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निर्भय सिंह गुर्जर, वो दुर्दांत डकैत जिसे खुश करने के लिए प्रेमिकाएं पहनती थीं जींस-टॉप
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News18 Uttar Pradesh
Updated: January 26, 2020, 7:02 PM IST
निर्भय सिंह गुर्जर, वो दुर्दांत डकैत जिसे खुश करने के लिए प्रेमिकाएं पहनती थीं जींस-टॉप
कुछ ऐसी है निर्भय गुर्जन की कहानी

निर्भय गुर्जर लड़की और शराब का काफी शौकीन था. उसके साथ उसकी दो प्रेमिकाएं (Girlfriend) सरला और नीलम हमेशा रहती थीं. उसे खुश करने के लिए प्रेमिकाएं हमेशा जींस और टी-शर्ट पहनती थीं.

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जालौन. चम्बल में आतंक का पर्याय रह चुके दस्यु सम्राट का जालौन में आतंक चरम पर था. हत्या, अपहरण, लूट, डकैती मशहूर निर्भय सिंह गुर्जर ने अपने जीवन का अधिकांश समय जालौन में ही बिताया है. निर्भय गुर्जर के खिलाफ अपहरण और हत्‍या के 200 से अधिक मामले पुलिस थानों में दर्ज थे. पुलिस के अनुसार, निर्भय का गैंग फिरौती के लिए अपहरण के मामलों में सक्रिय था. वह लंबे समय से पुलिस को चकमा देता आया था. इसके साथ ही वह जंगल में पत्रकारों को बुलाकर अक्‍सर इंटरव्यू भी दिया करता था.

सपा नेताओं को कहता था भाई
समय के साथ-साथ दस्‍यु निर्भय गुर्जर का खौफ जा रहा था. बताया जाता है कि इसी दौरान उसने समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेताओं को अपना भाई तक कह डाला था. निर्भय ने यहां तक कह दिया था कि सपा उसे चुनाव लड़ने के लिए टिकट दे सकती है. इसके बाद से निर्भय के सफाए का अभियान तेज हो गया. वर्ष 2005 में औरया के अजीतमल के पास चंबल में निर्भय को मार गिराया था.

छोटी-मोटी चोरी से की थी शुरुआत

डकैत निर्भय गूजर का जन्म 1961 में ग्राम गंगदासपुर थाना अयाना, जनपद-इटावा के एक साधारण परिवार में हुआ. इसके पिता मान सिंह के पास 7-8 बीघा जमीन थी, जिसमें सिंचाई का साधन नहीं था. इस कारण पैदावार भी अच्छी नहीं होती थी. माता पिता के अलावा इसके परिवार में 5 बहने व एक छोटा भाई भी है. जमीन व आमदनी कम और परिवार बड़ा होने के कारण भरण पोषण नहीं चल पाता था. जिसके कारण निर्भय सिंह छोटी-मोटी चोरियों करने लगा और पुलिस की नजरों से बचने लगा.

1989 में दर्ज हुआ था पहला केस
निर्भय के कदम यहीं से धीरे-धीरे अपराध की ओर बढ़ने लगे. निर्भय सिंह गुर्जर आगे चलकर दस्यु लालाराम गिरोह के सम्पर्क में आ गया. इन्हीं के साथ मिलकर निर्भय ने हत्या, लूट, अपहरण, डकैती जैसे संगीन वारदातों को अंजाम देना शुरू कर दिया. दस्यु निर्भय सिंह पर पहला मुकदमा वर्ष 1989 में जनपद जालौन के थाना चुर्खी में डकैती में पंजीकृत किया गया था. निर्भय के ऊपर उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के विभिन्न जनपदों में लूट, अपहरण, हत्या, डकैती के लगभग एक सैकड़ा से अधिक मुकदमे दर्ज थे. दस्यु निर्भय सिंह के गिरोह में 60 सदस्य थे. जिनमें प्रमुख रूप से युद्ध सिंह उर्फ लाठी वाला, श्याम जाटव, सरला, नीलम, मगल सिंह एवं शोबरन सिंह थे.शराब और लड़कियों का था शौकीन


निर्भय गुर्जर को शराब और लड़कियों का भी शौक था. निर्भय ने सरला और नीलम नाम की दो लड़कियों का अपहरण किया था. अपहरण किए जाने के दौरान दोनों लड़कियां, किशोरी ही थीं. कई साल गैंग में रहने के बाद दोनों बीहड़ के जीवन में रम गईं. निर्भय, लड़की और शराब का काफी शौकीन था. उसके साथ उसकी दो प्रेमिकाएं सरला और नीलम हमेशा रहती थीं. उसे खुश करने के लिए प्रेमिकाएं हमेशा जींस और टी-शर्ट पहनती थीं. निर्भय इन दोनों से ही प्रेम करता था. नीलम को वह अपनी पत्‍नी मानता था, लेकिन कुछ दिनों बाद वह उससे आहत भी हुआ था.

2005 में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था
निर्भय के दत्तक पुत्र श्‍याम का नीलम से प्रेम संबंध हो गया था. दोनों करीब-करीब एक ही उम्र के थे. इसलिए साल 2005 में गैंग का उत्तराधिकारी कहा जाने वाला श्‍याम, निर्भय की कथित पत्नी नीलम को लेकर फरार हो गया. इससे निर्भय को काफी दुख पहुंचा था. जिसके बाद जालौन में पुलिस सतर्क हुई और उसके ठिकानों पर मुठभेड़ शुरू कर दी. जिसमें निर्भय का प्रमुख साथी बुद्ध सिंह लाठीवाला मारा गया. जालौन में जब धीरे-धीरे उसके गैंग का सफाया होने लगा तो वह औरेया की ओर रवाना हुआ और नवंबर 2005 को पुलिस ने मुठभेड़ में निर्भय सिंह गुर्जर को मार गिराया.

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First published: January 26, 2020, 6:43 PM IST
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