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लोकसभा चुनाव: मोदी लहर में भी इस 'समाजवादी' गढ़ को नहीं ढहा पाई थी BJP

लोकसभा चुनाव: मोदी लहर में भी इस 'समाजवादी' गढ़ को नहीं ढहा पाई थी BJP

मुलायम सिंह यादव (File Photo)

मुलायम सिंह यादव (File Photo)

यूपी में सपा-बसपा गठबंधन का ऐलान हो गया है और मुलायम सिंह यादव एक बार फिर से मैनपुरी सीट से दावेदारी पेश करने जा रहे हैं. मैनपुरी सीट काे उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी गढ़ के रूप में माना जाता है.

    आगामी ​लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बाहर करने के लिए उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने गठबंधन किया है.  चुनावों में वोट शेयर की बात करें तो ये गठबंधन बीजेपी पर कागजों में तो कम से कम भारी दिख ही रहा है.  2014 लोकसभा चुनावों के दौरान मोदी लहर में भी समाजवादी पार्टी और बसपा करीब 20-20 प्रतिशत वोटों से ज्यादा हासिल करने में सफल रहे थे, वो अलग बात है कि ये वोट शेयर सीटों की जीत में तब्दील न हो सके.

    अब गठबंधन का ऐलान हो गया है और मुलायम सिंह यादव एक बार फिर से मैनपुरी सीट से दावेदारी पेश करने जा रहे हैं. मैनपुरी सीट काे उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी गढ़ के रूप में माना जाता है. ये वोट सीट है, जहां 2014 में भी मुलायम ने आसानी से जीत हासिल की थी. उसके बाद उन्होंने आजमगढ़ के लिए इस सीट को छोड़ दिया था, जिस पर उपचुनाव में भी समाजवादी पार्टी से तेज प्रताप यादव ने जीत हासिल की थी.

    मैनपुरी लोकसभा सीट का इतिहास

    समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह का गढ़ कहे जाने वाले मैनपुरी में 6 तहसील हैं. इनके नाम मैनपुरी, भोगांव, करहल, किशनी, कुरावली और घिरोर है. 1952 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बादशाह गुप्ता मैनपुरी के पहले सांसद बने थे. 1952 से लेकर 1971 तक इस सीट पर कांग्रेस का ही प्रभुत्व रहा. 1977 के लोकसभा चुनाव में भारतीय लोकदल के रघुनाथ सिंह वर्मा यहां से विजयी हुए जो अगले चुनाव में जनता दल (सेक्युलर) के टिकट पर यहां लड़े और फिर से जीते. साल 1989 में इस सीट पर कांग्रेस की वापसी हुई. 1991 में समाजवादी पार्टी के संस्थापक और नेता मुलायम सिंह यादव मैनपुरी सीट से विजयी हुए.

    इसके बाद से मैनपुरी लोकसभा सीट सपा का गढ़ बन गई. इसके बाद यहां सपा की टिकट पर जो खड़ा हुआ उसे जीत मिली. सपा के नेता चौधरी बलराम सिंह यहां से लगातार 2 बार जीते. 2004 में मुलायम सिंह दोबारा यहां के सांसद बने, पर कुछ ही महीनों बाद उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया, जिसकी वजह से 2004 में मैनपुरी में उपचुनाव हुए. जिसमें मुलायम के भतीजे धर्मेन्द्र यादव विजयी रहे. इसके बाद 2009 में तीसरी बार मुलायम सिंह मैनपुरी के सांसद बने. इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह आजमगढ़ और मैनपुरी की सीट से चुनाव लड़ा. दोनों सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद मुलायम ने मैनपुरी सीट अपने बड़े भाई रतन सिंह के नाती तेज प्रताप यादव के लिए छोड़ दी. तेज प्रताप यादव ने इस सीट से जीत दर्ज की और सांसद चुने गए.

    मुलायम सिंह (File Photo)


    मैनपुरी लोकसभा सीट का समीकरण
    2014 के आंकड़ों के अनुसार, मैनपुरी लोकसभा में करीब 16 लाख से अधिक वोटर हैं. जातीय समीकरण को देखें तो इस सीट पर यादव वोटरों का वर्चस्व है, यहां करीब 35 फीसदी मतदाता यादव समुदाय से हैं. जबकि दूसरे नंबर पर राजपूत (क्षत्रिय) वोटर हैं. यही कारण रहा है कि यहां समाजवादी पार्टी का एक छत्र राज चलता है. इस लोकसभा क्षेत्र में कुल चार विधानसभाएं आती हैं. इनमें मैनपुरी, भोगांव, किशनी और करहल है. 2017 के विधानसभा चुनाव में इनमें से सिर्फ भोगांव ही भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई थी, जबकि बाकी सभी तीन सीटें सपा के खाते में गई थी.

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    2014 में मोदी लहर भी नहीं ढहा पाई मुलायम का गढ़
    2014 के लोकसभा चुनाव में चली मोदी लहर का मैनपुरी लोकसभा सीट पर कोई असर देखने को नहीं मिला था. तत्कालानी समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव को जनता का भरपूर समर्थन मिला. 2014 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह को टक्कर देने के लिए बीजेपी ने शत्रुघ्न सिंह चौहान को मैदान में उतारा था. लेकिन जब नतीजे आए तो सपा को 59.63 फीसदी वोट और बीजेपी को 23.15 फीसदी वोट मिले. सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव को जनता के 5 लाख 95 हजार 455 वोट मिले, जबकि बीजेपी प्रत्याशी शत्रुघ्न सिंह चौहान को मात्र 2 लाख 31 हजार 117 वोट ही मिले. वहीं बहुजन समाजपार्टी के प्रत्याशी डॉ संघमित्रा मौर्या को 1 लाख 42 हजार 728 वोट मिले.



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    Tags: Bahujan samaj party, BJP, Lok Sabha Election 2019, Mulayam Singh Yadav, Narendra modi, Samajwadi party, Uttar Pradesh Politics, मैनपुरी

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