यमुना एक्सप्रेसवे हादसा: जिस बस एक्सीडेंट में 29 मरे उसकी एफआईआर पुलिस ने 16 दिन बाद की

29 लोगों की मौत पर एफआईआर दर्ज करने तक की जरूरत नहीं समझी. यहां तक की हादसे की जांच भी नहीं कराई गई. बिना जांच के ही अपनी जनरल डायरी (जीडी) में टिप्पणी दर्ज कर दी.

News18Hindi
Updated: July 30, 2019, 2:45 PM IST
यमुना एक्सप्रेसवे हादसा: जिस बस एक्सीडेंट में 29 मरे उसकी एफआईआर पुलिस ने 16 दिन बाद की
फाइल फोटो- लखनऊ से दिल्ली जाते हुए आगरा में यमुना एक्सप्रेसवे पर बस हादसा हुआ था.
News18Hindi
Updated: July 30, 2019, 2:45 PM IST
यमुना एक्सप्रेसवे पर यूपी रोडवेज की जनरथ बस हादसे का शिकार हो गई. हादसे में 29 लोगों की मौत हो गई. बस एक्सप्रेसवे से नीचे एक नाले में गिर गई. बड़ी मुश्किल से करीब दो दर्जन लोगों को बचाया गया. लेकिन इतने बड़े हादसे को भी पुलिस ने हल्के में निपटा दिया. 29 लोगों की मौत पर एफआईआर दर्ज करने तक की जरूरत नहीं समझी. यहां तक की हादसे की जांच भी नहीं कराई गई. बिना जांच के ही अपनी जनरल डायरी (जीडी) में टिप्पणी दर्ज कर दी.

एफआईआर दर्ज करने के बजाए पुलिस ने डाला तस्करा

जीडी में दर्ज होने वाली पुलिसिया लिखा-पढ़ी को तस्करा भी कहा जाता है. जब आठ जुलाई को बस का एक्सीडेंट हुआ तो आगरा पुलिस के अनुसार उसने उसी दिन तस्करा डाल दिया था. जहां बताया गया था कि इतने बजे, फलां जगह पर बस का एक्सीडेंट हुआ है और इतने लोग मारे गए हैं. लेकिन एफआईआर न तो घटना वाले दिन दर्ज की गई और न ही उसके बाद.

इस बारे में इंस्पेक्टर रिटायर्ड वीके सिंह बताते हैं कि वैसे होना तो यह चाहिए था कि जिस दिन बस हादसा हुआ था उस दिन पुलिस खुद से संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज कर सकती थी. ऐसा कई मामलों में होता है.

फाइल फोटो- यमुना एक्सप्रेसवे से बस सीधे नीचे बह रहे नाले में जा गिरी थी.


यात्रियों को बचाने वाले युवक को बनाया मोहरा

जब मामला खुला कि घटना के 15 दिन बाद भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की है तो पुलिस अलर्ट हो गई. आनन-फानन में उसने एफआईआर दर्ज करने की तैयारी कर ली. लेकिन खुद से एफआईआर दर्ज करने के बजाए पुलिस एक स्थानीय युवक निहाल सिंह को पकड़ लाई. यह वही युवक हो जो एक्सीडेंट के वक्त सबसे पहले पहुंचा था और अकेले ही कई यात्रियों की जान बचाई थी. पुलिस ने इसी युवक से तहरीर लिखवाकर थाने में एफआईआर दर्ज कर ली है. इस बात की तस्दीक न्यूज18 हिन्दी के साथ बातचीत में सीओ अतुल कुमार सोनकर ने भी की है.
Loading...

तो क्या बिना जांच-एफआईआर के हादसे का कारण तलाश लिया

आगरा के एक स्थानीय अखबार की मानें तो पुलिस ने बिना एफआईआर और जांच के आगरा पुलिस हादसे का कारण भी तलाश लाई. अगर अखबार की मानें तो पुलिस ने जीडी में यह भी दर्ज कर दिया है कि बस हादसा ड्राइवर को झपकी आने की वजह से हुआ था. जबकि बिना एफआईआर दर्ज किए पुलिस जांच शुरु नहीं करती है.

फाइल फोटो- मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार बस नाले में आधी डूब गई थी.


क्या हुआ था आठ जुलाई की सुबह 

आठ जुलाई की सुबह लखनऊ से दिल्ली जा रही जनरथ बस का एक्सीडेंट हो गया था. बस तेज रफ्तार के साथ नीचे नाले में जा गिरी थी. मौके पर ही 29 लोगों की मौत हो गई थी. बस का ड्राइवर भी एक्सीडेंट में मारा गया था. हादसे के बाद कई दिन तक हो-हल्ला मचा था. घटना के बाद अलग-अलग अधिकारियों द्वारा एक्सीडेंट के अलग-अलग कारण बताए जा रहे थे. कुछ अधिकारियों का कहना था कि यह हादसा बस के ड्राइवर को झपकी आने के कारण हुआ है.

ये भी पढ़ें- बस हादसा: 3 मिनट में 6 किमी दौड़ी थी जनरथ, टोल प्लाजा और एक्सप्रेसवे की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

यमुना एक्सप्रेस वे हादसा: चश्मदीद महिला यात्री ने बताया- बस जैसे ही टोल प्लाजा से रवाना हुई ड्राइवर....

बस हादसा: नींद की झपकी नहीं यह है एक्सीडेंट की वजह, बस में नहीं थी यह डिवाइस

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए आगरा से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: July 30, 2019, 2:45 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...