Analysis: मैनपुरी में मुलायम के 'विजय रथ' को इस प्लान से रोकेगी BJP, मैदान में उतारा ये दिग्गज!

1996 में मुलायम सिंह यादव पहली बार इस सीट से सांसद चुने गए, जब उनके मुख्यमंत्री बनने पर ये सीट खाली हुई तो 1998, 1999 में चौधरी बलराम सिंह यादव यहां से सांसद चुने गए.

Anil Rai | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 15, 2019, 6:09 PM IST
Analysis: मैनपुरी में मुलायम के 'विजय रथ' को इस प्लान से रोकेगी BJP, मैदान में उतारा ये दिग्गज!
मुलायम सिंह यादव (File Photo)
Anil Rai
Anil Rai | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 15, 2019, 6:09 PM IST
बीजेपी के लिए उत्तर प्रदेश की 7 अभेद्य लोकसभा सीटों में सबसे मजबूत किला है मैनपुरी का, मैनपुरी की पहचान मुलायम सिंह यादव और उनके परिवार से ही है. 1989 के बाद इस सीट पर पहले जनता दल और बाद में समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा है. यानी जिस पर मुलायम की कृपा वही जीता है. 1996 में मुलायम सिंह यादव पहली बार इस सीट से सांसद चुने गए, जब उनके मुख्यमंत्री बनने पर ये सीट खाली हुई तो 1998, 1999 में चौधरी बलराम सिंह यादव यहां से सांसद चुने गए.

2004 में मुलायम सिंह एक बार फिर यहां से ससंद पहुंच लेकिन उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद इस सीट पर हुए उपचुनाव में मुलायम सिंह के भतीजे धर्मेन्द्र यादव संसद पहुंचे. मुलायम एक बार फिर 2009 में यहां से लोकसभा पहुंचे. 2014 में मुलायम सिंह यादव ने 2 सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों सीटों से जीतने पर मैनपुरी सीट छोड़ दी. मैनपुरी में हुए उप चुनाव में परिवार की अगली पीढ़ी के नेता तेज प्रताप यादव को मैदान में उतार गया, जो जीत कर संसद पहुंचे.

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साफ है कि ये सीट यादव परिवार की नर्सरी भी है. पिछले लोकसभा चुनाव के हिसाब से यहां का वोट गणित देखें तो 17.3 लाख वोटरों में करीब 6 लाख से ज्यादा यादव वोटर हैं. दूसरे नंबर पर शाक्य वोटर हैं, इनकी संख्या करीब 5 लाख है. बीजेपी ने इसी पर दांव लगाया है. बीजेपी ने पिछले चुनाव में शिकस्त खाए प्रेम सिंह शाक्य को मैदान में उतारा है. पार्टी को उम्मीद है कि शाक्य वोटरों के साथ-साथ यादव छोड़ अन्य पिछड़े वर्ग के वोटर बीजेपी के पंरपरागत सवर्ण वोटर के साथ आते हैं तो मुलायम सिंह यादव को उनके गढ़ में चुनौती दी जा सकती है.

इस सीट के प्रचार के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री लिए योगी आदित्यनाथ चुनावी सभा कर चुके हैं. जबकि दोनों उप मुख्यमंत्रियों की सभा प्रस्तावित हैं. इस सीट पर इस चुनाव की सबसे ख़ास बात है बीएसपी सुप्रीमो मायावती का मुलायम के प्रचार के लिए आना, यह पहली बार है जब किसी दूसरे दल का नेता मुलायम सिंह यादव के प्रचार के लिए आ रहे हैं. बीजेपी इसे मुलायम की हताशा बता रही है. जबकि सपा इसे अपनी बढ़ी हुई ताकत.

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