UP: माफी नहीं मांगते तो क्या साल भर पहले ही कांग्रेस से आउट होते जितिन प्रसाद?

जितिन प्रसाद बीजेपी में शामिल हो गए हैं.

जितिन प्रसाद बीजेपी में शामिल हो गए हैं.

Lucknow News: जितिन प्रसाद (Jitin Prasad) के पार्टी से कटे-कटे रहने की खबरें पिछले दो साल से सामने आ रही थी. खुद जितिन से पहले कांग्रेस पार्टी छोड़ने की अटकलों को खारिज किया था.

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लखनऊ. पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार जितिन प्रसाद (Jitin Prasad) ने कांग्रेस (Congrees) छोड़ दी है. उन्होंने दिल्ली में भाजपा का दामन थाम लिया. वैसे तो पार्टी से उनके कटे-कटे रहने की खबरें पिछले 2 सालों से आ रही थी. लेकिन जितिन प्रसाद ने हमेशा ही कांग्रेस पार्टी छोड़ने की अटकलों को खारिज किया था. तो फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि जितिन प्रसाद ने पार्टी छोड़ दी. पिछले साल भर से जितिन प्रसाद के राजनीतिक गतिविधियों को देखें तो इस बात के संकेत मिल रहे थे कि नई कांग्रेस कमेटी से उनका जम नहीं रहा. पार्टी आलाकमान से कि वे बहुत खुश नजर नहीं आ रहे थे. पार्टी लाइन से अलग वह तमाम राजनीतिक कार्यक्रम उत्तर प्रदेश में चला रहे थे.

जितिन प्रसाद और नई कांग्रेस कमेटी के बीच सुलगते रिश्तों की पहली आंख पिछले साल एक बवाल के साथ महसूस की गई थी. जितिन प्रसाद और कांग्रेस की नई कमेटी के बीच पहली तल्खी 1 साल पहले सामने आई थी. आपको याद होगा कि लखीमपुर में जितिन प्रसाद को लेकर काफी बवाल हुआ था. लखीमपुर की जिला कमेटी ने प्रस्ताव पास करके एक लिखित रिक्वेस्ट पार्टी आलाकमान को भेजी थी जिसमें इस बात का जिक्र था कि जितिन प्रसाद को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाए. इसकी दो वजहें तब सामने आई थी. पहली तो यह कि जितिन प्रसाद ने भी कांग्रेस के उन सीनियर लीडर्स के पक्ष में पत्र लिखा था जिन्होंने नेतृत्व परिवर्तन की आवाज उठाई थी. इसे तब G-23 का नाम दिया गया था. दूसरी वजह ये बताई गई थी कि जितिन प्रसाद न सिर्फ पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ रहे हैं बल्कि उत्तर प्रदेश में पैरलल संगठन खड़ा करने की कोशिश भी कर रहे हैं.

क्यों जितिन प्रसाद पर हुआ था बवाल

जितिन प्रसाद को पार्टी से निकलने का फैसला तभी हो गया था लेकिन कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं की सरपरस्ती के कारण तब जितिन प्रसाद का मामला ठंडा पड़ गया था. कांग्रेस कमेटी के उच्च सूत्रों की मानें तो लखीमपुर पार्टी यूनिट की रिक्वेस्ट पर यूपी की महासचिव प्रियंका गांधी ने जितिन प्रसाद को पार्टी से निकालने का फैसला ले लिया था. इसकी भनक मिलते ही जितिन प्रसाद भागे भागे दिल्ली पहुंचे. वहां उन्होंने कांग्रेस के दो बहुत वरिष्ठ पदाधिकारियों से बात की और प्रियंका गांधी को ऐसा करने से रोकने का रिक्वेस्ट भी किया. जितिन प्रसाद की राजनीतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए पार्टी के दो उच्च पदस्थ पदाधिकारियों ने प्रियंका गांधी से जितिन प्रसाद की मीटिंग करवाई. बताते हैं कि दिल्ली में हुई इस मीटिंग में जितिन प्रसाद ने प्रियंका गांधी से अपने किए जा रहे कार्यों के लिए माफी मांगी. तब उन्होंने इस बात का भी भरोसा दिलाया कि पार्टी पदाधिकारियों के निर्देशों और उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यक्रमों के तहत ही वह राजनीतिक गतिविधियां चलाएंगे. जितिन प्रसाद की राजनीतिक विरासत और उनके आश्वासन को मानते हुए प्रियंका गांधी ने उन्हें कुछ और मौका देने का फैसला किया.समय बीतता गया लेकिन जितिन प्रसाद अपनी अलग राजनीतिक ताकत दिखाने की कोशिशों में लगे रहे. ब्राह्मण चेतना परिषद के जरिए सूबे के ब्राह्मण समुदाय को गोलबंद करने की कवायद उन्होंने और तेज कर दी. कांग्रेस पार्टी द्वारा किए गए किसी भी आंदोलन में उन्होंने भाग नहीं लिया. प्रदेश की कांग्रेस कमेटी से उनकी दूरियां और बढ़ती चली गई.
बता दें कि उत्तर प्रदेश की कमान प्रियंका गांधी के हाथों में आने के बाद से कांग्रेस में जमे कई नेताओं को बाहर का रास्ता पिछले दिनों दिखाया गया था. नाम बड़े और दर्शन छोटे वाले सभी नेताओं को धीरे-धीरे अलग-थलग किया जाने लगा. जितिन प्रसाद को भी शायद इसका डर सता रहा था. लगातार तीन चुनाव हारने के बाद जितिन प्रसाद किस मुंह से दोबारा 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से टिकट की दावेदारी करते. ऐसे में उनके सामने आगे कुआं और पीछे खाई वाली स्थिति पैदा हो गई थी. एक तरफ तो प्रदेश की नई कांग्रेस कमेटी से उनका तालमेल नहीं बैठ रहा था और दूसरी तरफ उन्हें आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए टिकट मिलता भी नहीं दिख रहा था. ऐसे में जितिन प्रसाद ने पार्टी से बाहर जाने में ही समझदारी समझी. अब देखना यह है कि उनके राजनीतिक भविष्य के इस खालीपन को भाजपा कैसे भरती है. हालांकि इस बात की चर्चा भी तेज है कि मुश्किल दौर से गुजर रही कांग्रेस पार्टी एक ब्राह्मण नेता को पार्टी से निकालने का जोखिम नहीं उठाना चाह रही थी. इसीलिए शायद उसने ऐसा रास्ता तैयार किया जिससे जितिन प्रसाद खुद-ब-खुद पार्टी छोड़ दें

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