महोबाः बीटीसी प्रशिक्षुओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में जमकर किया हंगामा

बीटीसी अभ्यर्थियों का कहना है कि एनसीटी द्वारा निर्धारित न्यूनतम योग्यता के आधार पर प्राइमरी के बच्चों को पढ़ाने के लिए न्यूनतम योग्यता बीटीसी है, लेकिन सरकार ने गत 28 जून को संसोधन करते हुए प्राइमरी शिक्षा में बीएड डिप्लोमाधारियों को शामिल करने के आदेश कर दिया है


Updated: July 10, 2018, 10:50 PM IST

Updated: July 10, 2018, 10:50 PM IST
महोबा जिले में सैकड़ों बीटीसी प्रशिक्षुओं ने मंगलवार कोअपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में धरना दिया. कलेक्ट्रेट परिसर में सैकड़ों की संख्या में पहुंचे बीटीसी प्रशिक्षु छात्र-छात्राएं राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद अधिसूचना में संशोधन करके प्राथमिक शिक्षा शास्त्र में दो वर्षीय डिप्लोमाधारी अभ्यर्थियों को चयन में प्राथमिकता देने की मांग कर रहे हैं. छात्र इसके अलावा बीएड अभ्यर्थियों को प्राइमरी शिक्षा में जोड़ने का भी विरोध कर रहे थे. अभ्यर्थियों ने प्रधानमंत्री और एचआरडी मंत्रालय को संबोधित एक ज्ञापन डीएम महोबा को सौंपा है.

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रिपोर्ट के मुताबिक सैकड़ों की संख्या में कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर रहे बीटीसी अभ्यर्थियों का कहना है कि एनसीटी द्वारा निर्धारित न्यूनतम योग्यता के आधार पर प्राइमरी के बच्चों को पढ़ाने के लिए न्यूनतम योग्यता बीटीसी है, लेकिन सरकार ने गत 28 जून को संसोधन करते हुए प्राइमरी शिक्षा में बीएड डिप्लोमाधारियों को शामिल करने के आदेश कर दिया है.

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गौरतलब है वर्तमान में उत्तर प्रदेश में बीटीसी प्रशिक्षुओं की संख्या करीब 6 लाख 66 हजार है, अगर उसमें 18 लाख बीएड डिप्लोमाधारियों को जोड़ दिया जाएगा तो प्रदेश में प्रशिक्षुओं की संख्या 24 लाख 66 हजार हो जाएगी, जिससे बीटीसी प्रशिक्षुओं का हक छिन जाएगा. यही कारण है कि प्रशिक्षु प्राइमरी शिक्षा में बीएड डिप्लोमाधारियों को शामिल करने की बात का विरोध कर रहे है.

महोबा के डीएम बीटीसी प्रशिक्षुओं से मिले ज्ञापन को सरकार तक पहुंचाने की बात कही है. उन्होंने कहा कि चूंकि यह नीतिगत मामला है और इसका निस्तारण भी शासन स्तर से हो पाएगा.

(रिपोर्ट-मनोज झा, महोबा)
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