अखिलेश के ‘मुलायम’ कदम से मैनपुरी में शुरू हुई सियासी तनातनी, तेज प्रताप पर टिकीं नजरें
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अखिलेश के ‘मुलायम’ कदम से मैनपुरी में शुरू हुई सियासी तनातनी, तेज प्रताप पर टिकीं नजरें
अखिलेश यादव (File Photo)

अब मुलायम वापस मैनपुरी लौट रहे हैं, लिहाजा तेज प्रताप कहां से चुनाव लड़ेंगे, ये सवाल परिवार में उठ खड़ा हुआ है. तेज प्रताप यादव की टिकट कटने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं हैं.

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समाजवादी पार्टी में एक बार फिर यादव परिवार में रार उभरने की खबरें आने लगी हैं. ताजा विवाद मैनपुरी लोकसभा सीट को लेकर सामने आ रहा है. दरअसल समाजवादी पार्टी ने पिछले दिनों मैनपुरी लोकसभा सीट से पार्टी संरक्षक मुलायम सिंह यादव को प्रत्याशी घोषित किया था. पार्टी के इस कदम से मैनपुरी से वर्तमान सांसद तेज प्रताप सिंह यादव पर सबकी नजर टिक गई हैं.

बता दें, मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से इस बार पांचवीं बार मैदान में उतरने वाले हैं. मुलायम सिंह यादव 6 बार लोकसभा सांसद और 8 बार विधायक रह चुके हैं. मुलायम साल 1996 में मैनपुरी, 1998 में संभल, 1999 में दो सीटों संभल और कन्नौज, फिर 2004 और 2009 में मैनपुरी आखिर में 2014 में आजमगढ़ और मैनपुरी से लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं. मुलायम इसी सीट से सांसद रहते हुए देश के रक्षामंत्री बने. मोदी लहर में भी मुलायम सिंह यहां बीजेपी प्रत्याशी से सवा 3 लाख वोटों से जीते.

मुलायम ने 2014 में आजमगढ़ सीट अपने पास रखी और मैनपुरी सीट पर परिवार के ही सदस्य अपने पौत्र तेज प्रताप यादव के लिए खाली कर दी. तेज प्रताप इस सीट पर आसानी से जीतकर पहली बार सांसद बन गए.




अब मुलायम वापस मैनपुरी लौट रहे हैं, लिहाजा तेज प्रताप कहां से चुनाव लड़ेंगे, ये सवाल परिवार में उठ खड़ा हुआ है. तेज प्रताप यादव की टिकट कटने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं हैं.
इसी बीच पिछले हफ्ते 8 मार्च को मैनपुरी में सपा-बसपा गठबंधन का संयुक्त कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया. एक तरफ सम्मेलन चल रहा था, दूसरी तरफ पार्टी के कुछ युवा कार्यकर्ताओं ने सांसद तेज प्रताप सिंह यादव को टिकट न दिए जाने पर प्रदर्शन किया. यही नहीं इस दौरान कार्यकर्ताओं ने रामगोपाल यादव का पुतला भी दहन किया.

इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने जिला कार्यकारिणी भंग करने का आदेश जारी कर दिया. जिलाध्यक्ष खुमान सिंह वर्मा सहित पूरी कार्यकारिणी को भंग कर दिया गया. प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम द्वारा जारी इस आदेश में हालांकि कार्रवाई की वजह का उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन इसे विरोध प्रदर्शन से जोड़कर देखा जा रहा है.

दरअसल टिकट को लेकर अंतिम समय में बदलाव इस टशन का कारण बना. पहले चर्चा थी कि अखिलेश यादव कन्नौज से चुनाव लड़ेंगे, लेकिन पहले मुलायम को मैनपुरी और ऐन वक्त डिंपल यादव को एक बार फिर से कन्नौज सीट से प्रत्याशी बनाने का ऐलान कर दिया गया. इसके बाद अखिलेश यादव को मुलायम सिंह यादव द्वारा खाली की गई आजमगढ़ सीट से प्रत्याशी बनाए जाने पर चर्चा शुरू हुई. इस बीच तेज प्रताप यादव को मैनपुरी से जौनपुर सीट पर उतारने की बात सामने आई. पार्टी सूत्रों के अनुसार तेज प्रताप का खेमा जौनपुर से चुनाव लड़ने का इच्छुक नहीं है. यहीं से रार शुरू हो गई है. फिलहाल इस मुद्दे पर पार्टी की तरफ से नेता बोलने से बच रहे हैं.

यादव परिवार के ‘सम्मान’ में कांग्रेस यहां प्रत्याशी नहीं उतारती
जहां तक मैनपुरी लोकसभा सीट की बात करें तो यहां 5 विधानसभा हैं- मैनपुरी सदर, भोंगाव, किशनी तथा करहल विधानसभा सीट. वहीं मैनपुरी लोकसभा की ही जसवंतनगर विधानसभा सीट प्रशासनिक दृष्टि से इटावा जनपद में लगती है. इस लोकसभा सीट में कुल 16,62,317 मतदाता है, यहां तीसरे चरण में 23 अप्रैल को मतदान होना है. भाजपा ने अब तक अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है. कांग्रेस ने 2004 के चुनाव के बाद 2014 तक कोई प्रत्याशी खड़ा नहीं किया है, इस बार कांग्रेस से प्रत्याशी उतारने की संभावना न के बराबर है.

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