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UP Election: अखिलेश यादव ने किसके कहने पर चुनी नेता जी के 'राजनीतिक गुरु' की सीट, पृथ्वीराज चौहान से क्या है कनेक्शन, जानें Karhal Seat के बारे में सबकुछ

UP Election: अखिलेश यादव ने किसके कहने पर चुनी नेता जी के 'राजनीतिक गुरु' की सीट, पृथ्वीराज चौहान से क्या है कनेक्शन, जानें Karhal Seat के बारे में सबकुछ

मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव (फाइल फोटो)

मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव (फाइल फोटो)

Akhilesh Yadav karhal vidhan sabha seat: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) मैनपुरी जिले की करहल विधानसभा सीट (karhal vidhan sabha seat) से पहली दफा विधानसभा का चुनाव मैदान में उतरने के ऐलान के साथ ही देश भर में यह सीट चर्चा के केंद्र में आ गई है. इसी के साथ में रोचक तथ्य जुड़ा हुआ है कि कभी इस सीट से अखिलेश यादव के पिता नेताजी के नाम से लोकप्रिय मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक गुरु नत्थू सिंह भी एमएलए रह चुके हैं, आज उसी सीट से अखिलेश यादव भी अपनी किस्मत अजमा रहे हैं भले ही अखिलेश यादव करहल सीट से चुनाव लड़ने को उतरे हों लेकिन पिता मुलायम और बेटे आखिलेश को नत्थू सिंह की ही सीट का सहारा राजनीतिक पहचान के लिए लेना पड़ा है.

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इटावा / मैनपुरी: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) मैनपुरी जिले की करहल विधानसभा सीट (karhal vidhan sabha seat) से पहली दफा विधानसभा का चुनाव मैदान में उतरने के ऐलान के साथ ही देश भर में यह सीट चर्चा के केंद्र में आ गई है. इसी के साथ में रोचक तथ्य जुड़ा हुआ है कि कभी इस सीट से अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav News) के पिता नेताजी के नाम से लोकप्रिय मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक गुरु नत्थू सिंह भी एमएलए रह चुके हैं, आज उसी सीट से अखिलेश यादव भी अपनी किस्मत अजमा रहे हैं भले ही अखिलेश यादव करहल सीट से चुनाव लड़ने को उतरे हों लेकिन पिता मुलायम और बेटे आखिलेश को नत्थू सिंह की ही सीट का सहारा राजनीतिक पहचान के लिए लेना पड़ा है.

बेशक मुलायम सिंह यादव 1967 में पहली दफा जसवंतनगर विधानसभा से चुनाव लड़ कर के निर्वाचित हुए हों, तब उनका वह पहला चुनाव था लेकिन अखिलेश यादव साल 1999 में कन्नौज संसदीय सीट से सांसद निर्वाचित हो चुके थे. असल में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पहली दफा विधानसभा चुनाव में उतर रहे हैं, इसलिए हर किसी को हैरत भी हो रही है. हैरत केवल भारतीय जनता पार्टी के ही लोग नहीं कर रहे हैं बल्कि समाजवादी पार्टी के लोग भी हैरत में बने हुए हैं. किसी को इस बात का अंदेशा नहीं था कि अखिलेश यादव अपने पैतृक गांव सैफई से नजदीक करहल विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान कर देंगे. वैसे विधानसभा चुनाव का ऐलान होने के साथ ही इस बात की भी चर्चा चल रही थी कि अखिलेश यादव इस दफा हर हाल में विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे लेकिन सीट का कोई निर्धारण नहीं हो पा रहा था.

पहले इस बात की जानकारी सामने आई कि अखिलेश यादव पूर्वी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले की किसी सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगे. इसके साथ ही कन्नौज के गुन्नौर और मैनपुरी विधानसभा सीट से अखिलेश यादव के चुनाव मैदान में उतरने की चर्चाएं चल निकलीं लेकिन अंततोगत्वा अखिलेश यादव ने करहल सीट से चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया. यह ऐलान ऐसे ही नहीं हुआ है. इस ऐलान के पीछे भी अखिलेश यादव ने पूरा राजनीतिक गणित भी फिट किया है, जिसके बाद ही अखिलेश यादव ने इस बात का निर्णय लिया कि वह करहल विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगे.

समाजवादी पार्टी के भरोसेमंद सूत्र इस बात की जानकारी देते हैं कि मैनपुरी जिले के जिलाध्यक्ष समेत कई नेता अखिलेश यादव को मैनपुरी सदर सीट से चुनाव मैदान में उतरने की मांग कर रहे थे लेकिन अखिलेश यादव ने अपने बेहद करीबी माने जाने वाले विधान परिषद सदस्य अरविंद यादव के प्रस्ताव को स्वीकार कर करहल से चुनाव लड़ने का ऐलान कर एक नई राजनीति को जन्म दे दिया है. किसी ने इस बात को सपने में भी नहीं सोचा था कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव करहल विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगे. यह तो था मैनपुरी जिले की करहल विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरने का एक संक्षिप्त खाका लेकिन इस विधानसभा के साथ यह भी बड़ा ही रोचक तथ्य जुड़ा हुआ है कि कभी यह सीट अखिलेश यादव के पिता नेता जी मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक गुरु नत्थू सिंह यादव की विधानसभा सीट रही है.

राजनीतिक विश्लेषक उदयभान सिंह यादव ऐसा बताते हैं कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव मैनपुरी जिले की जिस करहल विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे हैं, कभी इस सीट से उनके पिता मुलायम सिंह यादव के राजनैतिक गुरु नत्थू सिंह चुनाव लड़ विधानसभा तक जा पहुंचे थे. नत्थू सिंह यादव के बारे में ऐसा कहा जाता है कि 1957 का विधानसभा चुनाव होने करहल विधानसभा सीट से लड़ा था लेकिन 1962 का चुनाव में उन्होंने जसवंतनगर सीट से सीट से किस्मत आजमाया था, जिसमें नत्थू सिंह को कामयाबी हासिल हुई. साल 1967 के विधानसभा चुनाव में जसवंतनगर सीट को नत्थू सिंह ने छोड़ कर मुलायम सिंह यादव को चुनाव मैदान में उतार दिया. इस तरह पहली दफा मुलायम सिंह यादव 1967 में विधायक बन करके विधानसभा में जा पहुंचे.

करहल विधानसभा का नाता महाराजा पृथ्वीराज चौहान से भी रहा है. करहल विधानसभा सीट की बात की जाए तो यह मुलायम के पैतृक गांव सैफई से महज चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. मौजूदा समय में मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से सांसद भी हैं. दरअसल, करहल के मोटामल मंदिर से पृथ्वीराज चौहान का नाता है. पृथ्वीराज सिंह चौहान कन्नौज के राजा जयचंद की बेटी संयोगिता से प्रेम करते थे लेकिन जयचंद ने संयोगिता की शादी के लिए स्वंयवर का आयोजन किया और पृथ्वीराज चौहान को निमंत्रण नहीं दिया गया. जिसके बाद पृथ्वीराज चौहान आए और संयोगिता को अपने साथ दिल्ली ले गए, जिसके बाद पृथ्वीराज के सेनापति मोटामल और जयचंद की सेना के बीच भीषण युद्ध हुआ. इस युद्ध में मोटामल वीरगति को प्राप्त हुए थे, जिसके बाद पृथ्वीराज सिंह ने उनकी याद में इस मंदिर का निर्माण करवाया था.

करहल विधानसभा सीट समाजवादी पार्टी की सबसे सुरक्षित सीटों में से एक है. करहल विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) का सात बार कब्जा रहा है. इस विधासभा सीट से 1985 में दलित मजदूर किसान पार्टी के बाबूराम यादव, 1989 और 1991 में समाजवादी जनता पार्टी (सजपा) और 1993, 1996 में सपा के टिकट पर बाबूराम यादव विधायक निर्वाचित हुए. 2000 के उपचुनाव में सपा के अनिल यादव, 2002 में बीजेपी और 2007, 2012 और 2017 में सपा के टिकट पर सोवरन सिंह यादव विधायक चुने गए. मैनपुरी की करहल सीट यादव बाहुल्य है और 2002 को छोड़ दिया जाए तो पिछले करीब 32 साल से इस सीट पर समाजवादी पार्टी का दबदबा रहा है. 2002 में सोवरन सिंह ने यह सीट बीजेपी की झोली में डाली थी, जो बाद में सपा में शामिल हो गए. करहल विधानसभा सीट समाजवादी पार्टी की सबसे सुरक्षित सीटों में से एक है.

अगर जातिगत समीकरण की बात करें तो करहल विधानसभा सीट समाजवादी पार्टी के लिए काफी मुफीद रही है. यहां करीब साढ़े तीन लाख मतदाता है. इस सीट पर यादव मतदाताओं की संख्या तकरीबन डेढ़ लाख है. मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भी अच्छी खासी है। इसके अलावा शाक्य, ठाकुर, ब्राह्मण, लोधी और एससी मतदाता भी इस सीट का चुनाव परिणाम निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाते हैं. समाजवादी पार्टी के एमएलसी अरविंद यादव का कहना है कि यह उनका सबसे बड़ा सौभाग्य है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उनके प्रस्ताव को विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए स्वीकार कर लिया है. अब सभी समाजवादियों की यह जिम्मेदारी है कि उनको रिकॉर्ड मतों से चुनाव जितवा कर एक नया इतिहास रचा जाये.

करहल विधानसभा में अब तक चुने गए विधायक
नत्थू सिंह               प्रजा सोशलिस्ट पार्टी                     1957 राम सिंह         स्वतंत्र पार्टी                        1962मुंशीलाल         स्वतंत्र पार्टी                        1967मुंशीलाल         स्वतंत्र पार्टी                        1969नत्थू सिंह         भारतीय क्रांति दल               1974नत्थू सिंह         जनता पार्टी                        1977शिवमंगल        कांग्रेस                              1980बाबूराम           लोकदल                           1985बाबूराम           जनता दल                         1989बाबूराम           जनता पार्टी                        1991बाबूराम           सपा                                  1993बाबूराम           सपा                                  1996सोबरन सिंह     भाजपा                               2002सोबरन सिंह     सपा                                   2007सोबरन सिंह     सपा                                   2012सोबरन सिंह     सपा                                   2017
करहल विधान सभा में कुल वोटर
कुल मतदाता-371261, पुरुष मतदाता-201394, महिला मतदाता-169851, पोलिंग स्टेशन- 39 , शहरी, 436 ग्रामीण, कुल 475

Tags: Akhilesh yadav, Assembly elections, Uttar Pradesh Assembly Elections

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