जहां गाय पर बोल रहे थे PM मोदी, वहां ऐसे चलती है देश की सबसे गौशाला, 45 हजार हैं गोवंश

नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: September 11, 2019, 11:04 PM IST
जहां गाय पर बोल रहे थे PM मोदी, वहां ऐसे चलती है देश की सबसे गौशाला, 45 हजार हैं गोवंश
फोटो- गायों के स्वस्थ्य और टीकाकरण से संबंधित कई परियोजनाओं की पीएम नरेन्द्र मोदी ने मथुरा से घोषणा की.

मथुरा (Mathura) से पीएम नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने एक बड़ा बयान दिया है. उनका कहना है कि गोवंश (Cow) का जिक्र आते ही कुछ लोगों के बाल खड़े हो जाते हैं.

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मथुरा. कान्हा की नगरी मथुरा (Mathura) से पीएम नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने एक बड़ा बयान दिया है. उनका कहना है कि गोवंश (Cow) का जिक्र आते ही कुछ लोगों के बाल खड़े हो जाते हैं. इस मौके पर वहां मौजूद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) ने कहा कि अब देश में ऐसी टेक्नॉलोजी का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे सिर्फ बछिया ही पैदा होंगी. बुधवार को मथुरा में हुए एक बड़े कार्यक्रम में पशुओं के आरोग्य से जुड़ी योजना और टीकाकरण की कई परियोजनाओं की शुरुआत की गई.

खास बात यह है कि जहां यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था वहां से थोड़ी ही दूरी पर 117 एकड़ में फैली एक ऐसी गौशाला संचालित हो रही है, जिसके देशभर में सबसे बड़ी होने का दावा किया जाता है. इस गौशाला को रमेश बाबा से जुड़ी मानमंदिर ट्रस्ट चला रही है. यहां 45 हजार से अधिक गायों को पाला जा रहा है.

इसलिए सबसे बड़ी गौशाला होने का किया जाता है दावा

गौशाला के एक सेवक ब्रजेन्द्र शर्मा बताते हैं कि ये गौशाला मथुरा के बरसाना में मानपुर गांव में संचालित हो रही है. ये 117 एकड़ में फैली हुई है. उन्होंने बताया कि 7 जुलाई 2007 को पांच गायों से इसकी शुरुआत हुई थी. उस वक्त इसे एक बड़ी गौशाला का रूप देने की मंशा नहीं थी. पहाड़ी पर स्थित मानमंदिर में आने वाले साधु-संतों की दूध की जरूरत को पूरा करने के लिए इसकी शुरुआत की गई थी. लेकिन आज इसमें गायों के साथ-साथ 24,000 से अधिक सांड और बछड़े भी हैं.

इसलिए मानमंदिर गौशाला के सबसे बड़ी होने का दावा किया जाता है.


28 से 30 लाख रुपये रोज खर्च होता है गायों पर

शर्मा का कहना है कि गौशाला में 45 हजार गायों की देखभाल करने के लिए 370 कर्मचारी हैं. डीजल से चलने वाले कई तरह के वाहन भी गौशाला की साफ-सफाई और चारे का इंतजाम करने में लगे हैं. गायों का पेट भरने के लिए हरा चारा, भूसा, चूनी, खल और दूसरी चीजें खिलाई जाती हैं. इसमें रोजाना 28 से 30 लाख रुपये तक का खर्च आता है.
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बाजार से रोज आता है 1200 किलो हरा चारा

गौसेवक राधाकांत शास्त्री बताते हैं कि सर्दी और बरसात के मौसम में गायों के लिए हरा चारा आसानी से मिल जाता है. आजकल बाजार में खूब हरा चारा मौजूद है. भूसे और चूनी के साथ गायों को हरा चारा मिलाकर दिया जाता है. इस वक्त रोज गौशाला में 1200 किलो से अधिक हरा चारा आ रहा है. इसके अलावा सफल मटर कंपनी, कासगंज से मटर के छिलके और दूसरे जिलों से गन्‍ना (ईंख) भी मंगाया जा रहा है.

मिक्चर से तैयार होता चारा

हमने देखा कि गोपालन में मशीनों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. चारा तैयार करने के लिए यहां 8 बड़े मिक्सर हैं. इनमें भूसा, चूनी, खल और हरा चारा डाल दिया जाता है. मिक्सर इन सब को मिलाकर चारा तैयार कर देता है. इसके बाद इसी मिक्सर की सहायता से गायों के बाड़े में चारा डाल दिया जाता है. मिक्सर की मदद करने के लिए जेसीबी और टैक्टर भी लगे हुए हैं.

फोटो- यह है पहाड़ी से लिया गया गौशाला का एक सीन.


315 टन भूसे की हर रोज होती है जरूरत

हरा चारा तो स्‍थानीय स्‍तर पर मिल जाता है. भूसा मध्य प्रदेश से आता है. एक गाय हर रोज करीब 7 से 8 किलो भूसा खाती है. इस लिहाज से रोजाना 45 हजार गायों के लिए 315 टन भूसे की जरूरत होती है. इसी तरह से एक गाय को हर रोज करीब डेढ़ किलो चोकर दी जाती है. जिसके लिए 68 टन चोकर की जरूरत पड़ती है.

बछड़ों को पिला दिया जाता है दूध

इस वक्त गाेशाला में करीब 1300 से 1500 गायें ऐसी हैं, जो पांच लीटर या उससे कम दूध दे रही हैं. इस दूध को निकाला नहीं जाता. गाेशाला में बछड़े भी हैं, जिन्हें ये दूध पिला दिया जाता है. इसी के साथ गाेशाला में 700 ऐसी गायें हैं, जो आठ लीटर तक दूध दे रही हैं. इस दूध को निकालकर दिल्ली की एक डेयरी को दे दिया जाता है. इस पैसे को गाेशाला में ही खर्च कर दिया जाता है.

फोटो- यह वो मिक्सर हैं जिनसे गायों के लिए चारा बनाया जाता है.


बीमार गायों का इलाज भी किया जाता है यहां

गाेशाला में बीमार गायों को भी लेते हैं. बीमार गाय लेने के बाद गाेशाला में ही उनकी सेवा की जाती है. डॉक्टर से इलाज कराया जाता है. गाेशाला में ही दवाई भी रखी जाती हैं. सैकड़ों गायें आज ठीक होकर गाेशाला में घूम रही हैं. जब हम गोशाला में घूम रहे थे, उसी वक्‍त डॉक्‍टर कुछ बीमार गायों का इलाज करने में जुटे हुए थे.

गाेशाला में गौमूत्र से बनाई जा रही हैं दवाई

गाेशाला में बड़ी मात्रा में गौमूत्र भी जमा होता है. इस गौमूत्र का इस्तेमाल दवाई बनाने में होता है. गाेमूत्र को फिल्टर कर दवाई में डाला जाता है. इसके लिए गाेशाला में अलग से एक फॉर्मेसी बनाई गई है. फॉर्मेसी के जरिए ही दवाई सभी लोगों को बेची जाती है.

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First published: September 11, 2019, 7:56 PM IST
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