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मैनपुरी में छात्रा की संदिग्ध मौत मामले में SIT का गठन, महीने भर में जांच होगी पूरी

मैनपुरी में नवोदय विद्यालय की छात्रा की मौत मामले में हाईकोर्ट को डीजीपी यूपी ने जानकारी दी है कि एसआईटी का गठन कर दिया गया है.  (File Photo)

मैनपुरी में नवोदय विद्यालय की छात्रा की मौत मामले में हाईकोर्ट को डीजीपी यूपी ने जानकारी दी है कि एसआईटी का गठन कर दिया गया है. (File Photo)

UP News: नवोदय विद्यालय के हॉस्टल में 16 सितंबर 2019 को छात्रा की संदिग्ध हालातों में मौत हो गई थी. डीजीपी ने बताया कि जांच में लापरवाही पर तत्कालीन एएसपी, डिप्टी एसपी व इंस्पेक्टर विवेचक को सस्पेंड कर दिया गया है.

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मैनपुरी. उत्तर प्रदेश के मैनपुरी (Mainpuri) में नवोदय विद्यालय की छात्रा की मौत के मामले में डीजीपी मुकुल गोयल ने 6 अफसरों की एसआईटी बनाई है. एसआईटी में एडीजी कानपुर जोन भानु भास्कर, आईजी एटीएस जीके गोस्वामी, आईजी कानपुर मोहित अग्रवाल, एसपी मैनपुरी अशोक कुमार, एएसपी एसटीएफ राकेश यादव और कानपुर देहात की डिप्टी एसपी तनु उपाध्याय होंगी. एसआईटी एक महीने के अंदर जांच पूरी कर डीजीपी को रिपोर्ट देगी.

बता दें 16 सितंबर 2019 को छात्रा की संदिग्ध हालातों में मौत हो गई थी. नवोदय विद्यालय के हॉस्टल में फंदे से उसका शव लटकता मिला था. इसी मामले में डीजीपी इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेश हुए थे. हाईकोर्ट ने एसआईटी को 6 हफ्ते में अपनी जांच पूरी करने का निर्देश दिया है. डीजीपी ने कोर्ट को बताया कि जांच में लापरवाही पर तत्कालीन एएसपी, डिप्टी एसपी व इंस्पेक्टर विवेचक को सस्पेंड कर दिया गया है.

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस मामले में जांच से हाईकोर्ट बार एसोसिएशन व कोर्ट को भी अवगत कराया जाये. साथ ही लड़की के माता-पिता को सुरक्षा मुहैया कराने का भी निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश की प्रति जिला जज मैनपुरी को भी भेजी जाये, जिसे वहां के सभी न्यायिक अधिकारियों को सर्कुलेट किया जाय.

हाईकोर्ट ने कहा कि बलात्कार के मामले में दो माह में जांच पूरी करने को लेकर सर्कुलर जारी किया जाये और विवेचना पुलिस का प्रशिक्षण कराया जाये. डीजीपी ने कोर्ट को बताया कि मैनपुरी के तत्कालीन रिटायर एसपी को सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान रोक दिया गया है. उन्हें केवल प्राविजनल पेंशन का भुगतान किया जा रहा है.

हाईकोर्ट ने इस दौरान कहा कि स्वर्ग कहीं और नहीं है. सबको अपने कर्मों का फल यहीं भुगतान पड़ता है. कोर्ट ने डीजीपी से यह भी कहा कि पुलिस को जांच के लिए ट्रेनिंग की जरूरत है. अधिकांश जांच कांस्टेबल करता है. दरोगा कभी-कभी जाता है.

दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मैनपुरी में दो साल पहले जवाहर नवोदय विद्यालय में एक नाबालिग छात्रा की फांसी लगाकर आत्महत्या के मामले में सवालों का जवाब न दे पाने पर नाराजगी जताते हुए डीजीपी मुकुल गोयल को रोक लिया था. एक्टिंग चीफ जस्टिस एमएन भंडारी और जस्टिस एके ओझा के खंडपीठ ने डीजीपी के अलावा आईजी मोहित अग्रवाल व इस मामले में गठित एसआईटी के सदस्य पुलिस अधिकारियों को भी गुरुवार को फिर हाजिर होने का निर्देश दिया था.

गौरतलब है कि 16 सितंबर 2019 को 16 वर्षीय एक छात्रा अपने जवाहर नवोदय स्कूल में फांसी पर लटकती मिली थी. पुलिस ने शुरू में दावा किया था कि आत्महत्या का मामला है. दूसरी ओर उसकी मां ने आरोप लगाया था कि उसे परेशान किया गया, पीटा गया और जब वह मर गई तो उसे फांसी के फंदे पर लटका दिया गया. घटना को लेकर छात्रों ने प्रोटेस्ट किया था. परिवार ने भी कई दिनों तक धरना दिया था. मृतका के पिता ने मुख्यमंत्री से जांच की गुहार लगाई तो एसआईटी ने जांच की गई. 24 अगस्त 2021 को एसआईटी ने केस डायरी हाईकोर्ट में पेश की थी. कोर्ट ने कहा कि छात्रा के पिता का बयान दर्ज नहीं किया जाना संदेह पैदा करता है.

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