JE, AES से लड़ाई में रंग ला रही योगी सरकार की कार्ययोजना, 2016 के मुकाबले मृत्यु दर में चार गुना कमी

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जापानी इंसेफलाइटिस (JE) और एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) के मरीजों और इस बीमारी से मरने वालों की संख्या में 2016 के मुकाबले चार गुना तक कमी आई है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: June 20, 2019, 8:16 AM IST
JE, AES से लड़ाई में रंग ला रही योगी सरकार की कार्ययोजना, 2016 के मुकाबले मृत्यु दर में चार गुना कमी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फाइल फोटो
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Updated: June 20, 2019, 8:16 AM IST
बिहार के मुजफ्फरपुर में जहां चमकी बुखार यानी एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) से बच्चों की मौत से पूरे देश में हाहाकार मचा है, वहीं यूपी के योगी सरकार के प्रयासों से पूर्वांचल का काल कहे जाने वाली इस बीमारी से लड़ाई में अभूतपूर्व सफलता मिली है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जापानी इंसेफलाइटिस (JE) और एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) के मरीजों और इस बीमारी से मरने वालों की संख्या में 2016 के मुकाबले चार गुना तक कमी आई है.

2019 में एइएस के 440 मरीज, 16 मौत

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2016 में यूपी के पूर्वांचल समेत अन्य इलाकों में में एइएस के 3,911 मरीज मिले थे. 17 जून 2018 में यह आंकड़ा 1,050 रहा जबकि 17 जून 2019 तक यह संख्या 440 तक सिमट गई. एइएस से 2018 में 98 मौतें हुई थी.17 जून 2019 तक इस बीमारी से 16 मौतें दर्ज की गई हैं.

2019 में जेई के 25 मामले, एक मौत

प्रदेश में 2016 में जेई के 442 मामले पाए गए थे, जिनमें 74 की मौत हो गई थी. वहीं, 2018 में जेई केवल 64 मामले पाए गए, जिनमें से तीन की मौत हुई, जबकि 17 जून 2019 तक 25 मामले पाए गए, जिनमें से एक व्यक्ति की मौत हुई.

सरकार की पहल रंग लाई

2017 में योगी सरकार के शपथ लेने के बाद एइएस और जेई से निपटने के लिए एक फुलप्रूफ योजना बनाई गई. सरकार ने इसके लिए एक विशेष गाइडलाइन बनाई. इससे पहले एइएस औए जेई की रोकथाम के लिए कोई गाइडलाइन नहीं थी. सरकार ने इस लड़ाई के लिए 3.5 लाख लोगों को प्रशिक्षित किया. इनमें एसीएमओ, एएनएम, आशा, ग्राम प्रधान, शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, बीएसए, एबीएसए, सीडीपीओ और एंबुलेंस स्टाफ भी शामिल था.
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दस्तक अभियान और टीकाकरण पर जोर

सरकार के निर्देश पर स्वास्थ्य महकमे ने दस्तक अभियान के तहत विशेष संचारी रोक नियंत्रण पखवारों का आयोजन किया. साफ-सफाई व टीकाकरण पर जोर दिया गया. सरकार ने बीते दो साल में लक्ष्य से ज्यादा वैक्सिनेशन का काम किया. अस्पतालों में सुविधाओं को भी बढ़ाया गया. पीआईसीयू व मिनी पीआईसीयू को अपग्रेड किया गया. जेई और एइएस प्रभावित 19 जिलों के जिला अस्पतालों में 19 सेंटिनल लैबरेटरी चालू की गई.

सूबे के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि सीएम के निर्देश पर कार्ययोजना बनाकर नियमित मॉनिटरिंग की गई और प्राथमिक स्तर पर ही इलाज के बेहतर उपाय किए गए. उन्होंने कहा कि यह अभियान इसके उन्मूलन तक जारी रहेगा.

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First published: June 20, 2019, 8:16 AM IST
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