारत सरकार, रक्षा मंत्रालय और जम्मू कश्मीर सरकार मिलकर चलाते हैं. वहां काफी नौजवान थे, जिनके साथ सीखकर काफी प्रेरणा मिली. कोर्स के बाद वापस ऑफिस में अपने काम में लग गई. इस दौरान गूगल पर ट्रैकिंग को लेकर जानकारी इकट्ठा करती रही. कंचन कहती हैं कि ट्रैकिंग को लेकर जो मुश्किलें हैं, सरकारी नौकरी में छुट्टी और अनुमति को लेकर उससे कम मुश्किलें नहीं हैं.

पहली विदेश यात्रा और फतेह किया माउंट किलिमंजारो
कंचन बताती हैं कि अफ्रीकी महाद्वीप का सबसे ऊंचा माउंट किलिमंजारो उनके लिए पहला पर्वतारोहण तो था ही, साथ ही जीवन की पहली विदेश यात्रा भी थी. उसी के लिए पहली बार पासपोर्ट बनवाया था. कंचन कहती हैं कि मैं जिस परिवेश से आई हूं, जिसमें ज्यादातर रिश्तेदार, उनके माता-पिता गांव से ही लखनऊ में आकर बसे थे. सच ये है कि मैंने जॉब में आकर ही घूमना शुरू किया. पिता को ज्यादा घूमने का शौक नहीं था. जो भी किया खुद किया. अभी भी वह आगरा पोस्टिंग पर हैं और अकेले ही सब करती हैं.



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कंचन ने अपने दम पर सरकारी नौकरी हासिल की और साथ ही अपने पैशन को जिंदा रखे हुए हैं.




घरवालों को पता ही नहीं था
वह कहती हैं कि जब उन्होंने पासपोर्ट बनवाया तो पिता डर गए कि क्या हो गया? कहीं बाहर जा रही हो? कंचन कहती हैं कि उन्होंने पिता को पर्वतारोहण के बारे में बताया भी नहीं था. जब माउंट किलिमंजारो से लौटकर वापस आई, अखबारों में छपा. डिपार्टमेंट ने अपनी वेबसाइट पर डाला. तब घरवालों को पता चला कि अच्छा ऐसा भी कुछ है. पहले तो उन्हें लगा था कि घूमने जा रही है. उन्हें डर था कि विदेश में अकेले जा रही है?

पहली चढ़ाई में दुनिया की सबसे ऊंची ट्रेकेबल पीक
कंचन सीतापुर की ही रहने वाली हैं. महिला विद्यालय से उन्हेांने इंटरमीडिएट की पढ़ाई की, इसके बाद लखनऊ यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की. कंचन कहती हैं कि उनका पहला ट्रेक उनका स्टोक कांगड़ी था. ये लेह में है. ये दुनिया की सबसे ऊंची ट्रेकेबल पीक है. कंचन बताती हैं कि दुनिया का सबसे ऊंचा होने जैसी जानकारी उन्हें नहीं थी, लेकिन जब ट्रेक पूरा कर लिया तो हिम्मत बढ़ गई. लोगों की इच्छा रहती है कि इस ट्रेक पर वो जाएं और मैं पहली बार में ही पहुंच गई. उसके बाद उन्होंने कोर्स किया और इसके बाद वह माउंट किलिमंजारो गईं.

पहाड़ की चोटियों पर गंदगी देख होता है दुख
भविष्य की योजनाओं के बारे में कंचन कहती हैं कि वह पर्वतारोहण ही करना चाहती हैं लेकिन वह साथ ही साथ ये भी देखती हैं कि पर्यावरण को बहुत ज्यादा क्षति भी पहुंचा रहा है. पहाड़ की चोटियों पर वह खुद बैग में गंदगी भर कर लाती रही हैं.

'स्पांसरशिप मिली तो ही एवरेस्ट का सोचूंगी'
वह कहती हैं कि भारत उपमहाद्वीप में विदेशों की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण और ज्यादा ऊंची चोटियां हैं. बाकी जहां तक 7 महाद्वीपों की चोटियों की बात है तो यकीनन वहां चढ़ने से आपको प्रचार खूब मिलता है लेकिन यहां ट्रैकिंग के लिए आपको स्पांसरशिप की जरूरत होती है. कंचन बताती हैं कि एवरेस्ट पर पिछले साल एक हरियाणा की लड़की गई थी. उसने उनके साथ ही कोर्स किया था. उसने बताया कि एवरेस्ट पर जाने के लिए 30 लाख रुपए लगे थे. कंचन कहती हैं तो कभी स्पांसरशिप मिली तो वह एवरेस्ट के लिए जरूर आगे बढ़ेंगीं.

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अफ्रीका और यूरोप की सबसे ऊंची पर फतेह करने वाली कंचन के सपने अभी थमे नहीं हैं.


अकेले 14 राज्यों का कर चुकी हैं दौरा
वैसे कंचन सिर्फ पर्वतारोहण ही नहीं कई और चीजों में हाथ आजम रही हैं. 2016 से अब तक उत्तर से लेकर दक्षिण तक भारत के 14 राज्यों की यात्राएं कर चुकी हैं. उनका लक्ष्य है कि एक साल के अंदर वह सभी राज्यों को पूरा कर लें. यहां वह ऑफ बीट जगहों पर जाती हैं. उन्होंने छत्तीसगढ़ में बस्तर और दंतेवाड़ा का भी दौरा किया. कंचन कहती हैं कि जितना इन क्षेत्रों के बारे में प्रचार किया जाता है, उतनी खतरनाक स्थिति नहीं है. हां, सुरक्षा को लेकर कुछ जरूरी चीजें तो ध्यान रखनी ही पड़ती हैं.

लड़कियों के लिए देश में लंबी सोलो बाइक राइड की तैयारी
वैसे कंचन ghumantukanchan के नाम से यूट्यूब चैनल भी चलाती हैं. वह कहती हैं कि वह जल्द ही एक काफी लंबी बाइक राइड भी प्लान कर रही हैं. उनकी योजना है कि वह इस राइड पर अकेले ही जाएंगीं.कंचन के अनुसार उनकी कोशिश है कि वह अपने इस अभियान को लड़कियों को समर्पित करें. इसके पीछे मुख्य कारण ये है कि जब वह राज्यों के दौरे पर रहती हैं, तो उन्हें लड़के तो हर जगह क्रिकेट आदि खेलते मिल जाते हैं लेकिन लड़कियां नहीं मिलतीं. यही नहीं जब वह किलिमंजारों से लौटीं तो उनके ही विभाग की महिला अफसरों ने उनका काफी उत्साहवर्द्धन किया. अफसर उन्हें अपनी बेटियों से मिलाना चाहते हैं. तो अगली बाइक राइड वह लड़कियों को ही समर्पित करना चाहती हैं.

ये हैं उपलब्धियां
बता दें कंचन ने अब तक अफ्रीकी महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारों पर फतेह हासिल की है. वहीं यूरोपीय महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रस पर जीत हासिल की है.

प्रदेशों की बात करें तो कंचन अब तक जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, सिक्किम, मेघालय, असम, मणिपुर, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, केरल, उड़ीसा, पुद्दूचेरी, दमन दीव का दौरा कर चुकी हैं.

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