योगी सरकार का दावा- पिछले 6 माह में दिया 1.25 करोड़ लोगों को रोजगार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (File Photo)
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (File Photo)

आंकड़ों के मुताबिक 15 सालों में योगी सरकार ने सबसे ज़्यादा भर्तियां की हैं. पिछली सरकार के पूरे कार्यकाल में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की विभिन्न भर्तियों में लगभग 26,000 अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जबकि वर्तमान सरकार ने 3 वर्षों में 26,103 अभ्यर्थियों का चयन किया है.

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  • Last Updated: September 20, 2020, 10:36 AM IST
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लखनऊ. यूपी सरकार की तरफ से जारी किए गए आंकड़े के मुताबिक सरकारी नौकरी (Government Jobs) देने में पिछली सरकारों की तुलना में योगी सरकार (Yogi Government) काफी आगे है. दावा है कि कोरोना काल के बावजूद 3 सालों में पिछली सरकारों से ज़्यादा तीन लाख सरकारी भर्तियां की गई हैं. आंकड़ों के मुताबिक 15 सालों में योगी सरकार ने सबसे ज़्यादा भर्तियां की हैं. पिछली सरकार के पूरे कार्यकाल में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की विभिन्न भर्तियों में लगभग 26,000 अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जबकि वर्तमान सरकार ने 3 वर्षों में 26,103 अभ्यर्थियों का चयन किया है.

इन्हें मिला रोजगार

इतना ही नहीं पिछले 6 माह में योगी सरकार ने 1.25 करोड़ लोगों को रोजगार दिया है. इसमें 50 लाख से अधिक कामगारों को क्रियाशील औद्योगिक इकाइयों में रोजगार दिया गया. 11 लाख से अधिक कामगारों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न औद्योगिक संस्थानों से एमओयू हस्ताक्षरित किया गया. अन्य राज्यों से वापस लौटे 2.57 लाख और आत्मनिर्भर ईसीजीएलएस योजना के तहत 4,31,571 कामगारों को रोजगार मिला. मनरेगा के अंतर्गत 24.45 करोड़ मानव दिवस सृजित कर 11 सितम्बर 2020 तक 94 लाख से अधिक मजूदरों को रोजगार देकर 4681.97 करोड़ रुपये से अधिक मानदेय का का भुगतान किया गया.



सपा ने आंकड़ों पर साधा निशाना
सरकार के आंकड़ों पर सवाल खड़ा करते हुए समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने कहा कि झूठे आंकड़े जारी कर आँखों में धुल झोखने का काम किया जा रहा है. सपा ने आरोप लगाया कि अखिलेश सरकार में हुई भर्तियों का भी क्रेडिट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) लेना चाह रहे हैं.

सुनील सिंह साजन ने लगाए ये आरोप

सपा प्रवक्ता व एमएलसी सुनील सिंह साजन ने कहा कि सरकार ने कल रोजगार पर साढ़े तीन सालों का ब्यौरा जारी किया है. रोजगार के झूठे आंकड़े जारी कर आखिर सरकार किसकी आंखों में धूल झोंकना चाहती है. चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के तहत भरे गए 90 फ़ीसदी पद संविदा या आउटसोर्सिंग के है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में 100 फ़ीसदी भर्तियां संविदा की होती है. सरकार आउटसोर्सिंग और ठेके पर दी जाने वाली नौकरी को उपलब्धि क्यों मानती है. सजन ने कहा कि सरकार आउटसोर्सिंग, ठेके पर की गई भर्तियों, संविदा भर्ती और स्थायी नौकरियों का ब्यौरा क्यों नहीं देती है? अधिनस्थ चयन सेवा आयोग और लोक सेवा आयोग में जो भर्तियां अखिलेश यादव के समय में निकली थी उसका रिजल्ट 2017 में आया. उसको भी सरकार ने अपनी उपलब्धियों में जोड़ लिया. भारतीय जनता पार्टी की सरकार अखिलेश के ज़माने में की गई भर्तियों को अपना क्यों बता रही है? सपा सरकार के कामकाज का फीता काटने के बाद अब बीजेपी सरकार रोजगार को भी अपने हिस्से में गिना रही है.
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