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भ्रष्टाचार पर योगी सरकार का कड़ा प्रहार, यूपी में 15 दिन के अंदर 10 से ज्यादा अफसर भेजे गए जेल

Ajayendra Rajan | News18 Uttar Pradesh
Updated: November 20, 2019, 7:35 PM IST
भ्रष्टाचार पर योगी सरकार का कड़ा प्रहार, यूपी में 15 दिन के अंदर 10 से ज्यादा अफसर भेजे गए जेल
उत्तर प्रदेश में पिछले 15 दिनों में प्रदेश के कई मामलों में 10 से ज्यादा अफसरों को जेल भेजा जा चुका है.

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में भ्रष्टाचार (Corruption) के खिलाफ योगी सरकार (Yogi Government) की ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी है.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में भ्रष्टाचार (Corruption) के खिलाफ योगी सरकार (Yogi Government) की ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी है. पिछले 15 दिन की बात कर लें तो भ्रष्टाचार के आरोपी 10 से ज्यादा अफसरों को जेल भेजा जा चुका है, वहीं कई अन्य के खिलाफ जांच भी शुरू हो गई है. चाहे वह यूपीपीसीएल के पीएम घोटाले (UPPCL PF Scam) में मुख्य अभियुक्त पूर्व एमडी एपी मिश्रा समेत 5 लोगों की गिरफ्तारी हो, गाजियाबाद (Ghaziabad) में रेड के दौरान करीब 70 लाख का गबन की आरोपी एसओ लक्ष्मी सिंह चौहान (Lakshmi Singh Chouhan) को जेल भेजा जाना हो या होमगार्ड घोटाले (Homeguard Scam) में बुधवार को 5 लोगों की गिरफ्तारी हो. इसके अलावा दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस-वे घोटाले में भी सरकार की तरफ से दो आईएएस अफसरों समेत 6 लोगों के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं.

पीएफ घोटाले में अब तक 5 की गिरफ्तारी
बता दें उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) में कर्मचारियों की भविष्य निधि (PF) को प्राइवेट कंपनी में निवेश करने के मामले में ईओडब्ल्यू पूर्व एमडी एपी मिश्रा, निदेशक (वित्त) सुधांशु द्विवेदी, सचिव प्रवीण कुमार गुप्ता, प्रवीण का बेटा अभिनव गुप्ता और ब्रोकर दोस्त आशीष चौधरी को गिरफ्तार कर चुकी है. इसके अलावा तीन और लोगों की जल्द ही गिरफ्तारी करने का दावा किया जा रहा है. मामले में सभी लोग 29 नवम्बर तक न्यायिक हिरासत में जेल हैं. उधर ईओडब्ल्यू इनकी जमानत का विरोध करने के लिए दस्तावेज मजबूत करने में जुटी है. इसी क्रम में कुछ अफसरों को गवाह बनाया जा सकता है.

70 लाख गबन करने वाली एसओ लक्ष्मी सिंह चौहान

वहीं एक रेड के दौरान गाजियाबाद में पुलिस अधिकारी लक्ष्मी सिंह चौहान ने अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर जब्त की किए गए करीब 70 लाख रुपए का गबन किया. मामले में जांच के बाद लक्ष्मी सिंह चौहान व पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज हुआ और उसके बाद कई दिनों की फरारी के बाद आखिरकार लक्ष्मी सिंह चौहान ने मेरठ में सरेंडर कर दिया. वह अभी भी जेल में हैं.

होमगार्ड वेतन घोटाला में सुबूतों को नष्ट करने के मामले में 5 गिरफ्तार
वहीं गौतमबुद्ध नगर (Gautambuddh Nagar) में होमगार्डों (Homeguards) की कथित तौर पर फर्जी हाजिरी लगाकर सरकार को करोड़ों रुपये की चपत लगाने का मामला सामने आया था. इसके बाद इस मामले में शासन स्तर की एक समिति ने जांच शुरू कर दी. मामले में बुधवार (20 सितंबर) को घोटालेबाजों द्वारा सबूतों (Evidence) को नष्ट करने के आरोप में 5 लोगों की गिरफ़्तारी की गई है. मामले में डीजीपी ओपी सिंह (DGP OP Singh) ने कहा कि सुनियोजित तरीके से सुबूतों को नष्ट करने के लिए आग लगाई गई. मामले में गुजरात की फॉरेंसिक टीम बुधवार को जांच के लिए नोएडा के सूरजपुर होमगार्ड कमान्डेंट ऑफिस पहुंच रही है.
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डीजीपी ने बताया कि होमगार्ड मस्टररोल घोटाले में बड़ी कार्रवाई की गई है. 24 घंटे में तत्कालीन कमांडेंट होमगार्ड राज नारायण चौरसिया, एडीसी सतीश, प्लाटून कमांडर शैलेन्द्र, मोंटू और सतवीर की गिरफ़्तारी की गई है. बता दें मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे. जिसके बाद 24 घंटे के भीतर पांच गिरफ़्तारी की गई है. आने वाले समय में और भी गिरफ़्तारी हो सकती है.

दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे में घोटाले की जांच में फंसे दो आईएएस
इससे पहले मंगलवार को कैबिनेट बैठक के दौरान दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे परियोजना (Delhi Meerut Expressway Project) में गड़बड़ी के लिए योगी सरकार ने दो आईएएस अफसरों (2 IAS Officers) गाजियाबाद के पूर्व डीएम विमल कुमार शर्मा (Vimal Kumar Sharma) और निधि केसरवानी (Nidhi Kesarwani) सहित 6 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए. मामले में योगी सरकार के प्रवक्ता और प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि यह केंद्र और प्रदेश दोनों सरकार की महत्वपूर्ण योजना थी. जिन अधिकारियों ने घपला किया है, उनके खिलाफ सरकार कार्रवाई कर रही है.

यूपी में रहना है तो ईमानदारी से काम करना होगा नहीं तो जेल जाना पड़ेगा: श्रीकांत शर्मा
श्रीकांत शर्मा ने कहा कि मेरठ के तत्कालीन मंडलायुक्त प्रभात कुमार ने इसमें सीबीआई जांच की भी संस्तुति की है. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ेगी तो सीबीआई जांच भी कराएंगे. 2 आईएएस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश हुआ है. हम पूरे मसले की जांच करा रहे हैं, जिसको यूपी में रहना है, उसको ईमानदारी से काम करना होगा नहीं तो जेल जाना पड़ेगा. बता दें कि गाजियाबाद के ग्राम डासना, रसूलपुर, सिकरोड, कुशलिया और नाहल में अधिग्रहित भूमि के संबंध में शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिसकी तत्कालीन कमिश्नर, मेरठ प्रभात कुमार द्वारा जांच की गई थी.

इनपुट: अजीत सिंह

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First published: November 20, 2019, 5:14 PM IST
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