गेस्ट हाउस कांड के 24 साल बाद एक साथ नज़र आएंगे माया-मुलायम, मैनपुरी में कुछ देर में रैली

News18 Uttarakhand
Updated: April 19, 2019, 12:19 PM IST
गेस्ट हाउस कांड के 24 साल बाद एक साथ नज़र आएंगे माया-मुलायम, मैनपुरी में कुछ देर में रैली
माया-मुलायम एक साथ

माया ने गठबंधन का ऐलान करते हुए कहा था कि वह गेस्ट हाउस कांड को किनारे रखकर जनहित में गठबंधन कर रही हैं.

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बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती आज सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के साथ मैनपुरी में चुनाव प्रचार करेंगी. मैनपुरी सीट से मुलायम सिंह गठबंधन के उम्मीदवार है और ऐसा सालों बाद होगा जब माया-मुलायम एकसाथ किसी मंच पर नज़र आएंगे. सपा-बसपा-रालोद गठबंधन की संयुक्त रैलियों की शृंखला में मैनपुरी के क्रिश्चियन कॉलेज मैदान में यह चौथी रैली होगी. इस रैली पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं.

आपको बता दें कि माया ने गठबंधन का ऐलान करते हुए कहा था कि वह गेस्ट हाउस कांड को किनारे रखकर जनहित में गठबंधन कर रही हैं. यानी वह इस चर्चित घटना को भुला नहीं पाई हैं. ऐसे में माया का मुलायम के लिए वोट मांगना बड़ी बात होगी.

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बसपा सुप्रीमो की दूसरी रैली बरेली के देवचरा मार्केट ग्राउंड भामोरा में होगी. यह सीट भी सपा के हिस्से में है. यहां से पूर्व मंत्री भगवत सरन गंगवार सपा प्रत्याशी हैं. साझा रैलियों में पहले बरेली की रैली प्रस्तावित नहीं थी. इसे नए सिरे से जोड़ा गया है. विवादित बयान को लेकर चुनाव आयोग के प्रतिबंध की वजह से मायावती आगरा रैली में शामिल नहीं हुई थीं.

आखिर क्या था गेस्ट हाउस कांड?

2 जून 1995 को मायावती, विधायकों के साथ लखनऊ के मीराबाई गेस्ट हाउस के कमरा नंबर 1 में थीं. अचानक समाजवादी पार्टी समर्थक गेस्ट हाउस में घुस आए. समर्थकों ने मायावती से अभद्रता की, अपशब्द कहे. खुद को बचाने के लिए मायावती कमरे में बंद हो गईं. गौरतलब है कि बाबरी विध्वंस के बाद 1993 यूपी में गठबंधन की राजनीति की नई पटकथा लिखी गई. मुलायम सिंह यादव और बसपा अध्यक्ष कांशीराम ने बीजेपी को रोकने के लिए गठबंधन किया और जनता ने बहुमत दे दिया. मुलायम सिंह के नेतृत्व में गठबंधन की सरकार बनी. लेकिन इसके बाद 2 जून 1995 को एक रैली में मायावती ने सपा से गठबंधन वापसी की घोषणा कर दी. अचानक से हुए इस समर्थन वापसी की घोषणा से मुलायम सरकार अल्पमत में आ गई.

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उसके बाद राज्य सरकार के गेस्ट हाउस में सपा कार्यकर्ताओं के उन्मादी भीड़ ने जो किया वह किसी कलंक से कम नहीं था. मायावती के जीवन पर आधारित किताब 'बहनजी' के मुताबिक भीड़ एक दलित महिला नेता पर अभद्र टिप्‍पणी कर रही थी. भीड़ उनके साथ मारपीट करने वाली थी लेकिन उन्‍होंने अपने आपको एक कमरे में बंद कर लिया था. बाद में सुरक्षाकर्मियों ने उनकी जान बचाई.

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First published: April 19, 2019, 8:05 AM IST
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