सरकारी बंगले पर वार-पलटवार: योगी सरकार ने पूछा- बंगले में खर्च हुए पैसे कहां से आए?

यूपी सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने पूछा कि आखिर बंगले में दीवार तोड़ने की जरूरत क्यों पड़ी? उसके पीछे ऐसा क्या था? जिसे लेकर जाने के लिए दीवार तोड़नी पड़ी.

News18 Uttar Pradesh
Updated: June 13, 2018, 3:15 PM IST
सरकारी बंगले पर वार-पलटवार: योगी सरकार ने पूछा- बंगले में खर्च हुए पैसे कहां से आए?
बीजेपी नेता और यूपी के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह (File Photo)
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Updated: June 13, 2018, 3:15 PM IST
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सरकारी बंगले खाली करने के मामले में सियासत गरमा गई है. मामले में अखिलेश यादव ने बुधवार को सीधे योगी सरकार पर बदले की राजनीति का आरोप लगाया. इस पर योगी सरकार ने पलटवार किया है. सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने अखिलेश यादव की प्रेस कांफ्रेंस को 'खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे' करार दिया है.  अखिलेश यादव की प्रेस कांफ्रेंस के बाद ​सिद्धार्थनाथ सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस कर उनके आरोपों का जवाब दिया. सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं, उनकी भाषा संयमित होनी चाहिए थी. सरकारी बंगला छोड़ने का आदेश सुप्रीम कोर्ट का था. सुप्रीम कोर्ट की सभी को इज्जत करनी चाहिए. उनकी प्रेस कांफ्रेंस पर 'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे' की कहावत लागू होती है.

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सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि अखिलेश के बंगला खाली करने के बाद कोई आईएएस अफसर वहां नहीं गया था. उन्होंने कहा कि अखिलेश ने खुद कहा है कि हमने बंगले में बहुत खर्च किया. उस पर इनकम टैक्स विभाग को देना चाहिए. उन्होंने कहा कि अखिलेश को इनकम टैक्स विभाग को हिसाब देना चाहिए कि इतना पैसा कहां से आया. आखिर बंगले में दीवार तोड़ने की जरूरत क्यों पड़ी? उसके पीछे ऐसा क्या था? जिसे लेकर जाने के लिए दीवार तोड़नी पड़ी. सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि मामले में गवर्नर राम नाईक की चिट्ठी आई है, जल्द ही उस पर निर्णय लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि ये किसी की निजी संपत्ति नहीं है.

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बता दें उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्रियों ने सरकारी बंगले खाली कर दिए हैं. लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खाली किए बंगले को लेकर रार थमने का नाम नहीं ले रही है. बंगला खाली करने के बाद अखिलेश यादव पर तोड़फोड़ और क्षतिग्रस्त करने के आरोप लगे. मामले में राज्यपाल राम नाईक ने भी सीएम योगी को पत्र लिखकर मामले को गंभीर माना और जांच के लिए कहा है. उधर मामले में बुधवार को सपा मुखिया अखिलेश यादव ने प्रेस कांफ्रेंस कर सफाई दी, साथ ही योगी सरकार पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगाया. यही नहीं अखिलेश यादव ने इशारों-इशारों में सरकारी अधिकारियों की खिंचाई भी की.

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प्रेस कांफ्रेंस में अखिलेश यादव टोटी लेकर पहुंचे. उन्होंने कहा कि बंगले को मैंने अपनी पसंद से बनवाया था. आज भी वहां पर जो वुडेन फ्लोरिंग लगी है, मंदिर है और अन्य चीजें हैं, मैंने अपने पैसे से लगवाई हैं. अखिलेश यादव ने कहा कि उनके द्वारा बंगला खाली करने के बाद सीएम योगी के ओएसडी अभिषेक और आईएएस अफसर मृत्युंजय नारायण वहां गए थे. मैं पूछना चाहता हूं कि वह क्या करने गए थे. ये लोग फोटोग्राफर लेकर गए थे.

अखिलेश ने कहा कि बंगले में वुडेन फ्लोरिंग के साथ ही तमाम चीजें अभी भी जस की तस हैं. ​एक टूटे हुए कोने की तस्वीर इस तरह से खींची गई कि लगे कि पूरा बंगला ही खराब कर दिया गया. उन्होंने कहा कि लोग प्यार में अंधे होते होंगे पर जलन और नफरत में अंधे होते हैं ये मैंने देखा है.  अखिलेश ने कहा कि टोटी कौन तोड़ता है? अफीमची या भांग खाने वाला. वह अफीमची कौन था, जो टोटी तोड़ने गया. सपा मुखिया ने कहा कि जो मेरी चीज थी, वह मैं लेकर गया. अगर सरकारी दस्तावेज में ये सभी चीजें दर्ज हैं तो मुझे दिखाएं. अखिलेश यादव ने इसे गोरखपुर, फूलपुर और कैराना की हार का बदला बताया.

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