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Yogi 2.0: योगी कैबिनेट में केशव मौर्य और ब्रजेश पाठक बने डिप्‍टी CM, जानें कैसे चढ़ीं राजनीति की सीढ़ियां

केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक को डिप्‍टी सीएम बनाया गया है. (फोटो- ANI)

केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक को डिप्‍टी सीएम बनाया गया है. (फोटो- ANI)

Yogi Adityanath 2.0: योगी आदित्‍यनाथ ने शपथ ले ली है. वहीं, इस बार केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) को फिर डिप् ...अधिक पढ़ें

लखनऊ. योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है. उन्‍होंने यूपी की सियासत में 37 साल बाद लगातार दूसरी बार सीएम बनने का रिकॉर्ड कायम किया है. इसके अलावा केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) को एक बार फिर डिप्‍टी सीएम की जिम्‍मेदारी मिली है. इस बार भी उनका कद योगी कैबिनेट में दूसरे नंबर का होगा. वहीं, पिछली बार डिप्‍टी सीएम की जिम्‍मेदारी संभालने वाले दिनेश शर्मा को योगी कैबिनेट 2.0 में जगह नहीं मिली है. इस बार ब्रजेश पाठक (Brajesh Pathak) ने दूसरे डिप्टी सीएम की शपथ ली है. वह पिछली बार कानून मंत्री थे.

बहरहाल, केशव प्रसाद मौर्य को भाजपा ने इस बार कौशांबी की सिराथू सीट से मैदान में उतारा था, लेकिन वह सपा की पल्‍लवी पटेल से 7337 वोटों से हार गए थे. हालांकि इसके बाद भी पार्टी ने उन पर अपना भरोसा कायम रखा है, क्‍योंकि वह पिछड़े वर्ग के दिग्‍गज नेता हैं. इसके अलावा ब्रजेश पाठक यूपी की सियासत में एक बड़े ब्राह्मण चेहरे के तौर पर जाने जाते हैं.

अखबार बांटते-बांटते संघ से हुआ जुड़ाव

आपके शहर से (लखनऊ)

केशव का जन्‍म यूपी के कौशांबी जिले के सिराथू में 7 मई 1969 को हुआ था. उनके पिता का नाम श्‍याम लाल मौर्य और मां का धनपति देवी मौर्य है. केशव प्रसाद मौर्य ने अखबार बांटते-बांटते संघ की शाखाओं शिरकत करना शुरू किया था. इसके बाद उनकी किस्मत ने करवट लेना शुरू कर दिया. दरअसल, उस वक्‍त अशोक सिंघल की निगाह केशव प्रसाद मौर्य पर पड़ी थी. इसके बाद वह विश्व हिंदू परिषद के साथ जुड़ गए. इस दौरान लगभग 20 वर्षो तक विश्व हिंदू परिषद में काम करने के दौरान श्री राम जन्मभूमि आंदोलन में भी भाग लिया. यही नहीं, केशव प्रसाद मौर्य ने 12 साल तक परिवार से कोई रिश्ता ही नहीं रखा क्योंकि परिवार को उनका शाखा में जाना पसंद नहीं था. वहीं, यूपी चुनाव 2022 के दौरान केशव के बड़े भाई सुखलाल ने बताया था कि बचपन में केशव सुबह अखबार बेचते और फिर पिता श्यामलाल के साथ चाय बेचने में सहयोग भी करते थे. केशव प्रसाद मौर्य की पत्नी का नाम राजकुमारी देवी मौर्य है. इनके दो बेटे योगेश मौर्य और आशीष मौर्य हैं. इस वक्‍त बड़ा बेटा योगेश भी राजनीति में सक्रिय है.

सिराथू में पहली बार कमल खिलाया

राजनीति में आने के बाद केशव प्रसाद मौर्य ने पहला चुनाव 2004 में बाहुबली अतीक अहमद के प्रभाव वाली सीट इलाहाबाद पश्चिम से लड़ा. हालांकि साल 2004 और 2007 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद उन्‍होंने 2012 के चुनाव में कौशांबी की सिराथू सीट से किस्मत आजमाई और उन्होंने इस सीट पर पहली बार कमल भी खिलाया. 2014 में लोकसभा का चुनाव लड़ा और फूलपुर से सांसद भी बने. उसके बाद प्रदेश में पार्टी अध्यक्ष के तौर पर काम किया. केशव मौर्य की कुशल संगठनात्मक क्षमता ही थी कि प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए सारी पिछड़ों जातियों को भाजपा की तरफ लामबंद किया और 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा को प्रदेश में बंपर जीत हासिल हुई थी. इस दौरान भाजपा की जीत के बाद केशव मौर्य के मुख्यमंत्री बनने की चर्चा भी काफी जोरों पर रही. मगर बाद में योगी सरकार में केशव मौर्य उप मुख्यमंत्री और पीडब्लयूडी मंत्री बने. पूरे प्रदेश में सड़कों का जाल बिछाने का काम इसी विभाग के पास था.

जानें कौन हैं ब्रजेश पाठक

ब्रजेश पाठक यूपी की सियासत में एक बड़े ब्राह्मण चेहरे के तौर पर जाने जाते हैं. उनका यह स‍ियासी सफर इतना आसान नहीं रहा है. इस स‍ियासी सफर में उन्‍हें कई उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा. कभी बसपा का एक बड़ा ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले ब्रजेश पाठक ने छात्र नेता से कैब‍िनेट मंत्री तक सफर तय क‍िया. बीजेपी के इस मौजूदा मंत्री ने अपने जीवन का पहला व‍िधानसभा चुनाव कांग्रेस के ट‍िकट पर लड़ा था, ज‍िसमें उन्‍हें हार का सामना करना पड़ा. ब्रजेश पाठक इस बार लखनऊ कैंट से दूसरी बार विधायक बने है. वह 2017 में पहली बार विधायक बने थे.

ब्रजेश पाठक 2004 में बने थे सांसद

ब्रजेश पाठक का जन्म 25 जून 1964 को हरदोई जिले के मल्लावा कस्बे के मोहल्ला गंगाराम में हुआ. उनके पिता का नाम सुरेश पाठक था. ब्रजेश पाठक ने कानून की पढ़ाई की है, लेक‍िन उन्‍होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत अपने छात्र जीवन से की है. 1989 में वह लखनऊ विश्वविद्यालय छात्र संघ के उपाध्यक्ष चुने गए थे. इसके बाद 1990 में वह लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए थे. इसके 12 साल बाद वह कांग्रेस में शामिल हुए और 2002 के विधानसभा चुनाव में मल्लावां विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और 130 वोटों के करीबी अंतर से चुनाव हार गये थे. इसके बाद वे बसपा में शामिल हुए और 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्नाव सीट से सांसद बने. 2010 में बसपा ने उन्हें राज्यसभा भेजा. 2014 में बसपा ने उन्हें फिर उन्नाव सीट से लोकसभा चुनाव में उतारा, लेकिन वे हार गए. 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने बीजेपी का दामन थामा और लखनऊ मध्य से चुनाव लड़कर पहली बार विधानसभा पहुंचे.

Tags: Brajesh Pathak, CM Yogi Adityanath, Deputy CM Keshav Prasad Maurya

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