मथुरा के मंदिर-मस्जिद विवाद पर बोले जिलानी, राजनीति करने के लिए उठाया जा रहा 45 साल पुराना मुद्दा

45 साल पुराने डेड ईशु पर सिर्फ राजनीति करना मकसद
45 साल पुराने डेड ईशु पर सिर्फ राजनीति करना मकसद

बाबरी मस्जिद मामले के जानकारी वकील जफरयाब जिलानी (Zafaryab Jilani) ने कहा कि क्योंकि अब अयोध्या (Ayodhya) का विवाद खत्म हो गया है. लिहाजा अब कभी काशी (Kashi) की बात की जाती है तो कभी मथुरा की.

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  • Last Updated: September 27, 2020, 5:36 PM IST
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लखनऊ/मथुरा. अयोध्या के बाद मथुरा (Mathura) में भी अब श्री कृष्ण जन्मभूमि परिसर के पास में स्थित शाही मस्जिद को वहां से हटाने की मांग तेज होने लगी है. वकील रंजना अग्निहोत्री ने मथुरा के डिस्ट्रिक्ट जज के पास एक याचिका लगाकर इस बात को कहा है कि यह शाही मस्जिद श्री कृष्ण जन्मभूमि परिसर का ही हिस्सा है. लिहाजा इसे यहां से हटाया जाना चाहिए और ये जगह मंदिर को सौंपी जानी चाहिए. इस पर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई हैं. इस मसले पर वरिष्ठ वकील और अयोध्या में बाबरी मस्जिद की लंबे समय तक पैरोकारी करने वाले जफरयाब जिलानी (Zafaryab Jilani) कहते हैं कि यह मुद्दा एक डेड ईश्यू है, जिसे एक बार फिर उठाया जा रहा है.

जिलानी ने कहा कि मैं इस मुद्दे को डेड इसलिए कहता हूं, क्योंकि 1951 के बाद मंदिर ट्रस्ट और मस्जिद ट्रस्ट के बीच एक कॉम्प्रोमाइज हुआ था और इस कंप्रोमाइज में यह कहा गया था कि मंदिर परिसर, मस्जिद परिसर से बिल्कुल अलग है और भविष्य में मंदिर परिसर के लोग मस्जिद परिसर पर किसी तरह की कोई दावेदारी नहीं कर सकते और ना ही मस्जिद परिसर के लोग मंदिर परिसर के किसी हिस्से पर. उन्होंने कहा कि इसी कंप्रोमाइज को अभी तक फॉलो किया जा रहा था.

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लेकिन रंजना अग्निहोत्री ने इस याचिका को लगाकर उस कंप्रोमाइज को चैलेंज किया है. जिलानी ने कहा कि अचानक 40-45 साल के बाद इस तरह के ईशु को उठाया जाना समझ से परे है. उन्होंने कहा कि रंजना अग्निहोत्री ना ही वहां की रहने वाली हैं और ना ही वह मंदिर की किसी अथॉरिटी से जुड़ी हैं. जफरयाब जिलानी ने कहा कि हमारे भारतीय संविधान में यह सभी को आजादी है कि वह कोर्ट जा सकते हैं.
राजनीतिक इच्छाशक्ति 

उन्होंने कहा कि सिविल जज के पास जब यह मामला पहुंचेगा तो जज साहब इस बात को भी देखेंगे कि कहीं यह मुद्दा 1991 "Place of Worship Act" से तो नहीं टकराता है. उन्होंने कहा के यह सब देखने के बाद जज साहब अगर हमको समन भेजेंगे तो हम उसका जवाब देंगे. जफरयाब जिलानी ने कहा के इस ईश्यू को अभी उठाया जाना, सिर्फ राजनीतिक इच्छाशक्ति को जताता है. उन्होंने कहा कि क्योंकि अब अयोध्या का विवाद खत्म हो गया है. लिहाजा अब कभी काशी की बात की जाती है तो कभी मथुरा की.

काशी के मुद्दे पर बहुत ज्यादा गुंजाइश नहीं बची
जफरयाब जिलानी ने कहा कि काशी में मंदिर मस्जिद का मसला 1991 से कोर्ट में पेंडिंग है और वहां यही ईश्यू है कि यह मामला चल सकता है या नहीं. इस मुद्दे में कोर्ट ने आधा मसला यह मान भी लिया है कि मस्जिद के ऊपर नहीं चल सकता. लेकिन अब काशी में मस्जिद के तहखाने की बात हो रही है, जो हाईकोर्ट में पेंडिंग है. अब काशी के मुद्दे पर बहुत ज्यादा कोई गुंजाइश बची नहीं लिहाजा अब मथुरा के मुद्दे पर दावा किया जा रहा है जो पूरी तरह से राजनीतिक है.
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