बस हादसा: यूपी रोडवेज की इस बड़ी लापरवाही से हुई 29 यात्रियों की मौत

बताया जा रहा है कि ड्राइवर को झपकी आने के कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ है. अगर रोडवेज के अधिकारी रविवार की रात ज़रा भी चौंकन्ने होते तो 29 लोगों की जान नहीं जाती.

नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: July 8, 2019, 2:53 PM IST
नासिर हुसैन
नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: July 8, 2019, 2:53 PM IST
यूपी रोडवेज की एक लापरवाही ने बस में बैठे 29 यात्रियों को मौत के अगोश में सुला दिया. यमुना एक्सप्रेस वे पर दौड़ती बस नीचे गहरे नाले में आ गिरी. जब तक राहत कार्य शुरु होता और लोगों को नाले से निकाला जाता तब तक 29 लोगों की मौत हो चुकी थी. मरने वालों में एक बच्चा और एक महिला भी है.

बताया जा रहा है कि ड्राइवर को झपकी आने के कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ है. अगर रोडवेज के अधिकारी रविवार की रात ज़रा भी चौंकन्ने होते तो 29 लोगों की जान नहीं जाती. सब कुछ जानते हुए भी लखनऊ से ही बस में एक ड्राइवर भेजा गया था. जबकि नियमानुसार एक ड्राइवर एक दिन में सिर्फ 400 किमी ही बस चला सकता है.

यूपी रोडवेज में सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक रहे रिटायर्ड ओपी मिश्रा का इस बारे में कहना है, “दिन हो या रात एक ड्राइवर 400 किमी ही बस चलाएगा. 400 किमी पूरे होते ही दूसरे ड्राइवर को बस दे दी जाएगी. लेकिन इस बस में एक ही ड्राइवर बताया जा रहा है. जबकि लखनऊ से आनन्द विहार, दिल्ली की दूरी 500 किमी से अधिक है. बावजूद इसके डिपो से बस पर एक ही ड्राइवर भेजा गया.”

फोटो- बस यात्रियों का सामान जो नाले में से निकाला गया.


यूपी रोडवेज में ड्राइवर रहे रिटायर्ड महबूब अली बताते हैं, “लगभग वर्ष 1982 तक लम्बी दूरी की बसों में ड्राइवर और कंडक्टर रास्ते में ही बदले जाते थे. जैसे ही ड्राइवर अपनी दूरी पूरी कर लेता था तो रास्ते में ही दूसरा ड्राइवर उसकी जगह पर बस संभाल लेता था.

फोटो- नाले में से बस को निकालने की कोशिश करते राहत दल के सदस्य.


लेकिन इस व्यवस्था को बंद कर दिया गया. बाद में यह नियम लागू हुआ कि बस में दो ड्राइवर जाएंगे. एक सोएगा और दूसरा बस चलाएगा. लेकिन इससे ड्राइवर की नींद तो पूरी हो जाती थी, लेकिन सफर की थकान नहीं मिटती थी. तो हालत ज्यों की त्यों रहती थी. लेकिन ये व्यवस्था भी बंद कर दी गई.”
First published: July 8, 2019, 1:19 PM IST
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