मुलायम सिंह यादव: नेहरू के जमाने से अडिग है ये 'धरतीपुत्र', मोदी लहर भी नहीं डिगा सकी
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मुलायम सिंह यादव: नेहरू के जमाने से अडिग है ये 'धरतीपुत्र', मोदी लहर भी नहीं डिगा सकी
मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)

समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव देश के उन चुनिंदा नेताओं में से हैं, जिन्होंने करीब 6 दशक से देश की राजनीति को न सिर्फ जिया है, बल्कि उस पर अपनी 'धरतीपुत्र' छवि का ठप्पा भी लगाया है.

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देश में 17वीं लोकसभा के लिए आम चुनाव का ऐलान हो गया है. इस चुनाव में उत्तर प्रदेश की सीटों पर पूरे देश की नजर रहेगी. इन्हीं में से एक मैनपुरी की भी सीट है, जहां से समाजवादी पार्टी को जन्म देने वाले और वर्तमान में पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव एक बार फिर चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं.

दरअसल समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव देश के उन चुनिंदा नेताओं में से हैं, जिन्होंने करीब 6 दशक से देश की राजनीति को न सिर्फ जिया है, बल्कि उस पर अपनी 'धरतीपुत्र' छवि का ठप्पा भी लगाया है. 80 वर्ष पूरे कर चुके मुलायम सिंह यादव करीब 59 वर्ष से राजनीतिक जीवन में सक्रिय हैं. 1960 में राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने के वाले मुलायम सिंह यादव देश के उन ​चुनिंदा नेताओं में से एक हैं, जो पने राजनीतिक जीवन में किंग मेकर से लेकर ​किंग तक की भूमिका में रहे. चाहे वह केंद्र की सत्ता हो या उत्तर प्रदेश की, हर जगह मुलायम ने अपना लोहा मनवाया.

1967 में पहली बार जीतकर पहुंचे यूपी विधानसभा
22 नवंबर 1939 को मुलायम सिंह एक साधारण परिवार में जन्मे. उन्होंने अपने शैक्षणिक जीवन में B.A, B.T और राजनीति शास्त्र में M.A की डिग्री हासिल की. उनकी पूरी पढ़ाई केके कॉलेज इटावा, एक.के कॉलेज शिकोहाबाद और बीआर कॉलेज आगरा यूनिवर्सिटी से पूरी हुई.
मालती देवी से शादी के बाद साल 1973 में मुलायम सिंह के घर उनके इकलौते बेटे अखिलेश यादव ने जन्म लिया. लेकिन तब तक वह राजनीति की दुनिया में अपने कदम जोरदार तरीके से जमा चुके थे. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के जमाने में 1960 में मुलायम सिंह यादव ने राजनीति की शुरुआत की थी और 1967 के चुनाव में वह पहली बार विधायक बन चुके थे.



राजनीति में कूदने के लिए उन्हें प्रेरित करने वाली शख्सियत का नाम राम मनोहर लोहिया का था. इसके बाद तो उन्होंने लोकसभा से लेकर यूपी विधानसभा में अपनी गहरी छाप छोड़ी. राजनीति में मुलायम के कद का इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि 2014 की मोदी लहर में जब कई सियासी दिग्गज हार का मुंह देख रहे थे, मुलायम सिंह यादव ने अकेले दो सीटों मैनपुरी और आजमगढ़ से जीत दर्ज की. बाद में उन्होंने मैनपुरी सीट अपने ही परिवार के तेज प्रताप यादव के लिए छोड़ दी और आजमगढ़ से सांसद रहे.

देश में खड़ा किया सबसे बड़ा राजनीतिक कुनबा

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सैफई गांव में मुलायम सिंह यादव का जन्म हुआ था. उनका परिवार पहले बेशक राजनीति से न जु़ड़ा हो. लेकिन आज उनके परिवार के कण-कण में राजनीति बसती है. देश में उनके परिवार से बड़ा राजनीतिक परिवार शायद ही हो.

भाई, भतीजा, बेटा और बहू हर कोई ब्लॉक और पंचायत स्तर से लेकर संसद तक प्रतिनिधित्व कर रहा है. आज मुलायम जहां खड़े हैं, बेशक वो पायदान राजनीति में काफी ऊंचा है लेकिन उनकी उड़ान ज़मीन से शुरू हुई थी. जो काफी विस्तारित दिखाई देती है.

साल दर साल राजनीति का ‘मुलायम’ सफर

1960: मुलायम सिंह यादव ने राजनीतिक पारी की शुरुआत की

1967: पहली बार विधानसभा चुनाव जीते, MLA बने

1974: प्रतिनिहित विधायक समिति के सदस्य बने

1975: इमरजेंसी में जेल जाने वाले विपक्षी नेताओं में शामिल

1977: उत्तर प्रदेश में पहली बार मंत्री बने, कॉ-ऑपरेटिव और पशुपालन विभाग संभाला

1980: उत्तर प्रदेश में लोकदल का अध्यक्ष पद संभाला

1985-87: उत्तर प्रदेश में जनता दल का अध्यक्ष पद संभाला

1989: पहली बार UP के मुख्यमंत्री बनकर कमान संभाली

1992: समाजवादी पार्टी की स्थापना कर, विपक्ष के नेता बने

1993-95: दूसरी बार यूपी के मुख्यमंत्री पद पर काबिज़ रहे

1996: मैनपुरी से 11वीं लोकसभा के लिए सांसद चुने गए. केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री का पद संभाला

1998-99: 12वीं और 13वीं लोकसभा के लिए फिर सांसद चुने गए

1999-2000: पेट्रोलियम और नेचुरल गैस कमेटी के चेयरमैन का पद संभाला

2003-07: तीसरी बार यूपी का मुख्यमंत्री पद संभाला

2004: चौथी बार 14वीं लोकसभा में सांसद चुनकर गए

2007: यूपी में बसपा से करारी हार का सामना करना पड़ा

2009: 15वीं लोकसभा के लिए पांचवीं चुने

2009: स्टैंडिंग कमेटी ऑन एनर्जी के चेयरमैन बने

2014: उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ से सांसद बने

2014: स्टैंडिंग कमेटी ऑन लेबर के सदस्य बने

2015: जनरल पर्पस कमेटी के सदस्य बने

2017: समाजवादी पार्टी के संरक्षक बने

2019: मैनपुरी से चुनाव लड़ने की तैयारी

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