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UP Election 2022 : अखिलेश यादव ने 'सुरक्षित' समाजवादी गढ़ करहल को क्यों चुना? जानिए इनसाइड स्टोरी

UP Election 2022 : अखिलेश यादव ने 'सुरक्षित' समाजवादी गढ़ करहल को क्यों चुना? जानिए इनसाइड स्टोरी

अखिलेश यादव पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं. (फोटो- Akhilesh Yadav Twitter)

अखिलेश यादव पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं. (फोटो- Akhilesh Yadav Twitter)

UP Election 2022: यूपी विधानसभा चुनाव दिनों दिन दिलचस्‍प होता जा रहा है. वहीं, सपा प्रमुख और यूपी के पूर्व मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) मैनपुरी की करहल विधानसभा सीट (Karhal Assembly Seat) से चुनाव लड़ने के कारण चर्चा में हैं. बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने यादव बाहुल्‍य बेल्ट में खराब प्रदर्शन किया था.दरअसल मैनपुरी, एटा, फिरोजाबाद, इटावा, फर्रुखाबाद, कन्नौज और औरैया जैसे जिलों में भाजपा ने 20 सीटें जीती थीं, तो वहीं समाजवादी पार्टी महज 6 सीटें ही जीत पायी थी. इन 6 सीटों में से भी 3 मैनपुरी जिले के अंतर्गत आती हैं. इसी वजह से सपा प्रमुख ने करहल को चुना है. जबकि यहां से चुनाव लड़ने से अन्‍य जिलों पर भी फर्क पड़ेगा.

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नीतिका दीक्षित 

लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Election 2022) में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) मैनपुरी की करहल विधानसभा सीट (Karhal Assembly Seat)से चुनाव लड़ेंगे. करहल सपा का गढ़ है और समाजवादी पार्टी के गठन के बाद से 7 में से 6 बार यह सीट सपा के नाम रही है. उससे पहले भी इस सीट पर जनता पार्टी, लोक दाल और भारतीय क्रांति दल जैसे सपा के अग्रदूतों का ही दबदबा रहा है. हालांकि करहल ऐसी सीट नहीं है जिसका प्रतिनिधित्व यादव कुनबा करता हो बल्कि यादव परिवार का घरेलू मैदान तो इटावा जिले की जसवंतनगर सीट है. जसवंतनगर का प्रतिनिधित्व इस बार अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव कर रहे हैं. इससे पहले वह इस सीट से 5 बार विधायक बन चुके हैं. जबकि मुलायम सिंह यादव इस सीट से 7 बार चुनाव जीत चुके हैं.

विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने के साथ अटकलें यह भी थीं कि अखिलेश यादव आजमगढ़ की गोपालपुर सीट से चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन आजमगढ़ की किसी सीट को चुना होता तो इस कदम को पार्टी के पारंपरिक मुस्लिम-यादव संयोजन को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जाता. बता दें कि आजमगढ़ की गोपालपुर विधानसभा में मुस्लिम-यादव मिलकर आबादी का 40 फीसदी हिस्सा बनाते हैं. यही नहीं, अखिलेश के गोपालपुर सीट से लड़ने की अटकलों पर बीजेपी समर्थक भी उनकी आलोचना कर रहे थे और उनके इस फैसले की तुलना राहुल गांधी के केरल के वायनाड से चुनाव लड़ने के फैसले से की जा रही थी.

वहीं, मैनपुरी के करहल की बात करें तो स्थितियां गोपालपुर के विपरीत हैं, जहां मुस्लिम आबादी महज 6 फीसदी है. कहरल में यादव वोटर्स का एक बड़ा हिस्सा है और साथ ही अन्य छोटे समुदाय भी शामिल हैं जिसमें मुख्य रूप से शाक्य समाज के लोग हैं. जबकि करहल से लड़ना अन्य जातियों पर भी समाजवादी पार्टी के विस्तार का एक प्रयास हो सकता है. खास तौर पर तब जब स्वामी प्रसाद मौर्य समाजवादी पार्टी से जुड़ गए हैं, जो की उसी शाक्य /मौर्य समुदाय का एक हिस्सा हैं.

इसका प्रभाव क्या हो सकता है ?
बता दें कि 2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने यादव बाहुल्‍य बेल्ट में खराब प्रदर्शन किया था, जहां मैनपुरी, एटा, फिरोजाबाद, इटावा, फर्रुखाबाद, कन्नौज और औरैया जैसे जिलों में भाजपा ने 20 सीटें जीती थीं, तो वहीं समाजवादी पार्टी महज 6 सीटें ही जीत पायी थी. इन 6 सीटों में से भी 3 मैनपुरी जिले के अंतर्गत आती हैं. यह इस क्षेत्र का एकमात्र जिला है, जहां सपा को भाजपा से ज्‍यादा सीटें मिलीं. अगर समाजवादी पार्टी भाजपा को हराना चाहती है, तो इन क्षेत्रों की सीटों की संख्या पर उन्हें ज्‍यादा ध्यान देना होगा, तभी शायद अखिलेश यादव करहल से चुनाव लड़ रहे हैं.

समाजवादी पार्टी के लिए यह कितना सुरक्षित है करहल ?
अखिलेश यादव के इस कदम की योगी आदित्यनाथ से तुलना की जा रही है. जिस तरह बीजेपी एक सुरक्षित सीट से योगी आदित्यनाथ को चुनावी मैदान में उतार रही है,उसी तरह से अखिलेश भी करहल जो कि समाजवादी पार्टी के लिए एक सुरक्षित सीट है, वहां से चुनावी मैदान में हैं. साफ है कि अखिलेश यहां पर सेफ खेल रहे हैं, क्‍योंकि उन्होंने चुनाव लड़ने की बीजेपी की चुनौती को स्वीकार तो किया, लेकिन ऐसी सीट से लड़ाई में शामिल नहीं हुए जो की समाजवादी पार्टी के लिए जोखिम भरी हो.

बहरहाल जिस तरह से पश्चिमी बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने सिंगूर सीट से चुनाव लड़ा. हालांकि वो सुवेंदु अधिकारी से जीत नहीं सकीं, लेकिन इसका प्रभाव टीएमसी को अन्य सीटों पर जीत के रूप में देखने को मिला. उसी तरह से अखिलेश यादव का ये पॉलिटिकल स्टेप भी सोचा समझा हुआ है और निश्चित तौर पर यह सीटों के आकड़ों पर असर डालने वाला है.

Tags: Akhilesh yadav, CM Yogi Adityanath, Mainpuri News, Samajwadi party, Uttar Pradesh Assembly Elections, Uttar Pradesh Elections

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