Ayodhya Verdict: यूपी में सभी स्कूल-कॉलेज 11 नवंबर तक बंद रखने का आदेश

योगी आदित्यनाथ ने कहा 'हमने जो किया है, आंकड़े उसके सबूत हैं. प्रधानमंत्री आवास योजना से लेकर तमाम विकास योजनाओं में उत्तर प्रदेश यूं ही नहीं नंबर एक पर है.' (फाइल फोटो)

योगी आदित्यनाथ ने कहा 'हमने जो किया है, आंकड़े उसके सबूत हैं. प्रधानमंत्री आवास योजना से लेकर तमाम विकास योजनाओं में उत्तर प्रदेश यूं ही नहीं नंबर एक पर है.' (फाइल फोटो)

अयोध्या जमीनी विवाद पर 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Of India) फैसला (Ayodhya Verdict) सुनाएगा. उधर फैसले को देखते हुए उत्तर प्रदेश के सभी स्कूल-कॉलेजों सहित सभी शिक्षण संस्थान को 9 से सोमवार 11 नवंबर तक बंद रखने का आदेश दिया गया है.

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लखनऊ. अयोध्या जमीन विवाद (Ayodhya Land Dispute) को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) शनिवार (9 नवंबर) सुबह 10:30 बजे अपना फैसला सुनाएगा. यूपी सरकार ने फैसले के मद्देनजर अयोध्या समेत पूरे प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है. वहीं उत्तर प्रदेश के सभी स्कूल-कॉलेजों सहित सभी शिक्षण संस्थान को 9 से सोमवार 11 नवंबर तक बंद रखने का आदेश दिया गया है. इस संबंध में सभी डीएम को सूचना भेजी जा रही है. वैसे 12 नवंबर को गुरुनानक जयंती के उपलक्ष्य में छुट्टी होने के कारण स्कूल-कॉलेज अब 13 नवंबर को ही खुल पाएंगे. हालांकि बताया जा रहा है कि प्रदेश में स्थिति को देखते हुए ये छुट्टी बढ़ाई भी जा सकती है.



सुप्रीम कोर्ट में 2017 में शुरू हुई सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हुई. उस समय चीफ जस्टिस थे दीपक मिश्रा. दीपक मिश्रा के बाद रंजन गोगोई हुए CJI. 8 जनवरी, 2019 को रंजन गोगोई ने ये मामला पांच जजों की एक खंडपीठ के सुपुर्द किया. 8 मार्च, 2019 को अदालत ने सभी मुख्य पक्षों को आठ हफ़्ते का समय देते हुए कहा कि वो आपसी बातचीत से मध्यस्थता की कोशिश करें. 13 मार्च को मध्यस्थता की कार्रवाई शुरू हुई. मई में कोर्ट ने इसका समय बढ़ाकर 15 अगस्त तक कर दिया. मगर मध्यस्थता की कोशिशें कामयाब नहीं हुईं. 6 अगस्त से कोर्ट ने फाइनल दलीलें सुननी शुरू कीं. 16 अक्टूबर को कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा. इस मामले पर 40 दिन तक सुनवाई चली थी. बता दें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं.



अयोध्‍या में अर्धसैनिक बलों के 4,000 जवान तैनात
उधर फैसले को लेकर केंद्र (Central Government) ने सभी राज्यों से अलर्ट (Alert) रहने और संवेदनशील क्षेत्रों (Sensitive Areas) में सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है. गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) ने उत्तर प्रदेश और खासतौर पर अयोध्या में सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बलों (CPMF) के 4,000 जवानों को भेज दिया है.





रेलवे पुलिस ने रद्द कर दीं सभी कर्मियों की छुट्टियां

रेलवे पुलिस (Railway Police) ने भी सभी कर्मियों की छुट्टियां (Leaves) रद्द कर दी हैं. उन्हें ट्रेनों (Trains) की सुरक्षा में तैनात रहने के निर्देश दिए गए हैं. प्लेटफॉर्म्स, रेलवे स्टेशनों, यार्ड, पार्किंग स्थल, पुलों और सुरंगों के साथ-साथ उत्पादन इकाइयों व कार्यशालाओं में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. दिल्ली (Delhi), महाराष्ट्र (Maharashtra) और उत्तर प्रदेश (UP) के स्टेशनों समेत 78 प्रमुख स्टेशनों की पहचान की गई है, जहां अधिक संख्या में यात्री आते हैं. यहां आरपीएफ (RPF) कर्मियों की मौजूदगी बढ़ाई गई है. परामर्श में पूर्व के उस आदेश को भी रद्द किया गया है, जिसमें स्टेशनों को बिजली बचाने के लिए करीब 30 प्रतिशत रोशनी कम रखने की अनुमति दी गई थी.



2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनाया था फैसला

बता दें अयोध्या जमीन विवाद पर तीन जजों की खंडपीठ, जस्टिस एस यू खान, जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस डी वी शर्मा ने 2:1 की मेजॉरिटी से फैसला सुनाया. कोर्ट ने 2.77 एकड़ की विवादित जमीन में रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और UP सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, तीनों का मालिकाना हक माना. इन तीनों के बीच जमीन का बंटवारा करने का निर्देश दिया. एक तिहाई रामलला को. एक तिहाई निर्मोही अखाड़ा को. और एक तिहाई मुस्लिम पक्ष को. जहां बाबरी मस्जिद का बीच वाला गुंबद हुआ करता था, वो जगह रामलला को मिली. राम चबूतरा और सीता रसोई निर्मोही अखाड़ा को दी गई. सभी पक्षों ने इस फैसले के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में अपील की और इस पर स्टे लग गया.



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