VIDEO: इस मंदिर में माथा टेके बगैर विंध्याचल धाम का दर्शन अधूरा

सुल्‍तानपुर में नवरात्र पर शायद ही कोई मन्दिर हो जहां देवी मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ न उमड़ती हो लेकिन सुल्‍तानपुर के लोहरामऊ में स्थित दुर्गा मंदिर में नवरात्र सूबे के विभिन्न इलाकों से आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.

Alim sheikh | ETV UP/Uttarakhand
Updated: October 20, 2015, 2:45 PM IST
Alim sheikh | ETV UP/Uttarakhand
Updated: October 20, 2015, 2:45 PM IST
सुल्‍तानपुर में नवरात्र पर शायद ही कोई मन्दिर हो जहां देवी मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ न उमड़ती हो लेकिन सुल्‍तानपुर के लोहरामऊ में स्थित दुर्गा मंदिर में नवरात्र सूबे के विभिन्न इलाकों से आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.

खास बात ये है कि यहां आकर लोग न केवल अपनी मनोकामनाएं पूरी करते हैं बल्कि जनेऊ और मुंडन जैसे संस्कार भी पूरे करते हैं. मान्यता तो यहां तक है कि इस धाम पर शीश झुकाए बगैर विंध्याचल धाम का दर्शन पूरा नही माना जाता. सैकड़ों साल पुराने इस मंदिर में नारियल और फूलमालाओं समेत पूड़ी, कड़ाही और चूड़ियां भी चढ़ाने की परम्परा रही है.

नगर से सात किमी दूर लखनऊ-वाराणसी हाइवे पर स्थित लोहरामऊ में सैकड़ों वर्षों से स्थापित मां दुर्गा का यह मंदिर केवल आस-पास के कई जिलों में ही नही सूबे के कई जिलों में खासा मशहूर है. वैसे तो सावन के महीने में यहां दस दिनों तक जबरदस्त मेला लगता है लेकिन नवरात्र में यहां का नजारा कुछ अलग ही रहता है. मंदिर के मुख्य पुजारी पं. राजेन्द्र प्रसाद मिश्र बताते हैं कि यहां मां दुर्गा स्वयं प्रकट हुई थीं. देवी मां के तीन रूपों का यहां दर्शन होता है.



मां दुर्गा के दर्शन करने और अपनी मुरादें पूरी करने के लिए सूबे के तमाम जिलों से पूरे नवरात्र भर श्रद्धालुओं का यहां तांता लगा रहता है. महिलाओं में इसका विशेष महत्व है. उनकी हर छोटी से छोटी मनोकामना यहां पूरी होती है. श्रद्धालु यहां नारियल और फूल मालाओं के साथ पूड़ी, कड़ाही और चूड़ियां चढाती हैं. इतना ही नही लोग यहां मुंडन, जनेऊ और वैवाहिक रस्मो रिवाज समेत तमाम संस्कार भी पूरे करते हैं.

इस ऐतिहासिक धाम की एक खास महत्ता यह है कि मिरजापुर में स्थित विंध्याचल धाम का दर्शन तभी पूरा माना जाता है जब भक्त यहां का दर्शन कर लेते हैं. यही वजह है कि विंध्याचल जाने और लौटने वाले लोग यहां का दर्शन करना नही भूलते.

नवरात्र के अंतिम दिन इस मंदिर पर खासी भीड़ जुटती है. पूरा दिन यहां यज्ञ और हवन होते रहते हैं. यहां आकर लोग तमाम कर्मकांड कर अपने तन-मन में छुपे रोग,शोक,भय,आशंका और मनोविकार दूर कर अपने को धन्य मानते हैं.

 
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