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मथुराः ट्रीटमेंट-प्लांट बना यमुना के जहरीले पानी को स्वच्छ करने का किया दावा

News18 Uttar Pradesh
Updated: November 22, 2019, 7:14 PM IST
मथुराः ट्रीटमेंट-प्लांट बना यमुना के जहरीले पानी को स्वच्छ करने का किया दावा
मथुरा में नालियों और फैक्ट्रियों के गंदे पानी से प्रदूषित हो रही यमुना नदी.

मथुरा (Mathura) में गंदी नालियों (Drainage) और उद्योगों का केमिकलयुक्त पानी (Chemical Waste) यमुना नदी (Yamuna River) को विषैला बनाता जा रहा है. प्रदूषण विभाग (Pollution Board) की सुस्ती को देख एक गैर-सरकारी संस्था ने वाटर-ट्रीटमेंट प्लांट (Treatment Plant) बनाकर नदी के पानी को दोबारा स्वच्छ करने का दावा किया है.

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मथुरा. कान्हा की नगरी में जिस यमुना नदी (Yamuna River) का दर्शन करने देश-विदेश के लोग पहुंचते हैं, वह पवित्र नदी लगातार प्रदूषित होती जा रही है. प्रदूषण विभाग (Pollution Board) की सुस्ती के कारण न तो गंदे नालों का बहाव रोका जा रहा है और न ही उद्योगों के अपशिष्ट नदी में गिराने पर रोक लग पा रही है. यमुना नदी में शहर की 22 गंदी नालियों (Drainage) का पानी सीधे गिरता है. वहीं यहां पर चांदी, पीतल और गिल्हट से बनने वाले बर्तनों को साफ करने के लिए जिस एसिड का इस्तेमाल किया जाता है, उसका अपशिष्ट (Chemical Waste) भी नदी में ही बहा दिया जाता है. गंदे और केमिकलयुक्त पानी की वजह से यमुना नदी और जहरीली होती जा रही है. नदी की इस स्थिति को देख मथुरा में कार्यरत एक गैर-सरकारी संस्था (NGO) ने अपने स्तर से ट्रीटमेंट प्लांट (Water Treatment Plant) बनाकर यमुना के पानी को दोबारा निर्मल और स्वच्छ करने का दावा किया है.

गंदी नालियों और फैक्ट्रियों से हो रहा प्रदूषण
मथुरा में व्यापक स्तर पर चांदी, गिल्हट, तांबे और पीतल के बर्तन का कारोबार होता है. इन धातुओं में चमक लाने के लिए इस्तेमाल होने वाले केमिकल में एसिड होता है. प्रदूषण विभाग के मुताबिक मथुरा में वर्तमान में इस कारोबार से जुड़ी 32 फैक्ट्रियां चल रही हैं. इन फैक्ट्रियों में इस्तेमाल के बाद बचा हुआ केमिकलयुक्त पानी सीधे नदी में बहा दिया जाता है, जिससे रोजाना हजारों लीटर एसिड आयरन युक्त पानी यमुना में जा रहा है. विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक फैक्ट्रियों में रोजाना लगभग एक टन से अधिक एसिड का इस्तेमाल होता है, जो यमुना नदी के पानी को जहरीला कर रहा है. इसके अलावा मथुरा शहर के 22 नालों का गंदा पानी भी बगैर ट्रीटमेंट के सीधे नदी में ही बहा दिया जाता है, जिससे पानी का प्रदूषण और बढ़ जाता है. प्रदेश सरकार के मंत्री श्रीकांत शर्मा भी 22 नालों का गंदा पानी यमुना में बहाने की बात मानते हैं, लेकिन उनका कहना है कि 480 करोड़ की लागत से मसानी में बन रहे एसटीपी प्लांट से यह समस्या दूर हो जाएगी. जनवरी 2021 के बाद लोगों को यमुना नदी का स्वच्छ जल उपलब्ध होगा.

An NGO claims to clean the toxic water of Yamuna River in Mathura
जेवर और बर्तन चमकाने में इस्तेमाल होने वाला एसिड और नालों का पानी यमुना के जल को जहरीला बना रहा है.


एनजीओ ने बनाया वाटर-ट्रीटमेंट प्लांट
यमुना को प्रदूषण से बचाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता श्याम सिंह लंबे अर्से से काम कर रहे हैं. उन्होंने स्थानीय लोगों के सहयोग से यमुना प्रदूषण मुक्त जलवायु परिवर्तन नामक संस्था बनाई है. श्याम सिंह का कहना है कि धातु के बर्तनों और जेवर आदि को चमकाने के लिए मथुरा की फैक्ट्रियों में जिस एसिड का इस्तेमाल किया जाता है, वह उपयोग के बाद काला हो जाता है. इस केमिकलयुक्त पानी में बड़ी मात्रा में आयरन होता है, जिसे साफ करना बहुत कठिन है. इस संस्था ने इस विषैले पानी को साफ करने के लिए जन-सहयोग से एक ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किया है. श्याम सिंह का दावा है कि उनके बनाए प्लांट में साफ किए गए पानी को दिल्ली की लैब ने भी टेस्ट के बाद पीने लायक बताया है. श्याम सिंह ने कहा कि दिल्ली के लैब की रिपोर्ट आने के बाद उनकी संस्था ने प्रदूषण विभाग के अधिकारी अरविंद सिंह से मुलाकात की और प्रदेश के मुख्य सचिव (प्रदूषण) को भी पत्र लिखा. उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनके बताए फॉर्मूले पर काम करे, तो यमुना नदी का पानी फिर से निर्मल और स्वच्छ हो सकता है.

An NGO claims to clean the toxic water of Yamuna River in Mathura
यमुना प्रदूषण मुक्त जलवायु परिवर्तन नामक संस्था ने नदी के पानी को स्वच्छ बनाने का फॉर्मूला इजाद किया है.

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सवालों से बचते रहे प्रदूषण विभाग के अधिकारी
यमुना नदी के प्रदूषण और गैर-सरकारी संस्था के दावों को लेकर जब न्यूज 18 ने प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी अरविंद सिंह से बात करने की कोशिश की तो कहा गया कि वे छुट्टी पर हैं. उनकी जगह प्रभारी के तौर पर काम कर रहे डीके गुप्ता ने इस बाबत कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. मथुरा में चल रही फैक्ट्रियों या छोटे उद्योगों पर कार्रवाई के बारे में पूछे गए सवाल का भी बोर्ड की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया. वहीं, मामले में जब न्यूज 18 ने आगरा मंडल के कमिश्नर अनिल कुमार से बात की, तो उन्होंने कहा कि यमुना में प्रदूषित पानी बहाने की जांच कराई जाएगी.

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First published: November 22, 2019, 7:14 PM IST
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