योगी कैबिनेट विस्तार की अटकलें! क्या UP में 2022 चुनाव से पहले हिट होगा ये फॉर्मूला
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योगी कैबिनेट विस्तार की अटकलें! क्या UP में 2022 चुनाव से पहले हिट होगा ये फॉर्मूला
कैबिनेट विस्तार की खबरें वायरल हो रही हैं. (File Photo)

मंत्रिपरिषद विस्तार (Cabinet Expansion) की अटकलों को यूपी में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव ( UP Assembly Election 2022) से जोड़कर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि विधायकों की नाराजगी को रोकने के लिए ऐसा फैसला लिया जा सकता है. 

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लखनऊ. विधानसभा सत्र (Assembly Session) के दौरान बीजेपी विधायकों के असंतोष की हलचल के बीच मंत्रिपरिषद विस्तार की खबरें वायरल हो रही हैं. उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस (COVID-19) से निपटने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने विधायकों की निधि को एक वर्ष के लिए स्थगित कर दिया है. सरकार के साढ़े तीन साल बीत गए हैं. अब जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है सूबे के एक बीजेपी विधायक भी अपनी बेचैनी जाहिर कर दी है. ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार की खबर पर निगाहें जा रही हैं. चर्चा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) अपने मंत्रिमंडल (Cabinet) का जल्द पुनर्गठन कर सकते हैं. फेरबदल को वैसे तो 2022 के विधानसभा चुनाव की आहट से जोड़ा जा रहा है, लेकिन वरिष्ठ पत्रकार अनिल भारद्धाज भी इसे उत्तर प्रदेश की वर्तमान राजनीति से जोड़ कर देख रहे हैं.

अनिल भारद्धाज कहते हैं कि विधायक निधि बंद होने से पक्ष-विपक्ष दोनों के माननीय परेशान हैं. सामने चुनाव है और क्षेत्र में काम भी दिखाना है. साथ ही साथ कुछ खास लोगों को साधने की कोशिश भी चल रही हैं. उसको भी अनदेखा नहीं किया जा सकता. इसलिए यह कहा जा सकता है कि विधायकों की नाराजगी को रोकने का एक कारण मंत्रिपरिषद विस्तार की खबर का चर्चा में लाना हो सकता है. वो कहते हैं कि पिछले बार सदन में विधायक धरने पर बैठ गए थे, धरना दल से ऊपर था. ऐसा कुछ न हो जाए, इससे निपटने की कोशिश के रूप में भी इसे देखा जा सकता है.

नए चेहरों पर खेल सकते हैं दांव
हाल ही में यूपी के दो मंत्रियों की कोरोना से मृत्यु हुई है. इनके विभाग किसी को आवंटित नहीं किए गए हैं. इन मंत्रियों के स्थान पर नए चेहरों को जगह मिल सकती है. वहीं, कुछ मंत्री अपना विभाग बदलवाना चाहते हैं, जबकि कुछ को उनकी असंतोषजनक परफॉर्मेंस की वजह से किनारे किया जा सकता है. विधानसभा चुनाव के मद्देनजर विधायकों की नाराजगी कम करने के लिए उनके समायोजन पर भी माथापच्ची चल रही है. विधानसभा चुनाव होने में करीब डेढ़ साल बाकी है. चुनाव की हलचल धीरे-धीरे तेज हो रही है. इसके साथ ही मंत्रिपरिषद के पुनर्गठन की सुगबुगाहट भी सुनाई देने लगी है. हालांकि कोविड-19 के कारण इसमें कुछ वक्त लग सकता है. पहली बार मंत्रिमंडल विस्तार एक साल पहले इसी महीने हुआ था. 23 मंत्रियों ने शपथ ली थी  जिसमें 18 नए चेहरे थे. विधायकों की संख्या के हिसाब से मंत्रिपरिषद में 60 सदस्य हो सकते हैं.
कुछ मंत्रियों पर लटक रही तलवार


अभी तक 56 सदस्यीय मंत्रिपरिषद थी. हाल ही में प्राविधिक शिक्षा मंत्री कमलरानी वरुण और होमगार्ड मंत्री चेतन चौहान की कोरोना से मृत्यु के बाद यह संख्या 54 रह गई है. मंत्रिपरिषद में छह स्थान खाली हैं. कुछ मंत्री 70 साल की उम्र के आधार पर हटाए जा सकते हैं जबकि कुछ मंत्रियों पर उनकी खराब परफॉर्मेंस के कारण तलवार लटक रही है. वहीं, कुछ मंत्रियों का कामकाज कमजोर माना जा रहा है, जिसके बाद उनका विभाग बदले जाने की अटकलें हैं. एक-दो चेहरों को मंत्रिपरिषद से हटाकर दूसरी भूमिका देने के संकेत हैं. फिलहाल स्थिति तो आने वाले समय तय करेगा, लेकिन इतना साफ है कि विधायक निधि एक साल तक स्थगित किए जाने और ब्राह्मणों पर हो रही राजनीति पर कांग्रेस, सपा और बसपा ने अपनी रणनीति तैयार कर ली है.

सरकार को घेरने की तैयारी
विधायक निधि और ब्राह्मणों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी सदन.में सरकार को घेरने की तैयारी में है. वहीं समाजवादी पार्टी के नेताओं ने विधानसभा परिसर स्थित पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह के प्रतिमा के सामने धरना भी दिया. सपा नेता और विधायक सुरेश पासी कहते हैं कि सरकार को बताना पड़ेगा कि हमारी विधायक निधि कहां गई.  ऐसे में ये सवाल लाजिमी है कि मंत्रिपरिषद विस्तार की वायरल हो रही खबरों के बीच कहीं सत्ताधारी पार्टी की कोशिश विधायकों की नाराजगी पर ठहराव लाने की तो नहीं है.
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