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RTI से मांगा श्रीकृष्ण का बर्थ सर्टिफिकेट, असमंजस में मथुरा के अधिकारी

सांकेतिक तस्वीर

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आरटीआई में यह भी पूछा है कि उन्हें बताया जाए कि क्या वे सच में भगवान थे? और थे, तो कैसे? उनके भगवान होने की प्रमाणिकता भी उपलब्ध कराई जाए.

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छत्तीसगढ़ के एक आरटीआई कार्यकर्ता ने मथुरा के जिला प्रशासन से भगवान कृष्ण के जन्म, उनके गांव, उनके द्वारा ब्रज की लीलाओं आदि के संबंध में कई जानकारियां मांगी हैं. इन्हें लेकर प्रशासन फिलहाल असमंजस में है.

मथुरा जिले के मुख्य जनसूचना अधिकारी और अपर जिलाधिकारी (एडीएम कानून- व्यवस्था) रमेश चंद्र का कहना है कि जनमान्यता और निजी आस्था से जुड़े इन सवालों के क्या जवाब दिए जाएं, इसे लेकर फिलहाल असमंजस में हैं.

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जनपद के गुमा गांव निवासी आरटीआई कार्यकर्ता जैनेंद्र कुमार गेंदले ने आरटीआई डालकर मथुरा जिला प्रशासन से सवाल किया है. आरटीआई में लिखा है, “विगत 3 सितम्बर को देश भर में कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर छुट्टी घोषित कर भगवान कृष्ण का जन्मदिन मनाया गया. इसलिए कृपया भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रमाणपत्र की प्रमाणित प्रतिलिपि उपलब्ध कराई जाए. जिससे यह सिद्ध हो सके कि उनका जन्म उसी दिन हुआ था.”

आरटीआई में यह भी पूछा है कि उन्हें बताया जाए कि क्या वे सच में भगवान थे? और थे, तो कैसे? उनके भगवान होने की प्रमाणिकता भी उपलब्ध कराई जाए. गेंदले ने यह भी पूछा है कि भगवान कृष्ण का गांव कौन सा था? उन्होंने कहां-कहां लीलाएं कीं?

गेंदले के अजीबोगरीब सवालों से पशोपेश में पड़े एडीएम (कानून एवं व्यवस्था) रमेश चंद्र का कहना है कि जनमान्यता एवं निजी आस्था से जुड़े इन सवालों के क्या जवाब दिए जाएं, इसे लेकर फिलहाल असमंजस में हैं. उन्होंने कहा, “हिदूं धर्म से संबंधित तमाम ग्रंथों, पुस्तकों आदि में इस प्रकार के वर्णन मौजूद हैं कि भगवान कृष्ण का जन्म द्वापर युग में तत्कालीन शौरसेन (जिसे वर्तमान में मथुरा के नाम से जाना जाता है) जनपद में हुआ था. उन्होंने यहां के राजा कंस का वध करने के पश्चात द्वारिका गमन से पूर्व पग-पग पर अनेक लीलाएं की थीं.” इसलिए धार्मिक आस्था से जुड़े ऐसे सवालों के क्या जवाब दिए जाएं, इस पर विचार किया जा रहा है.

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UP News: अब मथुरा के किसान भी पंजाब और हरियाणा की राह पर, क‍िसान नेताओं की धमकी- 29 सितम्बर से टोल फ्री करा देंगे

बीकेयू (अम्बावता) के जिला अध्यक्ष राजकुमार तोमर के हवाले से कहा है कि यह तो केवल दो घंटे का ‘ट्रेलर’ है (फाइल फोटो)

Uttar Pradesh News: मांट टोल प्लाजा के प्रबंधक आर बी सिंह ने सम्पर्क किए जाने पर बताया कि वे मामले को निपटाने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने कहा, 'हमने इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है और उनके निर्देश का पालन किया जाएगा.' उन्होंने कहा कि यह कानून एवं व्यवस्था का प्रश्न है और इस बारे में ज्यादा कुछ कहा नहीं जा सकता.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 12:22 IST
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केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन (अम्बावता) के बैनर तले आंदोलन कर रहे किसानों ने पंजाब और हरियाणा के किसानों की तरह ही बीते मंगलवार को मथुरा के मांट टॉल प्लाजा पर दो घंटे तक कब्जा जमाए रखा और इस दौरान वहां से गुजरने वाले किसी भी वाहन को टोल नहीं देना पड़ा. पिछले एक साल से पंजाब और हरियाणा के किसानों ने राजकीय और राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा के पास नाकेबंदी कर रखी है और टोल टैक्स वसूलने नहीं दे रहे हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया ने बीकेयू (अम्बावता) के जिला अध्यक्ष राजकुमार तोमर के हवाले से कहा है कि यह तो केवल दो घंटे का ‘ट्रेलर’ है, यदि सरकार ने कृषि कानून वापस नहीं लिये तो 29 सितम्बर से टोल प्लाजा को टोल फ्री करा देंगे. उन्होंने कहा क‍ि यदि सरकार हमारी मांगों को गम्भीरता से नहीं लेती है तो पंजाब एवं हरियाणा के राजमार्गों की तरह ही यमुना एक्सप्रेसवे पर भी लोगों को बिना टोल चुकाए जाने दिया जाएगा.’

मांट टोल प्लाजा के प्रबंधक आर बी सिंह ने सम्पर्क किए जाने पर बताया कि वे मामले को निपटाने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘हमने इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है और उनके निर्देश का पालन किया जाएगा.’

उन्होंने कहा कि यह कानून एवं व्यवस्था का प्रश्न है और इस बारे में ज्यादा कुछ कहा नहीं जा सकता. रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब और हरियाणा में किसानों के आंदोलन के कारण कम से कम 50 टोल प्लाजा पर टोल वसूली बंद है, जिसके कारण प्रतिदिन पांच करोड़ की अनुमानित क्षति हो रही है. दिल्ली-चंडीगढ़ राष्ट्रीय उच्चपथ 44 स्थित सभी टोल प्लाजा पिछले आठ महीनों से किसानों के प्रदर्शन स्थल के रूप में तब्दील हो चुके हैं.

इस वर्ष मार्च में, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में दिए एक लिखित जवाब में कहा था कि तीन राज्यों में किसानों के प्रदर्शन के कारण 16 मार्च तक भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को कम से कम 814.40 करोड़ रुपये के टोल राजस्व की हानि हुई है.

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद : मथुरा की अदालत में नए सिरे से शुरू हुई सुनवाई

अदालत 29 सितंबर को फैसला सुनाएगी कि यह वाद वह स्वीकार कर रही है या खारिज.

Next hearing on September 29 : श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद को लेकर जिला न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बात सुन ली है. वे अब 29 सितंबर को वाद को स्वीकार करने या खारिज करने पर अपना निर्णय सुनाएंगे.

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मथुरा. उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद की अदालत में श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद को लेकर एक वर्ष पूर्व दाखिल किए गए मामले में मुकदमा दर्ज किए जाने अथवा याचिका खारिज किए जाने के मुद्दे पर सोमवार को जिला न्यायाधीश की अदालत में पुनः नए सिरे से सुनवाई की गई, जिसमें दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात रखी.

उल्लेखनीय है कि लखनऊ की रहनेवाली सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री सहित आधा दर्जन लोगों ने बीते साल 22 सितंबर को दीवानी न्यायाधीश सीनियर डिवीजन मथुरा की अदालत में वाद दायर किया था कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और शाही ईदगाह इंतजामिया कमेटी के बीच पहले जो समझौता हुआ था, वह पूरी तरह से अवैध है. याचिका में कहा गया था कि इसलिए शाही ईदगाह को ध्वस्त कर उक्त संपूर्ण (13.37 एकड़) भूमि उसके मूल स्वामी श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट को सौंप दी जाए. लेकिन अदालत ने उनका यह वाद खारिज कर दिया. इसके बाद उन्होंने जनपद न्यायाधीश की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की. इस याचिका पर सुनवाई के बीच दो बार जनपद न्यायाधीशों का स्थानांतरण हो चुका है.

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अब नए न्यायाधीश विवेक संगल ने सोमवार को मामले को समझने के लिए दोनों पक्षों से उनके तथ्य मांगे, जिसपर करीब एक घंटे तक बहस चली. वादियों की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, हरिशंकर जैन और पंकज वर्मा ने बहस की. अन्य पक्षों में इंतजामिया कमेटी के अलावा श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव भी मौजूद रहे. प्रथम परिवादी यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन की ओर से इस बार उनका पैरवीकर्ता गैरहाजिर रहा.

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वादी अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री ने बताया कि जिला न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बात सुन ली है. वे अब 29 सितंबर को वाद को स्वीकार करने या खारिज करने पर अपना निर्णय सुनाएंगे. गौरतलब है कि इसी प्रकरण में कई अन्य संस्थाओं और वादियों की ओर से मथुरा की अदालत में करीब आधा दर्जन से अधिक कई अन्य मामले भी विचाराधीन हैं, जिनपर इस वाद के फैसले से खासा असर पड़ने की संभावना है.

डेंगू बुखार से ज्‍यादा खतरनाक डेंगू संबंधित ये दो बीमारियां, महज एक दिन में हो रही मरीज की मौत

देश में डेंगू से ज्‍यादा डेंगू शॉक सिन्‍ड्रोम और डेंगू हैमरेजिक फीवर से मौतें हो रही हैं. 
Dengu Shock syndrome and Hemorrhagic fever:

Dengu Shock syndrome and Hemorrhagic fever: डेंगू संबंधित दोनों बीमारियां डेंगू शॉक सिन्‍ड्रोम और डेंगू हैमरेजिक फीवर ज्‍यादातर मौतों के लिए जिम्‍मेदार हैं. डेंगू के दूसरी या तीसरी स्‍टेज पर पहुंचने और पर्याप्‍त इलाज न मिलने के कारण स्‍थानीय स्‍तर पर इन बीमारियों से मरीजों की जान जा रही है.

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नई दिल्‍ली. देश में डेंगू बुखार का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. देश के कई राज्‍यों में डेंगू (Dengue) के मरीज बड़ी संख्‍या में अस्‍पतालों में पहुंच रहे हैं. वहीं सौ से ज्‍यादा बच्‍चों और बड़ों की मौत ने इस बीमारी को लेकर चिंता पैदा कर दी है. हालांकि डेंगू के मामलों के दौरान इस बार एक नया ट्रेंड दिखाई दे रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू बुखार (Dengue Fever) से ज्‍यादा खतरनाक इस समय डेंगू से ही संबंधित दो बीमारियां साबित हो रही हैं. यही वजह है कि इस बार ये बीमारी जानलेवा है और मरीजों की मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है.

एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा में डेंगू के नोडल अधिकारी बनाए गए प्रोफेसर मृदुल चतुर्वेदी ने न्‍यूज18 हिंदी से बातचीत में बताया कि डेंगू के जो मामले आ रहे हैं उनमें देखा गया है कि डेंगू बुखार से लोगों या बच्‍चों की जान नहीं गई बल्कि डेंगू की अगली स्‍टेज या कहें कि डेंगू संबंधित दोनों बीमारियां डेंगू शॉक सिन्‍ड्रोम (Dengue Shock Syndrome) और डेंगू हैमरेजिक फीवर (Dengue Hemorrhagic Fever) ज्‍यादातर मौतों के लिए जिम्‍मेदार हैं. एसएन  मेडिकल कॉलेज में आसपास के जिलों से रैफर होकर आने वाले अधिकतर मामले भी ऐसे ही रहे हैं जिनमें ये दो बीमारियां पाई गई हैं. हालांकि डेंगू के दूसरी या तीसरी स्‍टेज पर पहुंचने और पर्याप्‍त इलाज न मिलने के कारण स्‍थानीय स्‍तर पर इन बीमारियों से मरीजों की जान जा रही है.

अगस्‍त से उत्‍तरी भारत और खासतौर पर उत्‍तर प्रदेश के कई जिलों में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. dengue

अगस्‍त से उत्‍तरी भारत और खासतौर पर उत्‍तर प्रदेश के कई जिलों में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.

प्रोफेसर चतुर्वेदी कहते हैं कि कोविड की तरह ही डेंगू का भी कोई स्‍पष्‍ट इलाज नहीं है. मुख्‍य रूप से मरीज में डेंगू की पुष्टि होने के बाद उसके लक्षणों के आधार पर इलाज किया जाता है. उसकी हर ए‍क गतिविधि को मॉनिटर किया जाता है और उसको देखते हुए मरीज को आहार और दवाओं की संतुलित खुराक दी जाती है.

घर पर भी हो सकता है सामान्‍य डेंगू का इलाज
प्रो. चतुर्वेदी कहते हैं कि मेडिकल साइंस के हिसाब से डेंगू को तीन भागों में बांटा गया है. क्लासिकल (साधारण) डेंगू फीवर, डेंगू हेमरेजिक फीवर (DHF) और डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS). जहां तक सामान्‍य या साधारण डेंगू की बात है तो बिना लक्षणों वाले कोविड की तरह ही यह घर में अपने आप ठीक हो जाता है. इसके लिए बस मरीज के आहार का ध्‍यान रखना होता है और कोई भी जटिल स्थिति पैदा न हो. जबकि बाकी दोनों बीमारियां मरीज के लिए जानलेवा हो सकती हैं. इन दोनों बीमारियों का इलाज अस्‍पताल में ही संभव है. इन बीमारियों में मरीज के शरीर के अन्‍य अंगों पर प्रभाव पड़ने लगता है और उसकी हालत बिगड़ने लगती है.

क्‍या है डेंगू शॉक सिन्‍ड्रोम
डेंगू शॉक सिंड्रोम डेंगू का ही बढ़ा हुआ या अगला रूप है. यह डेंगू बुखार की दूसरी और तीसरी स्‍टेज में होता है. जब मरीज का बुखार कई दिन तक नहीं उतरता है और बदन दर्द भी होने लगता है तो इसकी शुरुआत होती है. होंठ नीले पड़ने लगते हैं. त्‍वचा पर लाल चकत्‍ते और दाने तेजी से उभरते हैं. साथ ही मरीज की नब्‍ज बहुत धीमे चलने लगती है. इसमें मरीज का तंत्रिका तंत्र खराब होने लगता है और वह लगभग सदमे की हालत में आ जाता है. इसलिए इसे डेंगू शॉक सिंड्रोम कहा जाता है. डेंगू के दौरान ब्‍लड प्रेशर भी नापना जरूरी होता है. अगर बीपी घटने लगे तो स्थिति गंभीर हो जाती है. ऐसी स्थिति में मरीज को अस्‍पताल में भर्ती कराना सबसे जरूरी होता है.

क्‍या है डेंगू हैमरेजिक फीवर

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चार सालों में सबसे अधिक मरीज डेंगू के मिले हैं. साथ ही डेंगू शॉक सिन्‍ड्रोम और हैमरेजिक फीवर इस बार खतरनाक भी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock)

डेंगू का बुखार अगर बढ़ता जाए और फिर मरीज के अंदर या बाहर रक्‍तस्‍त्राव शुरू हो जाए तो वह मरीज के लिए खतरनाक हो जाता है. डेंगू में रक्‍त धमनियों में रक्‍तस्राव होने के कारण ही इसे हैमरहेजिक फीवर (Dengue Hemorrhagic Fever) कहा जाता है. मरीज के कान, नाक, मसूढ़े, उल्‍टी या मल से खून आने लगता है. ऐसे मरीज को बहुत बेचेनी होती है और उसकी प्‍लेटलेट्स और श्‍वेत रक्‍त कणिकाएं बहुत तेजी से गिर जाती हैं. त्‍वचा पर गहरे नीले या काले रंग के बड़े बड़े चकत्‍ते पड़ जाते हैं.

महज एक दिन में हो रही बच्‍चों की मौत
मथुरा में तैनात महामारी विज्ञानी डॉ. हिमांशु मिश्र कहते हैं कि डेंगू के मुकाबले डेंगू शॉक सिन्‍ड्रोम और डेंगू हैमरेजिक फीवर इतने खतरनाक हैं कि इनकी चपेट में आने के बाद बच्‍चे एक दिन के भीतर दम तोड़ रहे हैं. वो कहते हैं कि मथुरा के आसपास डेंगू से हुई मौतें इसी कारण हुई हैं. कई-कई दिनों से बुखार में पड़े बच्‍चे जब अपना होश-हवास खोने लगते हैं तो परिजन अस्‍पताल लेकर आते हैं और डेंगू की गंभीर स्थिति में पहुंचे बच्‍चों या बड़ों को बचाना काफी मुश्किल हो जाता है. ऐसे में जरूरी है कि डेंगू के मरीजों के लक्षणों का विशेष ध्‍यान रखा जाए.

डेंगू को लेकर ये रखें ध्‍यान

. अगर बच्‍चे या बड़े को बुखार है तो उसे पैरासीटामोल दें और घर पर ही लि‍क्विड डाइट देने के साथ मच्‍छरों से बचाव का ध्‍यान रखें.

. बुखार के मरीज का बार-बार बीपी जांचते रहें. साथ ही बच्‍चा है तो उससे पूछते रहें कि कहीं से खून तो नहीं आ रहा है. अगर ऐसा कोई लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें.

. एक या दो दिन में बुखार उतर रहा है तो घबराने की बात नहीं है लेकिन अगर बुखार बढ़ रहा है तो उसे अस्‍पताल लेकर आएं और डॉक्‍टर को दिखाएं.

. अगर बुखार के साथ ही बच्‍चे के शरीर पर च‍कत्‍ते पड़ रहे हैं, वह अचेतावस्‍था में जा रहा है और उसे ठंड व कंपकंपी आ रही है तो ये लक्षण गंभीर हैं. ऐसे में बच्‍चे को बिना देर किए अस्‍पताल में लेकर पहुंचें.

. बच्‍चों को पूरी आस्‍तीन के कपड़े पहनाकर रखें, मच्‍छरों से बचाव करें. कहीं भी पानी जमा न होने दें. साफ-सफाई का ध्‍यान रखें.

Dengue Fever: क्‍या यूपी-बिहार में कोरोना जितना गंभीर हो गया है डेंगू, बढ़ते मामलों पर ये बोले विशेषज्ञ

देश में डेंगू के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. राज्‍यों में कोविड के लिए तैयार किए गए इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर को डेंगू के इलाज में इस्‍तेमाल किया जा रहा है.

Dengue fever: देश के कई राज्‍यों में डेंगू कहर बरपा रहा है. यूपी, एमपी, बिहार, हरियाणा, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्‍यों में डेंगू के मरीजों बढ़ने के साथ ही इससे अभी तक 100 से ज्‍यादा बच्‍चों की मौत हो चुकी है. बीमारी के कहर के कारण डेंगू के मरीजों के लिए अब कोविड डेडिकेटेड सुविधाओं को इस्‍तेमाल किया जा रहा है.

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नई दिल्‍ली. कोरोना के घटते मामलों से जहां देश को राहत मिल रही है वहीं मौसमी बीमारियों ने एकाएक पैर पसार लिए हैं. यूपी, बिहार, मध्‍य प्रदेश, हरियाणा और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्‍यों में बड़ी संख्‍या में बच्‍चे और बड़े डेंगू (Dengue) और वायरल फीवर (viral Fever) की चपेट में आ रहे हैं. इन राज्‍यों में अभी तक 100 से ज्‍यादा बच्‍चों की मौत इन मौसमी बीमारियों से हो चुकी है. ऐसे में इन मौसमी बीमारियों के भी कोरोना (Covid-19) की तरह गंभीर होने की आशंकाएं जताई जा रही हैं.

यूपी के कई जिलों खासकर मथुरा, फिरोजाबाद, एटा, मैनपुरी, कानपुर, लखनऊ, मेरठ और प्रयागराज आदि में डेंगू और वायरल फीवर के मरीजों के साथ ही मृतकों की संख्‍या भी बढ़ रही है. इन मामलों को लेकर स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार देश में डेंगू काफी खतरनाक स्थिति में है. आईसीएमआर की ओर से भी कहा गया है कि इस बार डेंगू के डीटू स्‍ट्रेन (D2 Strain) के चलते मौतें ज्‍यादा हो रही हैं. यह डेंगू का खतरनाक स्‍ट्रेन है. वहीं वायरल फीवर के अलावा स्‍क्रब टाइफस (Scrub-Typhus) और लैप्‍टोस्‍पाइरोसिस जैसी नई बीमारी भी फैल रही है.

लहर की तरह आता है डेंगू-चिकनगुनिया  

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) में ऑपरेशनल रिसर्च ग्रुप ऑफ द नेशनल टास्‍क  फोर्स फॉर कोविड-19 डॉ. नरेंद्र कुमार अरोड़ा कहते हैं कि डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां लहर की तरह आती हैं. यह लहर तीन से चार साल में भी आ सकती है, उससे ज्‍यादा भी समय ले सकती है. 2017-18 के बाद 2021 में इस बार डेंगू के मामले तेजी से बढ़े हैं और मौतें भी हुई हैं. डॉ. अरोड़ा कहते हैं कि डेंगू इस बार ज्‍यादा असर कर रहा है लेकिन राज्‍यों में जिला स्‍तर पर कोविड के मरीजों के लिए की गई व्‍यवस्‍थाएं आज अस्पतालों में मौजूद हैं. पिछले सालों के मुकाबले इस बार स्‍वास्‍थ्‍य विभाग ज्‍यादा मजबूत स्थिति में है. ऐसे में डेंगू पर नियंत्रण पाया जा सकता है. हालांकि लोगों को अपने स्‍तर पर भी मच्‍छरों से बचाव और डेंगू की चपेट में आने से बचने के अलावा इससे प्रभावित होने पर तत्‍काल इलाज के लिए जाना होगा.

कोविड इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर, बेड का हो रहा इस्‍तेमाल

मथुरा जिला महामारी विज्ञानी डॉ. हिमांशु मिश्र ने बताया कि डेंगू से निपटने के लिए जिला अस्‍पतालों में मच्‍छरदानी के साथ बेड की व्‍यवस्‍थाएं की गई है. कोरोना के दौरान राज्‍य सरकार की ओर से सभी जिलों में इंटीग्रटेड कोविड कमांड सेंटर्स (ICCC) बनाए गए थे. ये मुख्‍य रूप ये हेल्‍पलाइन सेंटर्स थे जहां कोविड के मामलों को रिपोर्ट करने पर जिला स्‍तर से एंबुलेंस आदि की सुविधा दी जाती थी. अब कोविड के मामले तो न के बराबर हैं. ऐसे में आईसीसीसी को डेंगू या वायरल फीवर के लिए हेलप्‍लाइन सेंटर (Helpline Center) के रूप में इस्‍तेमाल किया जा रहा है. यहां तक कि कोई भी व्‍यक्ति सामान्‍य बुखार (Fever) को लेकर भी यहां फोन कर सकता है.

डॉ. मिश्र कहते हैं कि इसके अलावा कोविड मरीजों के लिए बनाए गए कोविड डेडिकेटेड बेड्स (Covid Dedicated Beds) को भी डेंगू के मरीजों के लिए उपयोग में लाया जा रहा है. वहीं कोविड को लेकर बने आईसीयू बेड (ICU Bed) या पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट (PICU) को भी मथुरा की तरह सभी जिलों में जहां मौसमी बीमारियों के मरीज सामने आ रहे हैं, इस्‍तेमाल किया जा रहा है. फिलहाल डेंगू या वायरल फीवर से निपटने के लिए सुविधाओं या स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारियों की कमी नहीं है.

 कोविड जितना भयंकर नहीं है डेंगू

आगरा एसएन मेडिकल कॉलेज में डेंगू फीवर को लेकर नोडल अधिकारी बनाए गए प्रोफेसर मृदुल चतुर्वेदी का कहना है कि पिछले 10-15 सालों के बाद यूपी में डेंगू के इतने मामले सामने आए हैं और इसकी वजह भी डीटू स्‍ट्रेन बताई जा रही है. 90 के दशक में दिल्‍ली में कुछ केस डीटू स्‍ट्रेन के मिले थे लेकिन यहां यह स्‍ट्रेन नहीं मिलता था और ऐसे में डेंगू से मौतें भी कम होती थीं. इस बार मरीज बढ़ रहे हैं. एसएन में आसपास के जिलों जैसे शिकोहाबाद, एटा, इटावा, मैनपुर से रोजाना आधा दर्जन मामले गंभीर डेंगू मरीजों के आ रहे हैं. ये या तो रैफर किए हुए केस होते हैं या डेंगू के शॉक सिंड्रोम या हैमरेजिक स्थिति में पहुंच चुके मरीज होते हैं. हालांकि इसके बावजदू हालात काबू में हैं. मेडिकल कॉलेज हों या राज्यों के सरकारी अस्पताल इनमें पिछले साल से कोविड मैनेजमेंट में लगे मेडिकल उपकरण, बेड, आईसीयू सुविधाएं, डॉक्टर्स और स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारी लगे हैं.

मौसमी बुखार बच्‍चों के लिए क्‍यों हो रहा है जानलेवा, बता रहे हैं विशेषज्ञ

Viral Fever in UP: यूपी में डेंगू और वायरल बुखार का कहर जारी है और यह बच्‍चों के लिए जानलेवा हो रहा है.  (फाइल फोटो)

Viral Fever in children: महामारी विज्ञानी डॉ. हिमांशु मिश्र का कहना है कि वायरल फीवर के बच्‍चों के लिए जानलेवा बनने की एक सबसे बड़ी वजह जो सामने आई है वह यह है कि वायरल या डेंगू की चपेट में आने के बाद सरकारी अस्‍पतालों में भर्ती हुए ज्‍यादातर बच्‍चे कुपोषित या कम पोषित हैं. जिसकी वजह से इनका शरीर बीमारी का मुकाबला करने में सक्षम नहीं है.

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नई दिल्‍ली. देश में अगस्‍त महीने से एकाएक मौसमी बुखार या वायरल फीवर (Viral Fever) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इस रहस्‍यमयी बुखार की चपेट में आ चुके यूपी, एमपी सहित कई राज्‍यों में मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही मौतों के भी मामले सामने आ रहे हैं. मथुरा, फिरोजाबाद, कानपुर, लखनऊ, एटा, मैनपुरी, प्रयागराज सहित कई जिलों के हजारों की संख्‍या में वायरल फीवर के मरीज अस्‍पतालों में भर्ती हैं. वहीं बिहार, हरियाणा और मध्‍य प्रदेश के कई जिलों में मौसमी बुखार (Seasonal Fever) के मरीज अस्‍पतालों में इलाज करा रहे हैं. लगभग सभी राज्‍यों में मिल रहे वायरल फीवर के मरीजों में सबसे ज्‍यादा संख्‍या बच्‍चों की सामने आ रही है. इतना ही नहीं इलाज में हो रही कमी के कारण रोजाना बच्‍चे दम तोड़ रहे हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि मौसमी बुखार, वायरल फीवर और डेंगू (Dengue) इस बार काफी खतरनाक हो रहे हैं वहीं बच्‍चे इन बीमारियों की चपेट में इस बार तेजी से आ रहे हैं. यूपी के कई जिलों और खासतौर पर मथुरा-फिरोजाबाद में फैली बीमारी और बच्‍चों की मौतों को लेकर महामारी विज्ञानी डॉ. हिमांशु मिश्र ने न्‍यूज 18 हिंदी से बातचीत में कहा कि छह सालों के बाद पश्चिमी यूपी या मथुरा-फिरोजाबाद आसपास में वायरल (Viral) या मौसमी बुखार और डेंगू के इतने ज्‍यादा मामले सामने आए हैं और मौतें भी हो रही है. पिछले कुछ सालों तक पूर्वी यूपी के कुछ जिलों में स्‍क्रब टाइफस (Scrub Typhus) एक या दो मामले मिलते थे और उनकी भी ट्रैवल हिस्‍ट्री होती थी लेकिन पहली बार है कि इन मरीजों की कोई ट्रैवल हिस्‍ट्री नहीं देखने को मिली लेकिन बीमारी मिल रही है. वहीं लेप्टोस्पायरोसिस पूरी तरह नई बीमारी है.

बच्‍चों में मौसमी बुखार इसलिए हो रहा है जानलेवा

डॉ. मिश्र कहते हैं कि हर साल मौसमी बुखार या वायरस से होने वाली बीमारियां जैसे वायरल फीवर और इन्‍फ्लूएंजा आदि होती थीं. इन बीमारियों का भी एक तय सर्कल होता का कि करीब सात या आठ दिन में मरीज ठीक हो जाएगा. चूंकि यह वातावरण बदलने के कारण बीमारी पैदा होती रही है इसलिए बच्‍चे भी चपेट में आते थे लेकिन इस बार यह बच्‍चों की मौतों की भी खबरें आ रही हैं. बच्‍चों के लिए जानलेवा बनने की एक सबसे बड़ी वजह जो सामने आई है वह यह है कि इस बार सरकारी अस्‍पतालों में भर्ती हुए ज्‍यादातर बच्‍चे कुपोषित या कम पोषित हैं. उन्‍हें पर्याप्‍त रूप से भोजन या पोषणयुक्‍त आहार नहीं मिलता जिसकी वजह से बुखार की चपेट में आने पर उनका शरीर बीमारी का मुकाबला नहीं कर पा रहा है और वे दम तोड़ रहे हैं. वायरल या इन्‍फ्लूएंजा भी वायरस जनित बीमारियां ही हैं इनसे लड़ने के लिए शरीर में प्रतिरोधक क्षमता या शक्ति का होना जरूरी है.

मौसमी बुखार के लिहाज से ये महीने काफी संवेदनशील

एपिडेमिलॉजिस्‍ट डॉ. मिश्र कहते हैं कि अप्रैल-मई से लेकर सितंबर-अक्‍तूबर तक मौसमी बीमारियों का खतरा सबसे ज्‍यादा रहता है. इस दौरान बारिश का मौसम और वातावरण में नमी के कारण वायरस (Virus) और बैक्‍टीरिया दोनों को ही पनपने में मदद मिलती है. इसके साथ ही बारिश के कारण होने वाले पानी के जमाव के बाद मच्‍छरों का पनपना शुरू हो जाता है. इस बार जो कुछ नई बीमारियां दिखाई दी हैं जैसे स्‍क्रब टाइफस या लैप्‍टोस्‍पाइरोसिस आदि इसके लिए भी बारिश के कारण ग्रामीण इलाकों में बढ़ने वाली झाड़‍ियां, वहां पैदा हो रहे कीट आदि जिम्‍मेदार हैं. ऐसे में कोरोना के प्रति तो लोग सावधान रहे हैं लेकिन अन्‍य मौसमी बीमारियों को लेकर सावधानी नहीं बरती गई है. साफ पानी में मच्‍छरों का लार्वा नष्‍ट नहीं किया गया है.

क्‍या कोरोना ने कमजोर की है बच्‍चों की इम्‍यूनिटी

डा. मिश्र कहते हैं कि इस बारे में अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता. इसे लेकर कई रिसर्च चल रही हैं जिनमें यह देखा जा रहा है कि क्‍या कोरोना के कारण बच्‍चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हुई है जिसकी वजह से वे वायरल लोड को नहीं झेल पा रहे हैं या सामान्‍य बुखार भी उन्‍हें ज्‍यादा तकलीफ दे रहा है. हां लेकिन एक चीज है कि जो बच्‍चे सही आहार पहले से ले रहे हैं वे इस मौसमी बुखार से उबर रहे हैं.

धान की खेती में पैदा हुआ डेंगू का मच्‍छर

पश्चिमी यूपी के जिन जिलों डेंगू के मामले बढ़े हैं वहां एक चीज और देखी गई है कि इन जिलों के आसपास धान की खेती की गई है. मध्‍य जून से ही यहां धान (Paddy) की रोपाई शुरू की गई है. धान के लिए साफ पानी की जरूरत होती है और खेतों में पानी भरा रहता है. ऐसी आशंका है कि धान के पानी में डेंगू के मच्‍छरों का लार्वा पनपा है. चूंकि डेंगू का मच्‍छर 10 दिन में ही पनप जाता है ऐसे में यह भी एक वजह हो सकती है इन इलाकों में डेंगू के फैलने की.

बच्‍चों पर शुरू से ध्‍यान देना जरूरी, बीमारी में ये करें उपाय

डॉ. कहते हैं कि मौसमी बीमारी, मौसम जनित है ऐसे में उसे रोक पाना संभव नहीं है लेकिन सावधानी और ध्‍यान देकर उससे बचाव किया जा सकता है जो सभी को करना चाहिए. खासतौर पर बच्‍चों को संभालना बेहद जरूरी है. मौसमी बुखार या वायरल फीवर से बचने के लिए भी कोरोना की तरह ही सुरक्षा नियमों का पालन करना जरूरी है. चाहे इन्‍फ्लूएंजा हो या वायरल फीवर, ये सभी वायरस जनित हैं और एक से दूसरे में फैलने वाली बीमारियां हैं. ऐसे में अभिभावक बच्चों को सार्वजनिक स्थानों पर कम से कम ले जाने, सोशल डिस्‍टेंसिंग रखने और साफ-सफाई व हाथ धोने की आदत डालें.

अगर कोई बच्‍चा बुखार की चपेट में है तो उसे कोई भी दवा अपने आप देने या बिना किसी मेडिकल प्रेक्टिशनर की सलाह के दवा देना नुकसानदेह हो सकता है. इस बार यूपी में कई गांवों से आए मरीजों में ये देखा गया है कि वे अपने आस-पास मौजूद झोलाछाप डॉक्‍टरों से ही दवा दिलवाते रहे और बाद हालात काफी जटिल हो गए.

डॉ. मिश्र कहते हैं कि बच्‍चे के खाने में लिक्विड डाइट को ज्‍यादा से ज्‍यादा दें. सादा खाना दें. मरीज को हरी सब्जियां दें. एंटीऑक्सीडेंट और प्रोटीन से भरपूर खाना दें ताकि बीमारी से लड़ने के लिए शरीर को पोषक तत्‍व मिल सकें. इसके अलावा अगर बच्‍चे या बड़े को तीन दिन से ज्‍यादा बुखार है और उतर नहीं रहा है तो डॉक्‍टर को दिखाएं. जरूरी जांचें करवाएं.

इसके अलावा मच्‍छरों से बचाव करें. बच्‍चों को पहले से ही खाने में पोषणयुक्‍त खाना दें. ताकि बीमारी के प्रभाव को कम किया जा सके.

राधाष्‍टमी: 13-14 सितंबर को बरसाना में मनेगा जन्‍मोत्‍सव, प्रशासन ने की है ये व्‍यवस्‍था  

बरसाना में 13-14 सितंबर को राधाष्‍टमी महोत्‍सव मनाया जा रहा है.

Radha Ashtami: यूपी रोडवेज की ओर से 30 बसें कोसी से बरसाना के लिए रवाना होंगी वहीं 70 बसें मथुरा से गोवर्धन होते हुए बरसाना के लिए जाएंगी. ये बसें 13-14 सितंबर को सुबह से रात तक फेरे लगाएंगी. जिससे कि जन्‍मोत्‍सव में शामिल होने के लिए जाने वाले भक्‍तों को परेशानियों का सामना न करना पड़े.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 11, 2021, 19:33 IST
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नई दिल्‍ली. ब्रज के बरसाना में 13 और 14 सितंबर को राधारानी का जन्‍मोत्‍सव मनाया जा रहा है. इसके लिए बरसाना के साथ ही मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन और रावल के मंदिरों में जाने वाले भक्‍तों के लिए विशेष व्‍यवस्‍थाएं की गई हैं. उत्‍तर प्रदेश परिवहन निगम की ओर से श्रद्धालुओं के लिए 100 रोडवेज बसें चलाई जा रही हैं जो बरसाना जाएंगी. हालांकि मथुरा और वृंदावन के लिए वाहनों की व्‍यवस्‍था सामान्‍य रहेगी.

यूपी रोडवेज की ओर से 30 बसें कोसी से बरसाना के लिए रवाना होंगी वहीं 70 बसें मथुरा से गोवर्धन होते हुए बरसाना के लिए जाएंगी. ये बसें 13-14 सितंबर को सुबह से रात तक फेरे लगाएंगी. जिससे कि जन्‍मोत्‍सव में शामिल होने के लिए जाने वाले भक्‍तों को परेशानियों का सामना न करना पड़े.

राधाष्टमी महोत्सव को लेकर पहले ही डीएम नवनीत चहल और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर बैठक कर चुके हैं. जिसमें खासतौर पर बरसाना में आने वाली गाड़ि‍यों को देखते हुए विभिन्‍न पार्किंगों में लाइट की व्‍यवस्‍था करने, मंदिरों के अलावा आसपास के परिसरों में साफ सफाई रखने, श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी और शौचालयों की व्‍यवस्‍था करने के लिए निर्देश दिए हैं.

भंडारा करने से पहले लेनी होगी अनुमति  

राधाष्‍टमी के दौरान बरसाना में मेला लगता है और वहां सैकड़ों की संख्‍या में लोग भंडारे कराते हैं लेकिन अब कोरोना को देखते हुए कड़ी व्‍यवस्‍था की गई है. इस बार परिसर में भंडारा करने से पहले प्रशासन से एनओसी लेने के लिए पांच हजार रुपये जमा कराने होंगे और फिर भंडारा लगाने की अनुमति मिलेगी. हालांकि इन्‍हें मेला परिसर के बाहर ही लगाना होगा.

UP News: मथुरा के वृन्दावन, नंदगांव, बरसाना, गोवर्द्धन और इन इलाकों में नहीं बिकेगा शराब और मांस

मथुरा पर CM योगी का बड़ा फैसला, कृष्ण जन्मस्थल के 10 km का इलाका तीर्थस्थल घोषित (File photo)

Mathura News: 2017 में भाजपा की सरकार बनने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने साल 2018 में वृन्दावन, नंदगांव, बरसाना, गोवर्द्धन, गोकुल, बलदेव और राधाकुण्ड को तीर्थ स्थल क्षेत्र घोषित करने के आदेश दिये थे.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने शुक्रवार को बड़ा फैसला लिया हैं. सीएम योगी ने जन्मस्थल के 10 वर्ग किलोमीटर के दायरे को तीर्थ स्थल घोषित किया है. धर्मार्थ कार्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में अभी सात स्थलों को तीर्थ स्थल क्षेत्र का दर्जा दिया गया है. ये सभी के सभी मथुरा के ही हैं. 2017 में भाजपा की सरकार बनने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने साल 2018 में वृन्दावन, नंदगांव, बरसाना, गोवर्द्धन, गोकुल, बलदेव और राधाकुण्ड को तीर्थ स्थल क्षेत्र घोषित करने के आदेश दिये थे. वैसे तो प्रदेश में धार्मिक नगरियां बहुत हैं लेकिन, सरकार द्वारा औपचारिक तौर पर घोषित तीर्थ स्थल क्षेत्र मथुरा के यही सात हैं.

बता दें कि इस क्षेत्र में 22 नगर निगम वार्ड क्षेत्र आते हैं, जिसे तीर्थ स्थल घोषित किया गया है. इससे पहले यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने मथुरा में ही जन्माष्टमी भी मनाई थी, जिसके बाद तीर्थस्थल घोषित किए जाने का यह फैसला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा था. सीएम आफिस ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी. तीर्थ स्थल क्षेत्रों में मांस और शराब की बिक्री पर बैन रहेगा.

बता दें कि यूपी में तीर्थस्थलों के विकास का काम चल रहा है. अयोध्या, वाराणसी, मथुरा आदि में सुविधाएं पहले की मुकाबले बेहतर हो रही हैं. अयोध्या में डेढ़ साल पहले आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से जारी है. माना जा रहा है कि साल 2014 से पहले तक भव्य राम मंदिर का निर्माण पूरा हो जाएगा.

मथुरा-वृंदावन में 10 वर्ग किमी. का दायरा तीर्थस्‍थल घोषित, नहीं बिकेगा मांस और शराब

योगी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए मथुरा वृंदावन को तीर्थस्‍थल घोषित कर दिया है, इस संबंध में सीएम योगी ने कृष्‍ण जन्माष्टमी पर अपनी मंशा जाहिर की थी. (फाइल फोटो)

Uttar Pradesh News: योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया, मथुरा वृंदावन को तीर्थस्‍थल घोषित किया गया, अब 22 नगर निगम वार्ड के क्षेत्र में मांस और शराब की बिक्री पर रहेगा प्रतिबंध.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार ने मथुरा वृंदावन को लेकर बड़ा फैसला किया है. अब श्रीकृष्‍ण जन्मस्‍थल के दस किमी. के दायरे को तीर्थस्‍थल घोषित कर दिया गया है. इस क्षेत्र में आने वाले 22 नगर निगम वार्ड के क्षेत्रों में शराब और मांस की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा. गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस संबंध में कृष्‍ण जन्माष्टमी पर इशारा किया था. सीएम योगी ने मथुरा में कहा था कि इस स्‍थल को तीर्थस्‍थल घोषित किया जाना चाहिए और यहां पर शराब व मांस की बिक्री नहीं होनी चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि अधिकारियों से इस संबंध में वे प्रस्ताव मांगेंगे.

सीएम योगी ने कहा था कि मैं खुद प्रशासन से कहूंगा कि इसके लिए योजना बना कर प्रस्ताव पेश करें. इस पर काम किया जाएगा. साथ ही उन्होंने कहा कि किसी को परेशान नहीं होने दिया जाएगा और सभी का व्यवस्थित तौर पर पुर्नवास होगा. सीएम ने साफ तौर पर कहा था कि जिन भी लोगों के व्यवसाय पर इससे फैसले से फर्क पड़ेगा उन्हें दूसरी जगहों पर काम दिया जाएगा और इस क्षेत्र से हटाया जाएगा.

सीएम योगी ने कहा था कि 2017 में पहले यहां नगर निगम का गठन करवाया गया. फिर नगर निगम के गठन के साथ यहां के सात पवित्र स्थलों को तीर्थ स्थल घोषित करवाया और तीर्थस्थल घोषित होने के बाद अब यहां पर सब की इच्छा है कि इन सभी क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का मद्यपान या मांस का सेवन न हो और ये होना चाहिए.

बड़ों के मुकाबले बच्‍चों पर डेंगू का खतरा ज्‍यादा, एक्‍सपर्ट बोले, इस बार तेजी से बढ़ रहे मामले

अगस्‍त से उत्‍तरी भारत और खासतौर पर उत्‍तर प्रदेश के कई जिलों में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.  Photo-News18 English

Dengue cases: उत्‍तर-भारत में अगस्‍त महीने से अचानक बढ़े डेंगू के मामलों पर स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार डेंगू का कहर खतरनाक हो सकता है. साथ ही बड़ों की अपेक्षा बच्‍चों में डेंगू बुखार की चपेट में आने का खतरा ज्‍यादा होता है.

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नई दिल्‍ली. भारत में कोरोना की दूसरी लहर (Corona Second Wave) के मामले अभी आना बंद नहीं हुए हैं कि डेंगू (Dengue) के रूप में एक और मुसीबत सामने आ रही है. उत्‍तर-प्रदेश के कई जिलों में बड़ी संख्‍या में सामने आ रहे डेंगू के मामलों के साथ-साथ पूरे उत्‍तर-भारत में मच्‍छरों (Mosquito) से पनपने वाली इस बीमारी को लेकर चिंता पैदा हो गई है. बुखार (Fever) से पीड़ि‍त मरीजों में डेंगू संक्रमण (Dengue Infection) की पुष्टि के साथ ही मौतों की संख्‍या भी लगातार बढ़ रही है. इनमें बड़ों के साथ-साथ बड़ी संख्‍या में बच्‍चे भी शामिल हैं.

राजधानी दिल्‍ली में भी अगस्‍त से अभी तक डेंगू के 100 से ज्‍यादा मामले सामने आ चुके हैं. वहीं यूपी में पिछले हफ्ते तक डेंगू के 497 मामले सामने आ चुके हैं. मथुरा में 107, फिरोज़ाबाद में 49 डेंगू के मामले सामने आये हैं. इसके अलावा, वाराणसी में 69, लखनऊ में 84, कानपुर में 21, बस्ती में 11 जबकि मेरठ में 10 मामले बताए गए हैं. बाकी के ज़िलों में डेंगू के मामले कम हैं लेकिन धीरे-धीरे यह बीमारी अपने पैर पसार रही है. इसके अलावा डेंगू मरीजों की मौत भी बड़ी संख्‍या में हो रही है.

उत्‍तर-भारत में अगस्‍त महीने से अचानक बढ़े डेंगू के मामलों पर स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार डेंगू का कहर खतरनाक हो सकता है. इसकी कई वजहें हैं. नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) से रिटायर्ड पब्लिक हेल्‍थ स्‍पीकर डॉ. सतपाल कहते हैं कि इस साल डेंगू के आंकड़ों को देखें तो इसके खतरनाक होने को लेकर कई बातें सामने आ रही हैं.

इस बार डेंगू के खतरनाक होने के ये हो सकते हैं कारण

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पिछले कुछ दिन से यूपी में कोरोना से ज़्यादा केस डेंगू के होने के आंकड़े सामने आ रहे हैं .

डॉ. सतपाल कहते हैं कि पहले से चली आ रही कोरोना बीमारी के बाद अब इसका भी संक्रमण एक चुनौती बन सकता है. देशभर में स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र की ज्‍यादातर व्‍यवस्‍था कोविड से निपटने में जुटी हुई है ऐसे में एक और ऐसी बीमारी का पनप जाना, जिसका कोई सटीक इलाज नहीं है और जिससे बचाव के लिए कोई वैक्‍सीन (Vaccine) भी अभी तक नहीं आई है ऐसे में न केवल मेडिकल क्षेत्र के लिए बल्कि इलाज के लिए दौड़ लगाते आम लोगों के लिए भी काफी मुश्किल पैदा कर सकता है.

वे कहते हैं कि दूसरा कारण यह है कि डेंगू का अपना एक चक्र होता है. करीब चार से पांच साल में यह ज्‍यादा जानलेवा या भयंकर होकर सामने आता है. पिछले कुछ सालों के आंकड़े देखें तो केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2017 डेंगू के 1,88,401 मामले सामने आए थे जिनमें से 325 लोगों की मौत हो गई थी. उसके बाद डेंगू के मरीजों का आंकड़ा काफी नीचे पहुंच गया था. ऐसे में 2017 के बाद अब 2021 में एक बार फिर डेंगू अपने चक्र के अनुसार असर दिखा सकता है.

वहीं तीसरी कारण यह हो सकता है कि हर साल डेंगू के ज्‍यादा मामले सितंबर के आखिर या अक्‍तूबर में सामने आते थे जबकि इस बार अगस्‍त के अंत से ही डेंगू के केस बढ़ने लगे हैं. ऐसे में अक्‍तूबर आते-आते ये मामले कितने हो जाएंगे और मौतों का आंकड़ा भी बढ़ सकता है, इसका अंदाजा ही लगाया जा सकता है.

चौथा कारण बारिश (Rain) और अव्‍यवस्‍था दोनों ही हैं. इस बार बारिश हुई है लेकिन रुक-रुक कर हुई है और इससे पानी जमा होता रहा है. या तो कम बारिश हो तो पानी सूख जाता है या ज्‍यादा बारिश हो तो पानी को निकालने के इंतजाम किए जाते हैं लेकिन बारिश होने और फिर रुकने के चलते व्‍यवस्‍था इंतजाम पूरी तरह नहीं किए गए हैं जो कि डेंगू के एडीज मच्‍छर को बढ़ावा देने में मददगार है. मात्र 10 दिन के अंदर लार्वा बनने से लेकर मच्‍छर बनने तक का काम हो जाता है ऐसे में एक से दो महीने में कितने मच्‍छर पनप जाएंगे यह अनुमान लगाया जा सकता है.

डॉ. सतपाल कहते हैं कि कोरोना के चलते लोग कोविड अनुरूप व्‍यवहार अपना रहे हैं और घरों के अंदर रह रहे हैं लेकिन वे मच्‍छरों को लेकर लापरवाह हो रहे हैं. जिससे डेंगू या मलेरिया के मच्‍छर को पैदा होने में मदद मिल रही है. इसके अलावा सालों से स्‍कूल बंद हैं, बहुत ज्‍यादा सफाई भी नहीं हुई है, अभी स्‍कूल भी खुल गए हैं, वहां भी बच्‍चों के लिए खतरा हो सकता है.

बड़ों के मुकाबले बच्‍चों के लिए ज्‍यादा खतरनाक है डेंगू

पब्लिक हेल्‍थ एक्‍सपर्ट डॉ. सतपाल बताते हैं कि बड़ों की अपेक्षा बच्‍चों पर डेंगू बुखार का खतरा ज्‍यादा होता है. इसकी तमाम वजहें हैं.

. पहला बच्‍चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बड़ों के मुकाबले कम होती है. या फिर उत्‍तर भारत में पोषणयुक्‍त भोजन के मामले में बच्‍चे काफी पीछे हैं ऐसे में शरीर में शक्ति न होने के कारण बच्‍चे डेंगू का बुखार होने पर उसे झेल पाने में कमजोर साबित होते हैं.

. इसमें सबसे पहले बुखार आता है और बच्‍चे पूरी तरह अपनी बीमारी नहीं बता पाते, जिसके कारण कई दिनों या हफ्तों तक उन्‍हें सही इलाज नहीं मिल पाता और वे डेंगू की चपेट में आने के कारण गंभीर रूप से बीमार हो जाते हैं. बच्‍चों की प्‍लेटलेट्स गिर जाती हैं लेकिन इसका भी पता नहीं चल पाता है.

. बच्‍चे खेलने-कूदने के दौरान खुले में घूमते हैं या फिर घरों में रहते हैं तो मच्‍छरों को लेकर विशेष रूप से सतर्क नहीं रह पाते और बता भी नहीं पाते. इस कारण भी वे मच्‍छरों का आसान शिकार होते हैं और डेंगू से संक्रमित हो जाते हैं.

. डेंगू में अंदरूनी ब्‍लीडिंग होती है फिर चाहे वह नाक से हो, कान से या मल के रास्‍ते हो. यह काफी खतरनाक स्‍तर का डेंगू होता है लेकिन बच्‍चे इस पर ध्‍यान नहीं देते और बता भी नहीं पाते जिससे वे गंभीर स्थिति में पहुंच जाते हैं.

. डेंगू होने के बाद भी करीब 4-5 दिन बाद अगर जांच कराई जाए तभी इसका पता चल पाता है जबकि मलेरिया का आज मच्‍छर काटने पर बुखार आया है तो जांच में तत्‍काल पता चल जाता है ऐसे में जांच रिपोर्ट में सही बीमारी पता चलने में लगने वाले समय के कारण भी  खतरा बढ़ जाता है.

मथुरा पुलिस और लुटेरों के बीच चलीं गोलियां, लखटकिया बदमाश घायल, तीन साथी भी गिरफ्त में

उत्तर प्रदेश पुलिस के अफसर. (File Photo)

Crime in UP : उत्तर प्रदेश के मथुरा में पिछले दिनों हुए 1 करोड़ के लूटकांड के आरोपियों और पुलिस के बीच काफी देर फायरिंग हुई. पुलिस ने लुटेरों को गिरफ्तार करते हुए कथित तौर पर 45 लाख रुपए की बरामदगी भी की.

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मथुरा. एक बुलियन कारोबारी से करीब दो हफ्ते पहले दिनदहाड़े एक करोड़ की लूट को अंजाम देने वाले बदमाश आखिर पुलिस के हत्थे चढ़ गए. मथुरा के थाना कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत माल गोदाम रोड पर उस समय पुलिस और बदमाशों की आमने-सामने की भिड़ंत हो गई जब वॉंटेड अपराधियों की धरपकड़ के लिए कोतवाली पुलिस मुस्तैद थी. सूचना के आधार पर पुलिस ने बदमाशों की घेराबंदी करते हुए उन्हें आत्मसमर्पण करने के लिए कहा लेकिन बदमाशों ने पुलिस के बीच घिरता देख आत्मसमर्पण की जगह फायरिंग कर दी. पुलिस की जवाबी फायरिंग में एक बदमाश पैर में गोली लगने से घायल हो गया और उसके 3 साथी पुलिस की गिरफ्त में आ गए.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पुलिस ने इन बदमाशों के कब्ज़े से 45 लाख के आसपास की नगदी बरामद की. अब तक पुलिस 1 करोड़ 5 लाख की रकम में से कुल 90 लाख तक वसूल चुकी है. इस संबंध में एसएसपी गौरव ग्रोवर ने बताया कि मुठभेड़ में घायल बदमाश अरविंद 1 लाख का इनामी है. इसी अरविंद ने 16 अगस्त को अपने साथियों के साथ मिलकर दिनदहाड़े बुलियन कारोबारी से लूट की वारदात को अंजाम दिया था.

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मथुरा पुलिस और लुटेरों के बीच हुई फायरिंग में एक लाख का इनामी बदमाश घायल हुआ.

कैसे हुई थी लूट की वारदात?
बीते 16 अगस्त को मथुरा में शहर कोतवाली इलाके में बाग बहादुर पुलिस चौकी से महज़ 50 मीटर दूर बुलियन व्यापारी राजकुमार अग्रवाल के साले के लड़के अंकित बंसल के साथ वारदात हुई थी, जब वह अपने बहनोई का एक करोड़ पांच लाख रुपये स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में जमा कराने जा रहा था. इस वारदात का पुलिस ने गुरुवार को दस दिन बाद 26 अगस्त को खुलासा कर 7 आरोपियों को जेल भेज दिया था और अब उसके बचे हुए साथियों को भी धर दबोचा.

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लूट की वारदात को अंजाम देने वालों में से पुलिस ने नितेश पुत्र गिरप्रसाद, तरुण चौधरी पुत्र अर्जुन, जीतू उर्फ जितेंद्र पुत्र हरिश्चंद, गिर प्रसाद पुत्र जसवंत सिंह, जगवीरी पत्नी गिरप्रसाद निवासी भवोकरा थाना जेवर गौतमबुद्ध नगर, अजय पुत्र गोकुल सिंह निवासी कोलाहार नौहझील व मुखबिर कोमल पुत्र बनवारी निवासी महादेव घाट मथुरा को गिरफ्तार किया था.

क्या कोरोना की तीसरी लहर है मथुरा-फिरोजाबाद में बच्चों की मौत, जानिए Experts की राय

UP: मथुरा और फिरोजाबाद में अब तक 50 मासूम बच्चों की मौत से हड़कंप मचा हुआ है.

UP News: यूपी सरकार के आंकड़े के मुताबिक 1 सितम्बर की सुबह 8 बजे तक मथुरा में 8 जबकि फिरोजाबाद में 42 बच्चों की मौत हो चुकी है.

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लखनऊ. पिछले एक हफ्ते में ही उत्तर प्रदेश के दो जिलों मथुरा (Mathura) और फिरोजाबाद (Firozabad) में 50 मासूम बच्चों की मौत हो गयी है. ये सरकारी आंकड़ा है. बच्चों को पहले तेज बुखार हुआ फिर पेट में दर्द और दो से तीन दिनों में ही मौत होने लगी. अब सरकारी अमले ने दोनों जिलों में डेरा डाल दिया है. उम्मीद है हालात जल्द ठीक हो जायेंगे. लेकिन, इन दोनों जिलों में हो रही बच्चों की बीमारी क्या कोरोना की तीसरी लहर (COVID-19 Third Wave) की दस्तक है? ये सवाल हर किसी की जुबान पर तैर रहा है.

बहुत से लोगों ने इसे कोरोना की संभावित तीसरी लहर से जोड़ दिया है. बच्चों को हो रहे बुखार को रहस्यमयी बताया जा रहा है. लेकिन, सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है. बच्चों की बिगड़ती तबीयत और हो रही मौतों के पीछे कोई और जिम्मेदार है.

सरकारी आंकड़े के मुताबिक 1 सितम्बर की सुबह 8 बजे तक मथुरा में 8 जबकि फिरोजाबाद में 42 बच्चों की मौत हो चुकी है. मथुरा में बीमार हुए बच्चों के 184 सैम्पलों की जांच में डेंगू के 91, स्क्रबटाइफस के 29 और लैप्टो स्पोइरोसिस के 48 मामले पुष्ट हुए हैं. फिरोजोबाद में जांच के लिए सैम्पल भेजे गये हैं. नतीजे आने बाकी हैं.

फिरोजोबाद में कैम्प कर रहे वेक्टर बॉर्न डिजीजेज के ज्वाइण्ट डायरेक्टर डॉ. अवधेश यादव ने कहा कि एक भी बीमार बच्चा कोरोना पॉजिटिव नहीं मिला है. सभी की कोरोना जांच की गयी है. सभी डेंगू, मलेरिया और स्क्रबटाइफस के मरीज मिले हैं. कोरोना का बच्चों की बीमारी से दूर-दूर तक लेना नहीं है. इसे किसी भी सूरत में कोरोना की संभावित तीसरी लहर से जोड़कर नहीं देखना चाहिए. ऐसी अफवाह से समस्यायें और गंभीर हो जायेंगी.

तो फिर बच्चों की मौत क्यों हो रही है?

मथुरा और फिरोजोबाद में बुखार से सिर्फ बच्चों की ही मौत नहीं हुई है बल्कि बड़े भी मौत के शिकार हुए हैं. ये जरूर है कि बच्चों की संख्या बहुत ज्यादा है. लखनऊ से मथुरा और फिरोजाबाद गई डॉक्टरों की टीम ने कहा कि बीमारी का सही समय पर इलाज हो जाता तो बच्चों की जान बचाई जा सकती थी. गांव में झोलाछाप डाक्टरों ने बुखार उतारने के लिए दवाओं की ओवरडोज दे दी. साथ ही स्टेरायड भी दे दिया. इससे बुखार तो उतर गया लेकिन, तबीयत बिगड़ती चली गयी. तीन दिन के बाद बच्चे शॉक में चले गये. फिर एक-एक कर शरीर के अंग फेल होते गये और बच्चों की मौत होती गयी.

ऐसे में बच्चों को न तो कोई रहस्यमयी बीमारी या बुखार हुआ है और ना ही ये कोरोना की संभावित तीसरी लहर है. बल्कि ये इलाज में लापरवाही और गांव-गांव में चिकित्सीय सुविधा के अभाव का नतीजा है.

मथुरा में मुस्लिम डोसा विक्रेता का स्टॉल तोड़ने वाला लड़का पकड़ा गया, अन्य की तलाश जारी

गौरतलब है कि यह घटना 18 अगस्त को कोतवाली क्षेत्र में स्थित विकास बाजार में घटी थी. (सांकेतिक फोटो)

Mathura Crime News: आरोपी 18 अगस्त को विकास बाजार में ‘श्रीनाथ डोसा कॉर्नर’ के नाम से दुकान करने वाले मुस्लिम युवक की दुकान पर कथित रूप से तोड़फोड़ करने वाले युवकों में शामिल बताया जा रहा था.

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मथुरा. यूपी के मथुरा में मुस्लिम डोसा विक्रेता (Muslim Dosa Seller) के स्टाल पर तोड़फोड़ के दो हफ्ते बाद आरोपी लड़कों में से एक को पुलिस ने गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है. पकडे गए लड़के का नाम श्रीकांत बताया गया है. कहा गया है कि वह 18 अगस्त को विकास बाजार में ‘श्रीनाथ डोसा कॉर्नर’ (Shrinath Dosa Corner) के नाम से दुकान करने वाले मुस्लिम युवक की दुकान पर तोड़फोड़ करने वाले युवकों में शामिल था. थाना कोतवाली प्रभारी सूरज प्रकाश शर्मा ने बताया कि पुलिस श्रीकांत के अलावा दूसरे हमलावरों की भी तलाश कर रही है.

शर्मा के अनुसार श्रीकांत ने अपने साथियों के नाम और उनकी पहचान भी बता दी है. उन्होंने बताया कि श्रीकांत ने अपना अपराध कुबूल कर लिया है. श्रीकांत का कहना है कि ‘‘हम लोग किसी राजनीतिक दल के सदस्य नहीं हैं बल्कि कृष्णभक्त हैं. इसीलिए हम एक मुस्लिम दुकानदार द्वारा अपनी दुकान का नाम अपने इष्ट देव के नाम पर न रखकर श्रीनाथजी (, भगवान श्रीकृष्ण का ही एक अन्य रूप) के नाम पर रखने से नाराज थे’’. इन सभी हमलावरों ने उसे अल्लाह या खुदा के नाम पर दुकान का बोर्ड लगाने को कहा था.

श्रीकांत गिरफ्तार
गौरतलब है कि यह वारदात 18 अगस्त को कोतवाली क्षेत्र में विकास बाजार में हुई थी. उस दिन कुछ युवकों ने खुद को कृष्ण भक्त बताते हुए सदर थाना क्षेत्र के तकिया मोहल्ला निवासी मुस्लिम युवक इरफान की ढकेल का ‘श्रीनाथ पॉवभाजी कॉर्नर’ नाम का बोर्ड तोड़ दिया था तथा उसे अपने देवता के नाम पर बोर्ड बनाने की सलाह दी थी. पिछले दिनों इस घटना का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद पुलिस सक्रिय हुई और इरफान से तहरीर लेकर रविवार को मुकदमा दर्ज किया और आरोपी युवकों की तलाश शुरु की गई और आज एक आरोपी श्रीकांत को गिरफ्तार कर लिया गया.

Krishna Janmashtami: मथुरा में प्रकट भए नंदलाला, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम

जन्माष्टमी के मौके पर मंदिरों में खास सजावट की गई, साथ ही कोरोना का देखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान रखा गया.

Mathura News: जन्माष्टमी का पर्व मनाने के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंंचे मथुरा, मंदिरों में शाम से लगा तांता, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर भगवान के दर्शन करते नजर आए लोग.

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मथुरा. कृष्‍ण जन्माष्टमी को लेकर मथुरा-वृंदावन में सोमवार को आयोजनों की धूम रही. इस दौरान पूरा शहर रंग बिरंगी रौशनी से नहाया दिखा. शाम होते ही वृंदावन के मंदिरों की सजावट देखते ही बन रही थी. जन्माष्टमी के मौके पर कई धार्मिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया. पूरे देश में मनाए जाने वाले इस पर्व का मथुरा में खास महत्व है. माना जाता है कि कृष्‍ण भगवान ने यहीं जन्म लिया था और इसी के चलते यहां पर लोगों की आस्‍था देखते ही बनती है. जन्माष्टमी पर देश भर से लोग मथुरा वृंदावन पहुंचते हैं. ऐसा ही नजारा सोमवार को भी रहा शाम होते होते श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिरों में जुटने लगी.

नगर के सभी मन्दिरों को सजाया गया है. सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए लोग कृष्ण भगवान के दर्शन नजर आए. सुबह से ही आज लोगों ने व्रत रख अपने घर में तरह-तरह की मिठाइयां बनाईं. मंदिरों में बनाई गई झांकियों में कन्हैया के बाल रूप और उस दौरान घटी घटनाओं को अलग-अलग तरीके से पेश किया गया है.

रात 12 बजे से विशेष आयोजन
इस दौरान रात 12 बजे से सभी मंदिरों में विशेष आयोजन हैं. इस दौरान भगवान का भोग लोगों में बांटा जाएगा साथ ही विशेष आर्ती भी की जाएगी. वहीं लोगों को दर्शनों में समस्या न हो इसके लिए अलग अलग लाइन का ‌सिस्टम किया गया है. साथ ही वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी और वॉलेंटियर्स लगातार सोशल डिस्टेंसिंग व कोरोना नियमों को ध्यान में रखते हुए लोगों से दर्शनों की अपील कर रहे हैं.

ट्रैफिक की भी व्यवस्‍था
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक की भी विशेष व्यवस्‍था की गई है. बांके बिहारी मंदिर की तरफ जाने वाली सड़क पर गाड़ियों की आवाजाही रोक दी गई है. साथ ही यहां पर बैट्री चलित गाड़ियों को लगाया गया है, जिससे मंदिर जाने वाले लोगों को समस्या नहीं हो.

...तो धार्मिक क्षेत्रों पर नहीं बिकेगा मांस और शराब, CM योगी जल्द लेंगे निर्णय!

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो लोग पहले मंदिर जाने से भी बचते थे वे आज श्रीराम को खुद का बताते हैं.

Uttar Pradesh News: मथुरा पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इशारों इशारों में स्पष्ट की खुद की मंशा, कहा- धार्मिक क्षेत्रों में नहीं होनी चाहिए शराब या मांस की बिक्री, प्रशासन से कहूंगा योजना बना कर प्रस्ताव पेश करे.

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मथुरा. श्री कृष्‍ण जन्मोत्सव पर मथुरा पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इशारों ही इशारों में एक बड़ी बात कह दी. इस दौरान सीएम योगी ने धार्मिक क्षेत्रों में बिक रहे मांस और शराब को लेकर अपनी मंशा जाहिर की. सीएम ने कहा कि सभी की तमन्ना है कि धार्मिक क्षेत्रों में किसी भी तरह के मांस या मदिरा का सेवन और बिक्री नहीं होनी चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मैं खुद प्रशासन से कहूंगा कि इसके लिए योजना बना कर प्रस्ताव पेश करें. इस पर काम किया जाएगा. साथ ही उन्होंने कहा कि किसी को परेशान नहीं होने दिया जाएगा और सभी का व्यवस्थित तौर पर पुर्नवास होगा.

सीएम योगी ने कहा कि 2017 में पहले यहां नगर निगम का गठन करवाया गया. फिर नगर निगम के गठन के साथ यहां के सात पवित्र स्थलों को तीर्थ स्थल घोषित करवाया और तीर्थस्थल घोषित होने के बाद अब यहां पर सब की इच्छा है कि इन सभी क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का मद्यपान या मांस का सेवन न हो और ये होना चाहिए. मैं प्रशासन से कहूंगा कि इसकी योजना बना करके भेजें.

राम के नाम पर कसा तंज
इस दौरान सीएम ने विपक्षियों और राजनेताओं पर भी तंज कसा. उन्होंने कहा कि पहले जो लोग मंदिर जाने में भी कतराते थे, उनमें आज श्रीराम और श्रीकृष्‍ण को अपना बताने की होड़ लगी है. पहले त्योहारों पर लोग कहीं भी आने जाने से डरते थे कि उन पर सांप्रदायिक होने का लेबल लग जाएगा. लेकिन अब बधाई देने वालों की होड़ लगी है.

पाबंदियां लगती थीं
सीएम ने इस दौरान अन्य राजनीतिक पार्टियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पहले किसी भी हिंदू पर्व और त्योहारों से बीजेपी के अलावा अन्य पार्टियों के लोग दूर भागते थे. अलग अलग तरह की पाबंदियां लगाई जाती थीं. रात को आयोजनों पर रोक लगती थी. लेकिन अब ऐसा कुछ नहीं है. हमारे तो कान्हा का जन्म ही 12 बजे हुआ है फिर पाबंदियां कैसी. उन्होंने कहा कि यही तो परिवर्तन है.

CM योगी ने कसा तंज, कहा- पहले मंदिर जाने से बचने वाले भी कहने लगे, राम हमारे भी

सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान फिरोजाबाद का भी जिक्र किया और मासूमों की मौत पर दुख जताया. (फाइल फोटो)

Uttar Pradesh News: मथुरा पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा- आज त्योहारों पर बधाई देने वालों की होड़ लगी है, पहले न कोई मंत्री आता था न सीएम कि कहीं उन पर सांप्रदायिक होने का लेबल न लग जाए.

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मथुरा. श्री कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर मथुरा पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षियों और राजनेताओं पर जमकर प्रहार किया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमने अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को पुर्नजीवित किया है. इसका असर ये रहा है कि राजनीतिक तुष्टिकरण के लिए पहले मंदिरों से दूरी बनाए रखने वाले राजनीतिज्ञ भी अब मंदिर जाने में संकोच नहीं करते. साथ ही कहने लगे हैं कि श्रीराम भी हमारे और श्रीकृष्‍ण भी हमारे. इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने बांके बिहारी मंदिर में दर्शन कर भगवान से कोरोना खत्म करने की प्रार्थना की.
सीएम ने इस दौरान कहा कि आज पर्व त्योहारों पर बधाई देने की होड़ लगी है. पहले न कोई मंत्री आता था और न सीएम. लोग डरते थे कि उन्हें सांप्रदायिक मान लिया जाएगा. त्योहारों पर बंदिशें लगती थीं. अलर्ट जारी होता था कि रात 12 बजे बाद कोई भी कार्यक्रम नहीं करेंगे. भगवान श्रीकृष्ण का जन्म ही रात में 12 बजे होता है, अब ऐसी कोई बंदिश नहीं है. हर्षोल्लास के साथ पर्व मनाया जाता है.

डर था कहीं लेबल न लग जाए
इस परिवर्तन के लिए पीएम मोदी को श्रेय देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश को यही नई दिशा दी है. सैकड़ों वर्षों से दबी भावनाएं, आस्था के केंद्र नए रूप में सामने आ रही हैं. आजादी के बाद पहली बार किसी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने अयोध्या में रामलला के दर्शन किए. इससे पहले की सरकारों में भय था कि साम्प्रदायिकता का लेबल न लग जाए. लेकिन, अब नया भारत अंगड़ाई ले रहा है. जो लोग पहले मंदिर जाने में संकोच करते थे उन लोगों में श्रीराम और श्रीकृष्ण को अपना बताने में होड़ सी लग गई है.

सात धार्मिक स्‍थलों को पर्यटन स्‍थल किया घोषित
सीएम ने कहा कि ब्रजपुरी में भौतिक विकास के साथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विकास पर भी पूरा ध्यान दे रहे हैं. इसी को देखते हुए ब्रज तीर्थ विकास परिषद का गठन किया गया है. यहां के सात धार्मिक स्थलों को पर्यटन स्थल घोषित किया है. उन्होंने कहा कि प्रयागराज के ऐतिहासिक कुंभ के बाद ब्रज में हुआ वैष्णव कुंभ भी सुव्यवस्था का नजीर बना. सीए योगी ने कहा कि कोरोना ने पिछले डेढ़ साल में देश-दुनिया मे काफी कोहराम मचाया. प्रदेश में इसकी दूसरी लहर पूरी तरह नियंत्रण में है लेकिन सावधानी और सतर्कता जरूरी है.

बच्चों की मौत पर जताया दुख
मथुरा में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने अपने फिरोजाबाद दौरे का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि डेंगू और मलेरिया के चलते मासूमों की मौत दुखी करने वाली है. उन्होंने कहा कि स्वास्‍थ्य विभाग पूरी तरह से सतर्क है और इसकी रोकथाम के लिए काम किया जा रहा है. साथ ही उन्होंने कहा कि मासूमों के परिजनों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं और हम हमेशा उनके साथ हैं.

मथुरा: हिन्दू देवता के नाम से डोसा बेचने पर युवक के साथ दुर्व्यवहार, मामला दर्ज

कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. (सांकेतिक फोटो)

नगर पुलिस अधीक्षक मार्तण्ड प्रकाश सिंह (Martand Prakash Singh) ने बताया कि डीग गेट निवासी इरफान की तहरीर पर अज्ञात युवकों के खिलाफ भादंवि की धारा 427/506 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है.

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मथुरा. उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद (Mathura District) में कुछ युवकों ने बाजार में ठेला लगाकर डोसा बेचने वाले एक मुस्लिम युवक के ठेले का बोर्ड कथित तौर पर इस वजह से तोड़ दिया, क्योंकि उसने अपनी दुकान का नाम हिन्दू देवता (Hindu Gods) के नाम पर रख रखा था. घटना का वीडियो सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल हो गया है. घटना यहां कोतवाली थाना क्षेत्र में विकास बाजार क्षेत्र में 18 अगस्त को हुई थी. नगर पुलिस अधीक्षक मार्तण्ड प्रकाश सिंह ने बताया कि डीग गेट निवासी इरफान की तहरीर पर अज्ञात युवकों के खिलाफ भादंवि की धारा 427/506 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

वहीं, पिछले हफ्ते खबर सामने आई थी कि मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में एक लिंचिंग की घटना ने पूरे देश में एक नया बवाल खड़ा कर दिया है. तस्लीम के साथ हुई इस मारपीट की घटना से पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है. कई नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप सामने आए हैं. ऐसे में इसके परिवार के लोग भी दहशत के साए में जी रहे हैं और सरकार से न्याय की गुहार लगा रहे हैं. एमपी में पीटा जाने वाला युवक तस्लीम उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के सांडी थाना क्षेत्र के बिराइचमऊ गांव का रहने वाला है. वह चूड़ियों की फेरी इंदौर में लगाता था.

पत्नी और मां सभी का रो-रो कर बुरा हाल है
बता दें कि बिराइच मऊ गांव के करीब 30 लड़के हैं, जो चूड़ियों की फेरी का काम करते हैं. वर्षों से चला आ रहा तस्लीम का व्यवसाय आज अचानक चर्चा का केंद्र बन गया और और इस घटना के बाद बड़े-बड़े नेताओं की प्रतिक्रिया इस पर आने लगी है. बिराइचमऊ का तस्लीम 5 बच्चों का पिता है. छोटे-छोटे बच्चे व पत्नी और मां सभी का रो-रो कर बुरा हाल है.

गांव में कई लोगों के आधार कार्ड दो नामों से बने हैं
मां और पत्नी का यही मानना है कि उसका बेटा और पति किसी तरीके से हरदोई वापस आ जाए. पिता मोहर अली बताते हैं कि गांव में कई लोगों के आधार कार्ड दो नामों से बने हैं. तस्लीम का आधार कार्ड भी असलीन और तसलीम नाम से दो आधार कार्ड बने हुए हैं. जाहिर है कि प्रशासनिक लापरवाही के चलते दोबारा आधार कार्ड बनते हैं और भुगतते पीड़ित हैं.

UP News Live Updates: श्री कृष्ण जन्माष्टमी मनाने आज मथुरा जाएंगे सीएम योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. (फाइल फोटो)

Uttar Pradesh News Live, August 30, 2021: मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए जिला प्रशासन ने जन्मोत्सव की तैयारियों को अंजाम दिया है. ब्रज तीर्थ विकास परिषद इस उत्सव में सांस्कृतिक रंग भरने के लिए तीन दिवसीय आयोजन कर रहा है.

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मथुरा. ब्रज की होली से सराबोर हो चुके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) अब कृष्ण जन्माष्टमी (Sri Krishna Janmashtami) मनाने कान्हा की नगरी मथुरा (Mathura) जाएंगे. मुख्यमंत्री सोमवार दोपहर वृन्दावन पहुंचकर बांके बिहारी का दर्शन कर उनके जन्मोत्सव में शामिल होंगे. मुख्यमंत्री के आगमन का कार्यक्रम प्रशासन को मिल गया है. इसे लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया है. श्रीकृष्ण की नगरी में मुख्यमंत्री करीब दो घंटे रुकेंगे. इस दौरान वह संतों से मुलाकात करेंगे. श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर कन्हैया के दर्शन करेंगे. मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए जिला प्रशासन ने जन्मोत्सव की तैयारियों को अंजाम दिया है. ब्रज तीर्थ विकास परिषद इस उत्सव में सांस्कृतिक रंग भरने के लिए तीन दिवसीय आयोजन कर रहा है. मथुरा के सभी प्रवेश द्वार सजाए हैं. श्रीकृष्ण जन्मभूमि तक जाने वाले सभी रास्तों को सजाया संवारा गया है. अनेक मंच सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए तैयार हो रहे हैं. ब्रज तीर्थ विकास परिषद के साथ ही नगर निगम ने व्यवस्थाओं में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है.

श्रीकृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी: मथुरा से गोकुल तक मंदिरों में ऐसे मनेगा जन्‍मोत्‍सव, ये होंगे खास कार्यक्रम

श्रीकृष्‍ण जन्‍मोत्‍सव पर मथुरा सहित गोकुल और वृंदावन के मंदिरों को भव्‍य तरीके से सजाया गया है.

Shri Krishna Janmashtami: जन्‍माष्‍टमी पर ब्रज के सभी मंदिरों में अलग-अलग समय पर गौशाला की गायों के दूध से दुग्‍धाभिषेक और दूध, दही, बूरा, शहद और घी से महाभिषेक के साथ ही सुबह की सबसे पहली आरती यानि कि मंगला आरती के दर्शन होंगे. इस दौरान श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन करने के साथ ही ऑनलाइन भी भगवान कृष्‍ण के जन्‍म के सभी कार्यक्रमों को देख सकेंगे.

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नई दिल्‍ली. ब्रज के सभी मंदिरों में श्रीकृष्‍ण जन्‍मोत्‍सव (Shri Krishna Janmotsav) की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. सोमवार को जन्‍माष्‍टमी (Janmashtami) के अवसर पर सिर्फ भगवान कृष्‍ण की जन्‍मस्‍थली मथुरा में ही नहीं बल्कि गोकुल (Gokul), वृंदावन (Vrindavan), बलदेव, महावन, बादग्राम, बरसाना, रावल सहित सभी प्रमुख गांवों में धूमधाम से कान्‍हा का जन्‍म मनाया जाएगा.

जन्‍माष्‍टमी पर ब्रज के सभी मंदिरों में अलग-अलग समय पर गौशाला की गायों के दूध से दुग्‍धाभिषेक और दूध, दही, बूरा, शहद और घी से महाभिषेक के साथ ही सुबह की सबसे पहली आरती यानि कि मंगला आरती के दर्शन होंगे. इस दौरान श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन करने के साथ ही ऑनलाइन भी भगवान कृष्‍ण के जन्‍म के सभी कार्यक्रमों को देख सकेंगे. मथुरा के श्रीकृष्‍ण जन्‍मस्‍थान (Shri Krishna Janmsthan) और द्वारिकाधीश से 30 अगस्‍त की मध्‍य रात को श्रीकृष्‍ण जन्‍म (Shri Krishna Janm) का सीधा प्रसारण दूरदर्शन पर किया जाएगा.

श्रीकृष्‍ण जन्‍मस्‍थान में सोमवार की रात्रि को कार्यक्रम की शुरुआत शहनाई और नगाड़े से होगी. इसके बाद सुबह 10 बजे से भागवत भवन में अभिषेक और पुष्‍पांजलि का कार्यक्रम होगा. जबकि जन्म महाभिषेक का मुख्य कार्यक्रम रात को 11 बजे गणेश-नवग्रह आदि पूजन से होगा. श्रीकृष्ण जन्म के समय रात 12 बजे घंटे-घड़ियाल बजाने और शंखध्वनि के साथ कान्‍हा का अभिषेक किया जाएगा. इसके बाद लाला के जन्म के दर्शन के लिए मन्दिर के पट यानी दरवाजे रात में डेढ़ बजे तक खुले रहेंगे.

श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था (Image-Shutterstock)

श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था (Image-Shutterstock)

मथुरा के द्वारकाधीश (Dwarkadhish) मंदिर में जन्‍माष्‍टमी के दिन मंगला आरती के बाद सुबह साढ़े 6 बजे पंचामृत अभिषेक और सुबह साढ़े 8 बजे श्रंगार के दर्शन होंगे. इसके बाद ग्‍वाल दर्शन और राजभोग आरती होगी. शाम को साढ़े 7 बजे उत्‍थापन, संध्‍या और रात को पौने 12 बजे जन्‍म के दर्शन होंगे.

वहीं वृंदावन बांके बिहारी मंदिर (Banke Bihari Temple) में रात को 12 बजे श्रीकृष्‍ण विग्रह का दूध, दही, बूरा, शहद और घी से अभिषेक होगा. इसके बाद कान्‍हा को पीले रंग के वस्‍त्र पहनाए जाएंगे. हमेशा की तरह बांके बिहारी मंदिर में रात को दो बजे मंगला आरती के दर्शन होंगे और ठाकुर जी को भोग लगाया जाएगा. इसके बाद सुबह साढ़े पांच बजे तक श्रद्धालु मंदिर में दर्शन कर सकेंगे. 31 अगस्‍त को सुबह पौने आठ बजे से 12 बजे तक नंदोत्‍सव और उसके बाद दधिकांधा का आयोजन होगा.

नंदोत्‍सव (Nandotsav) में श्रीकृष्‍ण के जन्‍म की खुशी में विभिन्‍न प्रकार के खेल-खिलौने, कपड़े, पैसे, फल-फूल और अन्‍य सामान लुटाकर खुशी व्‍यक्‍त की जाती है. जन्‍माष्‍टमी पर ब्रज के कई मंदिरों में नंदोत्‍सव का आयोजन होता है. इसके अलावा वृंदावन के बांके बिहारी में दधिकांधा का आयोजन होता है. जिसमें दही में हल्‍दी मिलाकर मंदिर के सेवायत होली खेलते हैं. यह प्रतीकात्‍मक रूप में कान्‍हा के जन्‍म की खुशी में ही होता है.

बलदेव और गोकुल में कान्‍हा के जन्‍म के उपलक्ष्‍य में नंदोत्‍सव और कार्यक्रमों का आयोजन होगा. इसके साथ ही वृंदावन के प्रेम मंदिर, राधाबल्‍लभ मंदिर, बरसाना और रावल में भी मंदिरों में जन्‍म कार्यक्रम होंगे. राधारमण मंदिर में सुबह दो घंटे तक लाला का अभिषेक और जन्‍मोत्‍सव मनाया जाएगा.

मथुरा: हिन्दू नाम से डोसे की दुकान चला रहे मुस्लिम शख्स को भीड़ ने पीटा, बताया 'आर्थिक जिहाद'

दुकान का नाम 'श्रीनाथ' रखा था. लोगों का गुस्सा इस बात को लेकर थान कि उसने मुसलमान होने के बावजूद अपने दुकान का नाम हिंदू के नाम पर क्यों रखा (फ़ाइल फोटो)

डोसे की ये दुकान एक मुसलमान (Muslim man running Dosa stand) चलाता है. उसने अपने दुकान का नाम 'श्रीनाथ' रखा था. लोगों का गुस्सा इस बात को लेकर था कि उसने मुसलमान होने के बावजूद अपने दुकान का नाम हिंदू के नाम पर क्यों रखा. इस मामले को लेकर तोड़फोड़ और हगांमे का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

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मथुरा. मथुरा में डोसा बेचने वाले एक दुकानदार ने आरोप लगाया है कि कुछ स्थानीय लोगों ने उनके दुकान पर तोड़फोड़ की है. इस मामले को लेकर मथुरा के कोतवाली थाने में FIR दर्ज की गई है. FIR के मुताबिक डोसे की ये दुकान एक मुसलमान (Muslim man running Dosa stand) चलाता है. उसने अपने दुकान का नाम ‘श्रीनाथ’ रखा था. लोगों का गुस्सा इस बात को लेकर था कि उसने मुसलमान होने के बावजूद अपने दुकान का नाम हिंदू के नाम पर क्यों रखा. इस मामले को लेकर तोड़फोड़ और हगांमे का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

FIR के मुताबिक 18 अगस्त को कुछ लोग इरफान के स्टॉल पर पहुंचे और पूछा कि उन्होंने इसका नाम ‘श्रीनाथ’ क्यों रखा है? इसके बाद इन सबने दुकान के बैनर को फाड़ कर हटा दिया. साथ ही इन सबने ने इरफान को मथुरा के विकास मार्केट से दुकान हटाने की भी चेतावनी दे डाली.

दुकानदार का आरोप
स्टॉल के मजदूरों ने कहा कि ये दुकान राहुल नाम का एक स्थानीय निवासी का है. इसे चलाने के लिए वह इरफान को रोजाना 400 रुपये देता है. स्टॉल चलाने वाले इरफान ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘हम इसे पिछले पांच सालों से चला रहे हैं; नाम को लेकर कभी कोई समस्या नहीं रही. हमने सोचा भी नहीं था कि कोई समस्या हो सकती है. उस दिन कुछ लोगों ने आकर बैनर फाड़ दिए और कहा कि मुस्लिम लोग हिंदू नाम से दुकान नहीं चला सकते. ऐसा लग रहा था कि उन्हें नाम के साथ कोई समस्या है.’

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वायरल हुआ वीडियो
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में कुछ लोगों को डोसा-विक्रेता को कथित तौर पर परेशान करते देखा जा सकता है. आरोपी को कथित तौर पर इरफान से ये कहते हुए सुना जा सकता है कि ‘हिंदू खाने आएंगे’, क्योंकि स्टॉल का नाम श्रीनाथ है.

आर्थिक जिहाद का आरोप
घटना का एक वीडियो बाद में फेसबुक पर भीड़ का नेतृत्व कर रहे देवराज पंडित ने पोस्ट किया. उन्होंने दुकानदार पर ‘आर्थिक जिहाद’ का भी आरोप लगाया. उसने ये भी दावा किया कि उनके जैसे लोगों के कारण हिंदुओं को रोजगार नहीं मिलता है. पंडित ने अपने फेसबुक फॉलोअर्स से ऐसे विक्रेताओं के खिलाफ विद्रोह करने की अपील की. दिलचस्प बात यह है कि पंडित पुजारी यति नरसिंहानंद सरस्वती के भक्त के रूप में जाने जाते हैं.

Krishna Janmashtami 2021: मथुरा में कृष्णोत्सव में शामिल होंगे CM योगी, जन्माष्टमी कार्यक्रम का करेंगे उद्घाटन

 मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री का मथुरा में करीब 90 मिनट ठहरने का कार्यक्रम है. इस दौरान वह श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिरों में दर्शन भी करेंगे.  (File photo)

Krishna Janmashtami 2021: उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ नागेंद्र प्रताप (Nagendra Pratap) ने यह जानकारी दी. यह आयोजन परिषद, राज्य के पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा किया जा रहा है.

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मथुरा. मथुरा (Mathura) के रामलीला मैदान में रविवार से तीन दिवसीय कृष्णोत्सव कार्यक्रम का आयोजन होगा और सोमवार को जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2021) के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) इसमें शामिल होंगे. उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ नागेंद्र प्रताप ने यह जानकारी दी. यह आयोजन परिषद, राज्य के पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा किया जा रहा है. परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्रा ने बताया, ‘सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोपहर साढ़े तीन बजे मथुरा आएंगे. वह कृष्णोत्सव का उद्घाटन करने के लिए रामलीला मैदान जाएंगे.’ मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री का मथुरा में करीब 90 मिनट ठहरने का कार्यक्रम है. इस दौरान वह श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिरों में दर्शन भी करेंगे.

वहीं, शुक्रवार को खबर सामने आई थी कि उत्तर प्रदेश में 30 अगस्त को मनायी जाने वाली जन्माष्टमी (Janmashtami) का रंग फीका हो सकता है. खासकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा में. वैसे तो मंदिरों और बाजारों की रौनक अब लौट आयी है, लेकिन कृष्ण जन्मउत्सव का जलसा वैसा नहीं हो सकेगा जिसकी उम्मीद लगायी जा रही थी. सरकार ने निर्देश जारी करके कहा है कि नाइट कर्फ्यू को प्रभावी ढ़ंग से लागू किया जाये. भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव रात के बारह बजे के बाद मनाया जाता है. नाइट कर्फ्यू (Night Curfew) रात के दस बजे से ही लागू हो जाता है. ऐसे में मथुरा के अलावा प्रदेश के दूसरे मंदिरों में भी जन्म का उत्सव फीका हो सकता है. लोगों के निकलने पर तो पाबंदी रहेगी. जाहिर है पुजारी ही मंदिरों में कृष्णजन्मोत्सव मना सकेंगे और लोग अपने अपने घरों में.

रात दस बजे से सुबह 6 बजे तक नाइट कर्फ्यू लगा रहता है
सभी तरह की पाबंदियों के हटाये जाने के बावजूद कोरोना प्रोटोकॉल की एक पाबंदी अभी भी जारी है. नियम के अनुसार पूरे प्रदेश में अभी भी रात दस बजे से सुबह 6 बजे तक नाइट कर्फ्यू लगा रहता है. ये अलग बात है कि इसका पालन नहीं हो रहा है. अब इसे सख्ती से पालन किये जाने को लेकर सरकार ने निर्देश दिये हैं. योगी सरकार ने टीम 9 की बैठक के बाद ये निर्देश दिये है कि यूपी पुलिस रात दस बजे से लागू होने वाले नाइट कर्फ्यू को प्रभावी ढ़ंग से लागू करे. ये भी कहा गया है कि दस बजने से पहले पुलिस सड़कों पर हूटर बजाकर लोगों को सचेत करें कि कर्फ्यू लगने वाला है. लिहाजा लोग घरों में चलें जायें.

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