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UP में ग्राम विकास अधिकारी की भर्ती पर संकट, योगी के मंत्री ने की रद्द करने की मांग, जांच शुरू

News18 Uttar Pradesh
Updated: September 21, 2019, 1:56 PM IST
UP में ग्राम विकास अधिकारी की भर्ती पर संकट, योगी के मंत्री ने की रद्द करने की मांग, जांच शुरू
वीडीओ भर्ती के संबंध में कैबिनेट मंत्री मोती सिंह कहते हैं कि हमारा ये दायित्व है कि अगर नियुक्ति में गड़बड़ी की शिकायतें हैं तो उन्हें दूर कराया जाए.

उत्तर प्रदेश में 1953 पदों पर की गई ग्राम विकास अधिकारी (VDO) भर्ती मामले में ग्राम्य विकास मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह (Rajendra Pratap Singh) ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) पर धांधली का आरोप लगाते हुए परीक्षा को निरस्त करने की मांग की है.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार (Yogi Government) ने ढाई साल पूरे कर लिए है. ऐसे मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने इंटरव्यू में दावा किया कि आर्थिक सुस्ती का असर भले ही देश और दुनिया में पड़ रहा हो मगर यूपी में इसका कोई असर नहीं है. यूपी सरकार आने वाले दिनों में 2 लाख लोगों को रोजगार देने जा रही है. लेकिन यूपी के भ्रष्ट अधिकारियों का रवैया स्थिति कुछ और ही बयां कर रहा है. यूपी में पिछले कुछ समय से कई भर्तियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और वे अदालतों में पहुंच गईं. स्थिति ये है कि अभ्यर्थियों के अलावा अब तो खुद प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री  राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह (Cabinet Minister Rajendra Pratap Singh) ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) पर परीक्षा में धांधली का आरोप लगाते हुए परीक्षा को निरस्त करने की मांग की है.

भर्ती के दौरान 136 मुन्नाभाई के खिलाफ एफआईआर

दरअसल मामला 1953 पदों पर की गई ग्राम विकास अधिकारी (VDO) भर्ती का है. इसका परीक्षाफल 26 अगस्त 2019 को घोषित हुआ था, जिसमें समाज कल्याण विभाग के 362, पंचायती राज अधिकारी के 1527 व समाज कल्याण पर्यवेक्षक के 64 पदों पर भर्तियां की गई थीं. रिजल्ट घोषित होने से 2 दिन पूर्व आयोग के अध्यक्ष अरुण सिन्हा के अनुसार 24 अगस्त को 136 मुन्ना भाई को चिन्हित कर परीक्षा परिणाम ने बाहर किया गया. आयोग के अनुसचिव राम नरेश प्रजापति द्वारा 31 अगस्त को इन 136 लोगों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420, 468, 471, 477a में राजधानी लखनऊ के विभूति खंड थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया. इन 136 लोगों को हटाकर 26 अगस्त को परीक्षा फल घोषित किया गया था. लेकिन अब ग्राम विकास मंत्री ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित ग्राम पंचायत अधिकारी की भर्ती के परीक्षाफल पर सवाल उठा दिए हैं. उन्होंने परिणाम निरस्त करने की मांग करके भ्रष्ट अधिकारियों को आड़े हाथों लिया है.

सीएम योगी को ग्राम विकास मंत्री ने भेजा है पत्र

ग्राम विकास मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा गया है कि ग्राम पंचायत अधिकारी के 1953 पदों पर गत 28 अगस्त को परिणाम जारी हुए हैं, जिसमें लगभग 14 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा फॉर्म भरा था. 9.5 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित हुए थे, जिसकी लिखित परीक्षा 22 व 23 दिसंबर को 16 जनपदों के 572 केंद्रों पर दो-दो पालियों में आयोजित की गई थी. आयोग द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा में ओएमआर शीट की 3 प्रतियां तकनीकी संस्था के माध्यम से तैयार कराई गई थीं. इसके संचालन कार्य के लिए नामित तकनीकी संस्था द्वारा आयोग मुख्यालय में मूल्यांकन हेतु लाया जाता था.

लखनऊ में पकड़ी गई गड़बड़ी

ओएमआर शीट की दूसरी कॉपी संबंधित जनपद के कोषागार में परीक्षा के दिन ही सुरक्षित जमा कर दी गई थी. लेकिन ग्राम विकास मंत्री ने लखनऊ जनपद के 2 परीक्षार्थियों की कॉपियों में गड़बड़ी के साक्ष्य दिए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि 2 अभ्यर्थियों का नाम एक नमूना भर है. इन नामों से इस तथ्य को भी नकारा नहीं जा सकता कि आयोग द्वारा सही परीक्षण नहीं कराया गया है व आयोग में जमकर भ्रष्टाचार अधिकारी द्वारा किया गया है.
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मोती सिंह द्वारा यह भी आशंका भी व्यक्त की गई है कि धांधली में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की पूर्ण संलिप्तता है. आयोग के अधिकारियों के भ्रष्टाचार के कारण ही ऐसी भर्ती में इस प्रकार की गड़बड़ियां होती हैं. वही दूसरी ओर आयोग के अध्यक्ष अरुण सिन्हा ने कहा कि मंत्री जी के पत्र पर दो सदस्य कमेटी का गठन कर दिया गया है. 136 अभ्यर्थियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हो गया है, साथ ही दोबारा से रिजल्ट की स्क्रीनिंग भी की जा रही है. किसी भी दशा में होनहार बच्चों के साथ अन्याय नहीं होगा. जो भी दागी या मुन्ना भाई परीक्षा में सम्मिलित होकर भ्रष्टाचार में शामिल थे, ऐसे अभ्यर्थी व कर्मचारियों को चिन्हित कर लिया गया है या किया जा रहा है. आयोग किसी भी दशा में भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेगा. मामले में मंत्री मोती सिंह कहते हैं कि हमारा ये दायित्व है कि अगर नियुक्ति में गड़बड़ी की शिकायतें हैं तो उन्हें दूर कराया जाए.

(रिपोर्ट: प्रशांत पांडेय)

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First published: September 21, 2019, 1:54 PM IST
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