जानिए यूपी में बुंदेलखंड का ये जिला आखिर क्यों नहीं मना रहा रक्षाबंधन!

कहा जाता है कि रक्षा पर्व के दिन ही महोबा में हुए पृथ्वीराज चौहान के आक्रमण से रक्षाबंधन का पर्व नहीं मनाया जा सका.

Manoj Ojha | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 26, 2018, 5:59 PM IST
जानिए यूपी में बुंदेलखंड का ये जिला आखिर क्यों नहीं मना रहा रक्षाबंधन!
महोबा. File Photo
Manoj Ojha | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 26, 2018, 5:59 PM IST
रक्षाबंधन का पर्व आज पूरे देश में एक साथ मनाया जा रहा है. बहनें इस पर्व पर भाई की कलाई पर राखी बांधकर रक्षा का वचन ले रही हैं. लेकिन बुंदेलखंड के महोबा में आज रक्षाबंधन का पर्व नहीं मनाया जा रहा. कारण ये है कि यहां ऐतिहासिक परम्परा के चलते भाई-बहन का ये पर्व एक दिन बाद मनाया जाता है. इस दिन महोबा में ऐतिहासिक मेले का भी आयोजन होता है. साथ ही यहां के वीरों को याद करने के लिए भव्य शोभा यात्रा भी निकाली जाती है.

उत्तर प्रदेश के महोबा में सदियों से इस पर्व को एक दिन बाद मानाने की परंपरा है. इसके पीछे बहन भाई के प्रेम और ऐतिहासिक युद्ध की कहानी है. इतिहासकार शरद तिवारी बताते हैं कि महोबा का एक अपना गौरवशाली इतिहास है. यहां रक्षाबंधन एक दिन बाद मनाने की परंपरा 1182 ई. के चंदेल शासनकाल से चली आ रही है. दरअसल उस समय दिल्ली के शासक पृथ्वीराज चौहान ने महोबा पर हमला कर दिया था. उस समय महोबा में चंदेल शासक परमाल का राज था. जानकार बताते है कि जब पृथ्वीराज चौहान का आक्रमण महोबा में होने की खबर रानी चन्द्रावली को लगी तो उसने अपने मुंह बोले भाई आल्हा को राखी के वचन की याद दिलाई.

कहा जाता है कि रक्षा पर्व के दिन ही महोबा में हुए पृथ्वीराज चौहान के आक्रमण से रक्षाबंधन का पर्व नहीं मनाया जा सका. इस युद्ध मे महोबा की कई वीरांगनाओ ने अपने राजा की पुत्री चंद्रावल की रक्षा के लिए तलवार उठा ली थी. इस युद्ध के अगुआई राजा परमाल के सेनापति वीर आल्हा और ऊदल कर रहे थे. युद्ध महोबा के रक्षाबंधन के दिन ऐतिहासिक तालाब कीरत सागर के किनारे हुआ, जिसमें पृथ्वी राज चौहान को हार का सामना करना पड़ा था.

महोबियों ने अपनी जीत के बाद रक्षाबंधन पर्व को विजय पर्व के रूप में मनाया. युद्ध में जीत को लेकर अगले दिन रक्षाबंधन को विजय दिवस के रूप में मनाया गया और इसी ऐतिहासिक कीरतसागर के किनारे राजा परमाल द्वारा कजली महोत्सव के नाम से एक समारोह आयोजित किया गया, तब से वही प्रथा आज तक चली आ रही है.  शरद तिवारी बताते हैं कि महोबा में एक दिन के बाद बहने अपने भाइयों को राखी बांधती हैं और एक सप्ताह तक कजली महोत्सव मनाया जाता है. इस ऐतिहासिक पर्व के साथ ही 27 अगस्त से कजली मेले का भी शुभारम्भ हो जायेगा.

वहीं रक्षा बंधन में रक्षासूत्र बांधती बीए की छात्रा स्वाति बताती है कि हम इस दिन का बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं. हम अपने भाई की कलाई में राखी बांधकर उनसे अपने सुरक्षा का भरोसा लेते है और भाई हमे उपहार भी देते हैं. महोबा में रक्षाबंधन के दिन तो चंदेल शासक परमाल की पुत्री की रक्षा के लिए आल्हा ऊदल ने उन्हें अपनी बहन मानकर दिल्ली के शासक पृथ्वी राज से युद्ध किया था. इस युद्ध मे पृथ्वी राज चौहान को हार का सामना करना पड़ा था और महोबा में अगले दिन रक्षा बंधन मनाया गया था.

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