आजम खान के बेटे अब्दुल्ला के 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की तैयारी में योगी सरकार
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आजम खान के बेटे अब्दुल्ला के 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की तैयारी में योगी सरकार
अपने पिता आजम खान के साथ अब्दुला खान. फाइल फोटो.

मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) रह चुके एसवाई कुरैशी ने 3 कारण बताये जिसके आधार पर कोई जनप्रतिनिधि अपनी उम्‍मीदवारी गंवा सकता है.

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लखनऊ. योगी सरकार (Yogi Government) सपा सांसद आजम खान (Azam Khan) को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. सरकार कुछ ऐसी व्यवस्था करने जा रही है, जिससे आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम अगले 6 सालों तक चुनाव ही नहीं लड़ पायेंगे. अब्‍दुल्‍ला आजम को 72 महीनों तक चुनाव लड़ने से डिबार करने की योजना है.

इस बात का खुलासा शासन के सूत्रों ने न्यूज़ 18 पर किया है. जानकारी के मुताबिक, पिछले साल दिसंबर में स्वार सीट से चुनाव जीतने वाले अब्दुल्ला आजम के निर्वाचन को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था, तभी से इसकी तैयारी की जा रही थी. विधानसभा के सूत्रों ने बताया कि काफी पहले ही इसके लिए चुनाव आयोग को चिट्ठी भेजी गयी थी, लेकिन चुनाव आयोग ने यह कहते हुए उसे वापस भेज दिया कि इसका फैसला उसके कार्यक्षेत्र में नहीं आता है. लिहाजा राज्य सरकार ने अपने स्तर पर ही इसकी तैयारी शुरू कर दी है. विधानसभा सचिवालय और शासन में इसकी तैयारी तेज हो गयी.

कानूनी सलाह
इस मामले पर विधिक सलाह लेने के लिए न्याय विभाग को फाइल भेजी गयी. सूत्रों ने बताया कि न्याय विभाग इस पूरे मामले का अध्ययन कर रहा है. कोशिश ये की जा रही है कि इस मैटर को लेकर कोई कानूनी मुश्किल सरकार के सामने न खड़ी हो. यानी काम तो हो लेकिन कोई ये अंगुली न उठा सके कि नियमों की अनदेखी की गयी. इसीलिए न्याय विभाग से परामर्श लिया जा रहा है. हालांकि, इस मामले में प्रमुख सचिव (न्याय) जेपी सिंह ने बताया कि उनके दफ्तर में ऐसी कोई फाइल नहीं आई है.
बता दें कि इस मामले में पहले ही रामपुर के आकाश सक्सेना ने विधानसभा सचिवालय को पत्र लिखकर अब्दुल्ला आजम को 6 साल के लिए चुनाव से डिबार करने की मांग कर चुके हैं. उनकी चिट्ठी को आगे बढ़ाये जाने का जवाबी पत्र आकाश सक्सेना को भेजा भी गया था. आकाश सक्सेना ने इसकी पुष्टि की है. आकाश वहीं शख्स हैं जो आजम खान के खिलाफ कानूनी जंग लड़ रहे हैं. इस मामले से जुड़े पत्राचार की कॉपी न्यूज़ 18 के पास मौजूद है.



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मुख्य चुनाव आयुक्त रह चुके एसवाई कुरैशी ने तीन कारण बताये जिसके आधार पर कोई जनप्रतिनिधि अपनी उम्मीदवारी गंवा सकता है या फिर उसे चुनाव से डिबार किया जा सकता है. पहला तो ये कि जनप्रतिनिधि ऑफिस ऑफ प्राफिट में आता हो. दूसरा यह कि उसे किसी मामले में सजा हुई हो तो उसे 6 साल के लिए डिबार किया जा सकता है और तीसरा ये कि तय समय सीमा के भीतर चुनावी खर्चे का ब्यौरा न दिया हो तो उसे तीन साल के लिए डिबार किया जा सकता है. बता दें कि आपराधिक मामले में दो साल से ज्यादा की सजा होने पर 6 साल के लिए चुनाव से डिबार कर दिया जाता है.
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