योगी सरकार ने कहा- UP में पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने का कोई इरादा नहीं

विधान परिषद में लिखित जवाब देते हुए वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि पुरानी पेंशन व्यवस्था को लागू करने का सरकार का कोई इरादा नहीं है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 25, 2019, 12:44 PM IST
योगी सरकार ने कहा- UP में पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने का कोई इरादा नहीं
पुरानी पेंशन बहाली के लिए कर्मचारी करते रहे हैं आंदोलन
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Updated: July 25, 2019, 12:44 PM IST
पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर रहे राज्य कर्मचारी संगठनों को सूबे की योगी सरकार ने दो टूक कह दिया है कि यूपी में इस व्यवस्था को फिर से लागू करने का कोई इरादा नहीं है. विधान परिषद में लिखित जवाब देते हुए वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि पुरानी पेंशन व्यवस्था को लागू करने का सरकार का कोई इरादा नहीं है.

एनपीएस के लिए योगी सरकार ने किया है 5004 करोड़ का प्रावधान

गौरतलब है कि मंगलवार को पेश किए गए अनुपूरक बजट में राज्य कर्मचारियों से किए अपने वादे को निभाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) के लिए 5004.03 करोड़ का प्रावधान किया है.

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पुरानी पेंशन व्यवस्था को लेकर सरकार ने सदन में दिया लिखित जवाब


वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2019-20 के लिए 13594.87 करोड़ रुपए का अनुपूरक बजट में राज्य कर्मचारियों का एनपीएस अंशदान जमा कराने के लिए 5004.03 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है. दरअसल, योगी सरकार ने 6 लाख से अधिक राज्य कर्मचारियों और अधिकारियों की नई पेंशन योजना की वर्षों से बरकरार रकम व्याज सहित देने का वादा पूरा किया है. इसके लिए अनुपूरक बजट में एक तिहाई से भी ज्यादा रकम की व्यवस्था की है. साथ ही आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय वृद्धि के लिए भी 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

कई सालों से कर रहे पुरानी पेंशन बहाली की मांग

बता दें उत्तर प्रदेश के सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली की मांग को लेकर कई बार आंदोलन किया है. अभी फ़रवरी में ही पेंशन बहाली मंच की तरफ से अनशन की चेतावनी दी गई थी, लेकिन सरकारके आश्वासन के बात उसे टाल दिया गया था. लेकिन अब सरकार के इस बयान के बाद एक बार फिर कर्मचारी आंदोलित हो सकते हैं.
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क्या थी पुरानी पेंशन व्यवस्था

- पुरानी पेंशन व्यवस्था का शेयर मार्केट से कोई संबंध नहीं था.

- पुरानी पेंशन में हर साल डीए जोड़ा जाता था.

- पुरानी पेंशन व्यवस्था में गारंटी थी कि कर्मचारी या अधिकारी की आखिरी सैलरी का लगभग आधा उसे पेंशन के तौर पर मिलेगा.

- अगर किसी की आखिरी सैलरी 50 हजार है तो उसे 25 हजार पेंशन मिलती थी. इसके अलावा हर साल मिलने वाला डीए और वेतन आयोग के तहत वृद्धि की सुविधा थी.

- नौकरी करने वाले व्यक्ति का जीपीएफ अकाउंट खोला जाता था.

- जीपीएफ एकाउंट में कर्मचारी के मूल वेतन का 10 फ़ीसदी कटौती करके जमा किया जाता था.

- जब वह रिटायर होता था तो उसे जीपीएफ में जमा कुल राशि का भुगतान होता था.

- सरकार की तरफ से आजीवन पेंशन मिलती थी.

क्या है नई पेंशन व्यवस्था?

- 1 अप्रैल 2005 से लागू हुई न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस)

- न्यू पेंशन स्कीम एक म्‍यूचुअल फंड की तरह है. ये शेयर मार्केट पर आधारित व्यवस्था है.

- पुरानी पेंशन की तरह इसमेें पेंशन में हर साल डीए नहीं जोड़ा जाता.

- कोई गारंटी नहीं है कि कर्मचारी या अधिकारी की आखिरी सैलरी का लगभग आधा ही उसे पेंशन के तौर पर मिले.

- एनपीएस के तहत जो टोटल अमाउंट है, उसका 40 प्रतिशत शेयर मार्केट में लगाया जाता है.

- कर्मचारी या अधिकारी जिस दिन वह रिटायर होता है, उस दिन जैसा शेयर मार्केट होगा, उस हिसाब से उसे 60 प्रतिशत राशि मिलेगी. बाकी के 40 प्रतिशत के लिए उसे पेंशन प्लान लेना होगा.

- पेंशन प्लान के आधार पर उसकी पेंशन निर्धारित होगी.

- नई व्यवस्था में कर्मचारी का जीपीएफ एकाउंट बंद कर दिया गया है.

(इनपुट-अलाउद्दीन अयूब)

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First published: July 25, 2019, 12:31 PM IST
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