मुलायम के सामने मायावती ने किया गेस्ट हाउसकांड का जिक्र, कही ये बड़ी बात

मायावती ने कहा कि कभी-कभी देशहित में सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं.

News18 Uttar Pradesh
Updated: April 19, 2019, 3:40 PM IST
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मैनपुरी के क्रिस्चियन मैदान पर शुक्रवार को महागठबंधन की संयुक्त रैली को संबोधित करते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के सामने ही उस गेस्टहाउस कांड का जिक्र किया जिसकी वजह से दोनों दल एक दूसरे के धुर विरोधी हो गए थे. मायावती ने कहा कि यहां मौजूद सभी लोग और मीडिया बन्धुओं को भी इस सवाल का जवाब चाहिए कि गेस्ट हाउस कांड के बाद भी सपा-बसपा लोकसभा का चुनाव गठबंधन के तहत कैसे लड़ रहे हैं.

मायवती ने गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए कहा, "2 जून 1995 को हुए गेस्ट हाउस कांड के बाद भी लोकसभा चुनाव में गठबंधन का जवाब सभी चाहते होंगे. गेस्ट हाउस कांड के बाद भी सपा बसपा गठबंधन हुआ. कभी-कभी देशहित में ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं. हम सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए एक साथ आए हैं. हमें उम्मीद है कि मुलायम सिंह जी को आप भरी मतों से जीतकर एक बार फिर संसद भेजेंगे."



करीब ढाई दशक पुरानी राजनैतिक विद्वेष पर जमी धूल की मोटी परत को साफ करते हुए मायावती ने मंच से सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की तारीफ़ भी की. उन्होंने मुलायम सिंह यादव को असली पिछड़ा बताते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार में सत्ता का दुरूपयोग करते हुए खुद को पिछड़ा बना लिया. इस दौरान मायावती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी खूब हमला किया. उन्होंने कहा कि मुलायम ओबीसी के सबसे बड़े नेता हैं. प्रधानमंत्री तो नकली पिछड़े हैं. मायावती ने कहा कि मुलायम सिंह जी ने मैनपुरी के लिए बहुत काम किया है, उन्हें भारी वोटों से जीता देना.

क्या था गेस्ट हाउस कांड?

दरअसल, 2 जून 1995 को राजधानी लखनऊ के मीराबाई रोड स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में हुई घटना देश की राजनीति के लिए किसी कलंक से कम नहीं थी. उस दिन बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ न सिर्फ मारपीट हुई बल्कि उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए थे. मायावती के जीवन पर लिखी गई अजय बोस की किताब में ‘गेस्ट हाउस कांड’ का तफ्तीश के साथ जिक्र किया गया है. बोस की किताब ‘बहनजी’ के मुताबिक, उस दिन बसपा के विधायक मायावती को अकेला छोड़कर भाग गए थे, लेकिन बीजेपी विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने उनकी जान बचाई थी.

दरअसल, बाबरी विध्वंस के बाद 1993 में यूपी की सियासत में गठबंधन की नई पटकथा लिखी गई. सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव और बसपा अध्यक्ष कांशीराम ने बीजेपी को रोकने के लिए गठबंधन किया. जनता ने बहुमत भी दिया. मुलायम सिंह के नेतृत्व में गठबंधन की सरकार बनी. इसके बाद 2 जून 1995 को एक रैली में मायावती ने सपा से गठबंधन वापसी की घोषणा कर दी. अचानक हुई इस घोषणा से मुलायम सरकार अल्पमत में आ गई.

उसके बाद राज्य सरकार के गेस्ट हाउस में सपा कार्यकर्ताओं की उन्मादी भीड़ ने जो किया, वह यूपी के सियासी इतिहास में किसी बदनुमा दाग से कम नहीं था. किताब 'बहनजी' के मुताबिक भीड़ एक दलित महिला नेता को भद्दी-भद्दी गालियां दे रही थी. यह भीड़ उनकी आबरू लूटने पर आमादा थी. उस दिन गेस्ट हाउस में क्या हुआ था, यह आज भी लोगों के लिए कौतुहल का विषय है.अजय बोस की किताब के मुताबिक, सरकार अल्पमत में आने के बाद सपा नेता बहुमत का जुगाड़ बैठाने में जुट गए. उस वक्त मायावती मीराबाई रोड स्थित गेस्ट हाउस के कमरा नंबर-1 में ठहरी हुई थीं. कहा जाता है कि बसपा विधायकों का जबरन समर्थन लेने के लिए सपा कार्यकर्ताओं की भीड़ ने गेस्ट हाउस पर हमला किया.

किताब के मुताबिक गाली-गलौज करते और शोर मचाते सपा समर्थकों ने गेस्ट हाउस पर धावा बोल दिया. सपा नेताओं ने मायावती को कमरे में बंद कर उनके साथ मारपीट की. उनके कपड़े फाड़ दिए. इन सब के बीच वहां मौजूद बसपा विधायक और नेता मायावती को बचाने की जगह फरार हो गए. ऐसे में मायावती की जान बचाने के लिए बीजेपी विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी पहुंचे. द्विवेदी ने दरवाजा तोड़कर मायावती को सुरक्षित बाहर निकाला.

अजय बोस के मुताबिक सपा समर्थकों ने पांच बसपा विधायकों का अपहरण कर जबरन सादे कागज़ पर हस्ताक्षर करवाए. तत्कालीन एसएसपी और मौजूदा डीजीपी ओपी सिंह पर घटना के दौरान एक्शन न लेने का भी आरोप लगा था.

 
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